नई दिल्ली
एक समय था, जब देश से अंग्रेजों को भगाने के लिए गांधी जी हर आंदोलन में अहिंसा का रास्ता चुनते थे, लोगों को हिंसा के नुकसान बताते थे। उन्हीं की अहिंसक राह पर चलकर देश को आजादी मिल गई। काफी समय बीत गया, आज हमारा देश काफी विकसित भी हो गया लेकिन अब शायद समाज के लोगों का मोह अहिंसा से मुड़कर हिंसा की ओर फिर लौटने लगा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है दिल्ली दंगे के आरोपी शाहरुख पठान का पैरोल पर छूटकर घर आने पर जोरदार स्वागत होना। जी, हां सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान छिड़े दंगों में खुलेआम बंदूक लहराने वाले शाहरुख पठान जब अपने इलाके में पहुंचा तो उसका ऐसा स्वागत किया गया कि किसी सेलिब्रिटी का भी ना हो पाए। ये वाकई देखना थोड़ा अजीब है, क्योंकि जिस शख्स ने दंगाई का रूप अपनाकर, पिस्टल लहराते हुए हिंसा को बढ़ावा दिया हो, उसे आखिरकार शोहरत के ताज पर किस वजह से बिठाया जा रहा है और क्या है इस स्वागत के मायने।