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दफनाए गए दोनों बच्चों के शव निकाल करवाया पोस्टमार्टम

  • मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड ने किया शवों का पोस्टमार्टम, गंदे पानी के नाले में डूबने से दो बच्चों की मौत का मामला
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    गंदे पानी के नाले में डूबने से दो बच्चों की मौत के मामले की जांच में टाउन पुलिस जुट गई है। इस कड़ी में गुरुवार को पुलिस ने टाउन की कल्याण भूमि में दफनाए गए दोनों बच्चों राजन (6) पुत्र बबलू एवं देवदास (8) पुत्र श्रवणदास निवासी वार्ड 46, बरकत कॉलोनी टाउन के शवों को निकलवा मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए नायब तहसीलदार की मौजूदगी में हुई। इस दौरान टाउन थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह राठौड़ व जांच अधिकारी संजू रानी सहित अन्य पुलिस अधिकारी व मृतक बच्चों के परिजन मौजूद रहे। मौके पर ही पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद पुलिस ने दोनों शवों को वापस दफना दिया। इस दौरान जांच अधिकारी एसआई संजू रानी ने बताया कि दोनों बच्चों की मौत 7 जुलाई को गंदे पानी के नाले में डूबने से हुई थी। 8 जुलाई को परिजनों ने बिना कोई पुलिस कार्रवाई करवाए शवों को कल्याण भूमि में दफना दिया था। शव दफनाने के दो दिन बाद 10 जुलाई को परिजनों की ओर से टाउन पुलिस थाना में आईपीसी की धारा 304ए के तहत मामला दर्ज करवाया गया था। उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में गुरुवार को कल्याण भूमि में दफनाए गए दोनों बच्चों के शवों को निकलवा मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया है। मामले में अनुसंधान किया जा रहा है। गौरतलब है कि 7 जुलाई को राजन व देवदास बरकत कॉलोनी के पास खेलते-खेलते हाल ही में गंदे पानी की निकासी के लिए बने नाले में गिर गए थे। पानी में डूबने से दोनों की मौत हो गई थी। घटना के तीन दिन बाद बबलूदास पुत्र राजकुमार दास निवासी वार्ड 46, बरकत कॉलोनी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 7 जुलाई को उसका बेटा राजन अपने ताऊ के बेटे देव के साथ खेल रहा था। घर के नजदीक ही नगर परिषद की ओर से करीब 8 फीट गहरा गंदे पानी का नाला बनाया गया है। लेकिन नगर परिषद अधिकारियों के लापरवाहीपूर्ण कृत्य के कारण नाला ढका नहीं गया है जो गंदे पानी से भरा हुआ था। दोनों बच्चे खेलते-खेलते खुले पड़े गंदे पानी के नाले में गिर गए तथा डूबने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। जेसीबी की सहायता से गंदे पानी के नाले में बच्चों की तलाश की गई तो तलाशी के दौरान राजन व देव नाले की सिल्ट में धंसे हुए मिले। इन्हें जेसीबी की सहायता से बाहर निकाला गया। दोनों बच्चों को राजकीय जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। जब उन्होंने बच्चों का पोस्टमार्टम व पुलिस कार्रवाई के लिए शिकायत दर्ज करवानी चाही तो मौके पर मौजूद नगर परिषद के कुछ अधिकारियों की ओर से परिजनों को यह कहकर डराया धमकाया गया कि नगर परिषद की शिकायत करने पर तुम्हारे घरों को जबरन तुड़वा दिया जाएगा। नगर परिषद अधिकारियों ने उन्हें डरा-धमकाकर व नाजायज दबाव बनाकर व भ्रमित कर पोस्टमार्टम करवाने व प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने से रोक दिया गया। जबकि नगर परिषद की ओर से उक्त गहरे नाले का निर्माण करवाया गया लेकिन नगर परिषद सभापति, आयुक्त, अधिशाषी अभियंता सहित नगर परिषद के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अपने पदीय कर्तव्यों की अवहेलना व उपेक्षा करते हुए लापरवाहीपूर्वक उक्त गहरे गंदे पानी के नाले को ढकने के लिए जानबूझकर फेरोकवर नहीं लगाए गए। इसके कारण खुले पड़े गंदे पानी के गहरे नाले में गिरने व डूबने से दोनों बच्चों की मौत हो गई। पुलिस ने नगर परिषद सभापति, आयुक्त व अधिशाषी अभियंता के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

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