देर शाम को किसानों ने एसडीएम दफ्तर को घेरा, रात को भी जारी धरना
श्रीगंगानगर। नई मंडी घड़साना में सिंचाई के लिए पानी दिए जाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसानों ने आज महापड़ाव शुरू कर दिया। दिनभर कस्बे की नई अनाज मंडी के एक में किसानों का महापड़ाव चलता रहा।शाम को जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से किसान नेताओं की उपखंड अधिकारी कार्यालय में वार्ता हुई, जो विफल हो गई। वार्ता विफल होने का पता चलते ही सैकड़ों की संख्या में अनाज मंडी में पड़ाव डाले हुए किसानों ने उपखंड अधिकारी कार्यालय की तरफ कूच कर दिया। कार्यालय की सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं। पुलिस बल ने किसानों को बैरिकेडिंग के पास रोक दिया। किसान अब वहीं रात को धरना देकर बैठे हैं। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण क्षेत्र के किसान लगातार मांग कर रहे हैं कि प्रथम चरण क्षेत्र की नहरों को चार समूहों में बांट कर दो समूहों में पानी दिए जाने का रेगुलेशन तय किया जाए। विगत मार्च माह से की जा रही इस मांग पर अभी तक प्रदेश सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे। पिछले 6 महीने से धरने प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आज नई अनाज मंडी में महापड़ाव शुरू कर दिया, जिसमें हजारों की संख्या में किसान इकट्ठा हो गए। दिन भर सभा स्थल पर माकपा के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल, अखिल भारतीय किसान सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्योपतराम मेघवाल, पूर्व विधायक पवन दुग्गल, किसान नेता सत्यप्रकाश सिहाग, खिराजराम, जिला परिषद के पूर्व डायरेक्टर सुनील गोदारा, राजू जाट, टिब्बा संघर्ष समिति के संयोजक राकेश बिश्नोई सहित बड़ी संख्या में किसान नेता तथा जनप्रतिनिधि मांग नहीं माने जाने पर कड़े आंदोलन की चेतावनी देते रहे। दोपहर बाद श्रीविजयनगर से जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता रामसिंह व अन्य अधिकारी पहुंचे। शाम को उपखंड अधिकारी कार्यालय में वार्ता आरंभ हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। देर शाम श्योपतराम मेघवाल ने बताया कि जब तक मांग पूरी नहीं की जाएगी, तब तक यह महापड़ाव जारी रहेगा।वार्ता विफल हो जाने से किसानों में आक्रोश फैल गया।उन्होंने अनाज मंडी से एसडीएम ऑफिस के लिए कूच कर दिया। किसानों को कार्यालय के नजदीक बैरिकेडिंग स्थल पर उन्हें रोक लिया गया।किसान नेताओं का कहना है कि आगामी 2 अक्टूबर से प्रथम चरण क्षेत्र की अनूपगढ़ शाखा में पानी छोड़ा जाने वाला है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी इससे पहले चार में से दो समूहों की नहरों का रेगुलेशन तय कर लें। तय किए हुए रेगुलेशन के अनुसार ही अनूपगढ़ शाखा में 2 अक्टूबर को पानी छोड़ा जाए। वार्ता में जल संसाधन विभाग तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने किसान नेताओं को बताया कि जिला कलेक्टर जयपुर में उच्च अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। किसानों की मांगे सरकार तक पहुंचा दी गई हैं। अधिकारियों ने पड़ाव समाप्त करने का आग्रह करते हुए बताया कि परसों बुधवार को संभागीय आयुक्त और जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता श्रीगंगानगर में होंगे। किसान नेताओं को तब इन अधिकारियों से वार्ता करवाने का भरोसा दिलाया गया लेकिन किसान नेताओं ने दो टूक जवाब दिया कि उनको अधिकारियों से कोई मतलब नहीं है।अधिकारी जहां हैं,वहीं से घोषणा कर दें कि 2 अक्टूबर को मांग के अनुसार रेगुलेशन तय करके पानी दिया जाएगा। इसी घोषणा पर ही महापड़ाव समाप्त होगा। उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण क्षेत्र में लगातार पानी की कमी होते जाने से इलाके के किसान बहुत परेशान हैं।फसलों की बिजाई नहीं हो रही। रेगुलेशन तय नहीं होने से किसान अपनी मर्जी से फसल की बिजाई भी नहीं कर पा रहा, क्योंकि उसे पता नहीं है कि कितना पानी मिलेगा। बिजी गई फसल का पकाव भी होगा या नहीं? किसान इसी असमंजस में है। कई वर्षों बाद यह देखने को मिल रहा है कि प्रथम चरण क्षेत्र की नहरों के लिए अधिकारी रेगुलेशन ही नहीं बना पा रहे। इस बीच मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी इसी मांग को लेकर श्रीविजयनगर में धरना प्रदर्शन करने की घोषणा कर रखी है। सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेताओं ने परसों जयपुर में उच्च अधिकारियों से वार्ता कर मांग की है कि प्रथम चरण क्षेत्र को पर्याप्त पानी दिया जाए। यह किसान आंदोलन वर्ष 2003-04 में हुए उग्र आंदोलन की ओर बढ़ रहा है। वर्ष 2004 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान अजमेर जेल में बंद किए गए किसान नेताओं से समझौता किया था कि प्रथम चरण क्षेत्र को इंदिरा गांधी नहर को मिलने वाले पानी में से 58 प्रतिशत पानी दिया जाएगा। अब किसान वही मांग कर रहे हैं कि प्रथम चरण क्षेत्र के लिए आरक्षित किया गया 58 प्रतिशत पानी दिया जाए।