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तलाकशुदा अध्यापिका को शादी का झांसा देकर देहशोषण का शिकार बनाने के आरोपी की याचिका खारिज

अब फिर लटकी गिरफ्तारी की तलवार
श्रीगंगानगर ।
तलाकशुदा अध्यापिका को शादी कर लेने का झांसा देकर देहशोषण का शिकार बनाने के आरोपी युवक द्वारा दायर की गई निगरानी याचिका को अदालत ने सुनवाई करने के पश्चात खारिज करने का फैसला सुनाया है। अपर जिला सेशन न्यायाधीश (संख्या दो) सुरेश कुमार की अदालत में श्रेया गुप्ता (28)पुत्र भगवतीप्रसाद गुप्ता द्वारा यह निगरानी याचिका उसके विरुद्ध 6 दिसंबर 2019 को निचली अदालत द्वारा प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर प्रसंज्ञान लेने और गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के आदेश के विरुद्ध दायर की गई थी। पीड़ित अध्यापिका के अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा के अनुसार न्यायाधीश ने गुरुवार को याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया। प्रकरण के अनुसार करीब 40 वर्षीय पीड़ित अध्यापिका ने 24 मई 2018 को महिला थाना में रिपोर्ट देते हुए श्री गुप्ता पर शादी कर लेने का झांसा देकर करीब अढाई वर्ष तक देहशोषण करने,नगद एवं चेक के जरिए लगभग 80 हजार रुपए तथा बुआ की बेटी की शादी में मां के पहनने के लिए सोने के आभूषण लेने तथा मांगने पर वापस नहीं करने तथा शादी से इंकार कर जाने का आरोप लगाया था। पीड़िता की श्री गुप्ता से फेसबुक पर जान पहचान हुई थी। आरोपों के मुताबिक तलाकशुदा होने का पता चलने पर श्रेय गुप्ता संपर्क बढ़ाने लगा। फिर शादी कर लेने का वायदा किया। उसके बेटे को भी अपना लेने का भरोसा दिलाया।अपने माता-पिता तथा बहन से भी मिलवाता रहा। उसके परिवार ने पीड़िता को अपने परिचितों से भावी बहू तौर पर मिलवाया। पीड़िता का आरोप है कि शादी का भरोसा जताकर श्रैय ने देहशोषण करना शुरू कर दिया। काफी समय तक अपने और अपने परिवार के आर्थिक संकट में होने का बता कर शादी की टालमटोल करता रहा। आर्थिक संकट का हवाला देकर ही उससे रुपए तथा आभूषण ले लिए। लगभग अढाई वर्ष तक देह शोषण किया। यही नहीं 22 अगस्त 2018 की रात को उसे और उसके पुत्र को मारपीट करने के बाद घर के एक कमरे में भी बंद कर दिया। इसके अगले दिन पीड़िता द्वारा 23 अगस्त को एक और प्रार्थना पत्र दिए जाने पर 24 अगस्त को महिला थाना में श्रैय गुप्ता, उसके माता-पिता और बहन पर धारा 376 और 406 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। जांच के बाद पुलिस ने अंतिम प्रतिवेदन (एफआर) लगा दी।पीड़िता ने अपने अधिवक्ता के जरिए अदालत में एफआर के विरुद्ध प्रोटेस्ट पिटिशन दायर की। अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा के अनुसार इस पर सुनवाई करते हुए अदालत में 6 दिसंबर 2019 को प्रथम दृष्टया साक्ष्यों और बयानों के आधार पर देहशोषण की धारा 376 (2) (एन)के तहत प्रसंज्ञान लिया जाकर गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के आदेश दिए। इस आदेश के विरुद्ध श्री गुप्ता ने अपर जिला सेशन न्यायाधीश (संख्या 2) की अदालत में निगरानी याचिका दायर की थी। याचिका पर न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्क वितर्क सुनें। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों एवं बयानों के आधार पर याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया। अब यह मामला वापिस सक्षम न्यायालय को भेज दिया गया है। इसके साथ ही आरोपी श्रेय गुप्ता पर फिर से गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। श्रैय गुप्ता अविवाहित है और पीड़िता के 15 वर्ष का पुत्र है।

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