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नकल के लिए सैनिटरी नैपकिन में डिवाइस छुपाई:8 सेमी के गैजेट में बना दिया मोबाइल फोन, लड़के-लड़कियों को इसे अंडरगारमेंट में छुपाना था; 25 लोगों को डेढ़ करोड़ में बेचा

बीकानेर

राजस्थान सरकार ने नकल रोकने के लिए REET के दौरान इंटरनेट बंद कर दिया, लेकिन नकल नहीं रोक पाई। बीकानेर के एक नकल गैंग ने इंटरनेट का उपयोग किए बिना ही नकल का इंतजाम कर दिया। गैंग ने सारी सरकारी इंतजामों का तोड़ निकालते हुए दो ऐसे डिवाइस बना डाले, जिनसे नकल की जा सके।

इनमें एक डिवाइस छोटे काले रंग की रिमोट जैसी थी। दूसरी डिवाइस चप्पल में लगाई गई। दोनों ही डिवाइस मोबाइल की तरह काम करती हैं। इनकी कीमत छह लाख रुपए रखी गई, जो बाजार में आ रहे किसी महंगे मोबाइल से कई गुना ज्यादा है। 25 लोगों को ये डिवाइस डेढ़ करोड़ रुपए में बेची गई।

अंडरगारमेंट में छुपाने को दी गई डिवाइस
रिमोटनुमा यह डिवाइस महिलाओं और पुरुषों दोनों को दी गई। दोनों को अपने कपड़ों में इस डिवाइस को विशेष तरीके से बांध कर छुपाना था। पुरुषों को अंडरगारमेंट में इसे छुपाना था। इसके लिए एक धागा भी इसमें लगाया गया। वहीं, महिलाओं को इसे छिपाने के लिए सैनिटरी नैपकिन लगाना था। ऐसे मामले में चूरू के रतनगढ़ में रहने वाली एक महिला को गिरफ्तार किया गया है।

8 सेमी लंबे डिवाइस में मोबाइल के सारे उपकरण फिट किए गए
रिमोट जैसा ये डिवाइस 8cm लंबा और 4cm चौड़ा है। इसमें मोबाइल के सभी उपकरण फिट किए गए। बैटरी, सिम और मोबाइल चिप का इस्तेमाल किया गया। जांच में सामने आया कि इस डिवाइस में किसी तरह का बटन नहीं है। इसे सीधे कॉल से जुड़ना था। इस रिमोट से जुड़ा एक ब्लूटूथ मिनी ईयरफोन अभ्यर्थी को कान में लगाना था।

इस डिवाइस में मोबाइल के सभी उपकरण फिट किए गए। बैटरी, सिम और मोबाइल चिप का इस्तेमाल किया गया। फोन ब्लूटूथ के जरिए कान में लगे डिवाइस से कनेक्ट था।

इस डिवाइस में मोबाइल के सभी उपकरण फिट किए गए। बैटरी, सिम और मोबाइल चिप का इस्तेमाल किया गया। फोन ब्लूटूथ के जरिए कान में लगे डिवाइस से कनेक्ट था।

चप्पल में भी मोबाइल किए गए तैयार
इस गैंग ने नकल कराने के लिए चप्पल में भी मोबाइल तैयार किए। गैंग ने बाजार से वो चप्पल खरीदी, जिन्हें बीच में से काटकर आसानी से वापस जोड़ा जा सके। स्पंज वाली इन चप्पलों को चाकू की मदद से बीच में से काटकर उसका सोल (तला) अलग किया गया। मोबाइल बैटरी, मदर बोर्ड और अन्य मशीनरी के साथ सिम के लिए जगह रखी गई।

सब कुछ फिट करने के बाद चप्पल की ऊपरी हिस्से को वापस जोड़ दिया गया। इसे मजबूत केमिकल से जोड़ा गया। फिर चारों तरफ सफाई की गई ताकि किसी को शक न हो। ये मोबाइल ब्लूटूथ के जरिए कान में लगे एक ईयरफोन से जुड़ा होता था।

इसी रिमोट और चप्पल के जरिए अभ्यर्थियों से नकल कराने वाली गैंग को कनेक्ट होना था, जो सामने से सभी प्रश्नों के उत्तर एक-एक कर बताने वाले थे। अभ्यर्थियों के कान में लगे मिनी ईयरफोन के माध्यम से पूरा आंसर पहुंच जाता। कुल 25 रिमोट और चप्पल के जोड़े तैयार किए गए थे।

स्क्रीनिंग प्रोसेस से चुने ग्राहक
रिमोट वाली डिवाइस और चप्पल को बनाने का काम मास्टरमाइंड तुलसीराम और मदन ने किया। फिर ग्राहक ढूंढना शुरू किया। इनके साथ पांच-छह लोगों का पूरा स्टाफ भी इस काम में जुटा रहा। यही स्टाफ लोगों से संपर्क कर रहा था।

वे लोग यह देखते कि सामने वाला शख्स नकल करने में सक्षम है कि नहीं। वह उन डिवाइस की कीमत दे सकेगा या नहीं। अलग-अलग लोगों से मुलाकात के बाद बाकायदा चयन किया गया। इनमें बीकानेर, अजमेर, नागौर, सीकर और जोधपुर के भी अभ्यर्थी शामिल रहे।

नकल के लिए मोबाइल नुमा एक दूसरी डिवाइस भी तैयार की गई। इस डिवाइस को उन्हीं लोगों को बेचा गया जो नकल करने पाने में सक्षम हों और इसकी कीमत दे सकते हों।

नकल के लिए मोबाइल नुमा एक दूसरी डिवाइस भी तैयार की गई। इस डिवाइस को उन्हीं लोगों को बेचा गया जो नकल करने पाने में सक्षम हों और इसकी कीमत दे सकते हों।

ऐसे होनी थी नकल
जिस अभ्यर्थी को रिमोट और चप्पल दी गई थी, उन्हें नकल का पूरा प्रॉसेस बताया गया था। अभ्यर्थी से दो मोबाइल लिए गए थे। एक मोबाइल को खोलकर उसके सारे हिस्से रिमोट और चप्पल में फिट कर दिए गए, जबकि दूसरा मोबाइल सरगना ने अपने पास रखा। ये तय हुआ था कि परीक्षा शुरू होने के साथ ही सभी 25 मोबाइल सामने रखकर एक साथ उत्तर दिए जाएंगे। नकल के लिए इस गैंग को पेपर मिला या नहीं? ये अभी तय नहीं है। बीकानेर पुलिस इसकी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है गैंग में कई लोग शामिल हो सकते हैं।

एक रात पहले दबोचा, पर चुप्पी रखी
बीकानेर पुलिस ने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात को ही चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। किसी को कानों कान खबर तक नहीं होने दी। जिन लोगों ने चप्पल खरीदी थी, उन्हें एग्जाम सेंटर से ही गिरफ्तार करने की योजना बनी थी। इसकी भनक रात को मुख्य सरगना तुलसीराम को लग गई थी। ऐसे में वो फरार हो गया। कुछ अभ्यर्थियों को भी पता चल गया था। ऐसे में वो भी सेंटर पर परीक्षा देने नहीं आए।

बीकानेर पुलिस ने शनिवार-रविवार की रात को ही चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। मुख्य सरगना तुलसीराम को इसकी भनक लग गई थी। ऐसे में वो फरार हो गया।

बीकानेर पुलिस ने शनिवार-रविवार की रात को ही चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। मुख्य सरगना तुलसीराम को इसकी भनक लग गई थी। ऐसे में वो फरार हो गया।

गैंग का सरगना पहले भी गिरफ्तार
इस गैंग का सरगना तुलसीराम कलेरा पहले भी नकल के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। जयनारायण व्यास कॉलोनी में कोचिंग सेंटर चलाने वाला तुलसीराम एक भर्ती में नकल कराने के लिए बीकानेर से गिरफ्तार हुआ था। तब एक प्राइवेट स्कूल और एक इंस्टीट्यूट के संचालक भी फंस गए थे। तब कई दिन जेल में रहने के बाद उसे जमानत मिल गई थी।

अब तक ये हुए गिरफ्तार

  • मदनलाल पुत्र भीखाराम जाट निवासी जेगलिया बीदावतान, चूरू
  • त्रिलोकचंद पुत्र भंवरलाल, निवासी नोखा, बीकानेर
  • ओम प्रकाश पुत्र बेगाराम जाट निवासी रामपुर ताल का थाना छापर, चूरू
  • गोपाल कृष्ण पुत्र रामलाल जाट निवासी जेगलिया बीदावतान, चूरू
  • किरण पत्नी नरेंद्र कुमार जाट निवासी लोहा, रतनगढ़ चूरू

इन्होंने खरीदी थी चप्पल, गिरफ्तार

  • हनुमान बिश्नोई, एग्जाम सेंटर, प्रतापगढ़
  • मालाराम बिश्नोई, एग्जाम सेंटर, प्रतापगढ़
  • आदूराम, एग्जाम सेंटर नीमकाथाना, सीकर
  • सुरजाराम, एग्जाम सेंटर वल्लभगार्डन, जयनारायण व्यास कॉलोनी, बीकानेर
  • गणेशाराम, एग्जाम सेंटर, अजमेर

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