एनएफआईडब्ल्यू द्वारा धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम की पूर्णसख्ती से क्रियान्वयन की मांग
श्रीगंगानगर। नेशनल फेडरेशन वूमैन ऑफ इंडिया(एनएफआईडब्ल्यू)ने प्रसन्नता व सहमति जताई है कि पुलिस महानिदेशक ने 25 अक्टूबर को सर्क्युलर निकालकर थानों में पूजा स्थलों का निर्माण निषेध कर दिया है। पुलिस भवन व थानों में मंदिर निर्माण की गतिविधियां राजस्थान धार्मिक भवन एंव स्थल अधिनियम 1954 का पूर्ण उल्लंघन है।यह अधिनियम भारत के धर्मनिरपेक्ष राज्य की बुनियाद है। संगठन की प्रदेश महासचिव निशा सिद्धू के अनुसार यह कानून स्पष्ट रूप से दो बातें कहता है-पहला कोई भी सरकारी स्थल, भवन, सार्वजिक स्थान, पार्क इत्यादि में कोई भी धर्म का स्थल नहीं बनाया जा सकता, जब तक जिला कलेक्टर या अन्य उचित सरकारी अधिकारी अनुमति न दे। दूसरा-कोई भी धर्म का ढांचा सार्वजनिक स्थानों पर नहीं बनाया जा सकता है। चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद हो, चर्च हो या गुरुद्वारा इत्यादि। राजस्थान के पुलिस थानों में मंदिरों के निर्माण लगातार हो रहे हैं। इस निर्माण के पीछे आस्था का सवाल कम बल्कि धर्म के नाम पर खुल्लम खुल्ला सरकारी भूमि पर कब्जा करना हैं। यह धार्मिक प्रतिस्पर्धा का भी हिस्सा है। उन्होंने कहा कि केवल एक सर्कुलर निकाल देने से कुछ नहीं बदलेगा।जरूरत है इस आदेश का सख्ती से क्रियान्वयन हों और इस कानून को लागू करने की जबरदस्त पहल की जाए।इसका मतलब यह भी है की जो अधिकारी इस कानून को लागू करेगा, उसके साथ पुलिस महकमे का खड़ा होना होगा क्योंकि तथाकथित हिंदुत्व की ताकतें उस व्यक्ति पर ही आकस्मिक रूप से पीछे पड जाएंगी।इस कानून का क्रियान्वयन तभी सम्भव होगा जब कोई पुलिस अधिकारी या थानाधिकारी जो ऐसे निर्माण को प्रोत्साहित करता है, जो कानून को लागू नहीं करने देता है, उसके विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज किया जाए। महासचिव ने कहा कि सरकार के सभी विभागों,अदालतों व विधानसभा इत्यादि के लिए भी इस तरह का ही सर्कुलर निकालना चाहिए ताकि इन जगहों पर भी कोई भी धार्मिक स्थलों का निर्माण रुक सके।इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में राज्य सचिवालय प्रांगण, राजस्थान हाईकोर्ट प्रांगण और अन्य सभी सरकारी भवनों व प्रांगण का सर्वे किया था। सर्वे में पाया गया कि इन स्थलों पर एक दर्जन से अधिक मंदिर विद्यमानथे े हमने अनेक पत्र उक्त कानून की सख्ती से पालन किये जाने की मांग को लेकर विभिन्न सम्बंधित अधिकारियों कोलिखे थे।अब ख़ुशी है कि पुलिस महानिदेशक ने पहल करते हुए यह कदम उठाया है। उम्मीद है की अन्य विभाग और सभी जिला कलेक्टर भी ऐसी कार्रवाई करते हुए उक्त कानून को अपने अधिकार क्षेत्रों में लागू करवाएंगे।