पुलिस द्वारा किसानों पर लाठीचार्ज,अनेक घायल
भाजपा ने भी प्रशासन पुलिस से जताई नाराजगी
श्रीगंगानगर. जिला कलेक्ट्रेट पर आज दोपहर आमने सामने धरना लगाए हुए भाजपा कार्यकर्ताओं और किसानों में टकराव हो गया।इसमें किसानों के हत्थे चढ़े भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कैलाश मेघवाल को किसानों ने न केवल दौड़ाया बल्कि धक्का-मुक्की कर उनके कपड़े फाड़ दिए। इस पर भाजपा ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया। किसान विरोध जताते हुए भाजपा के धरना स्थल की तरफ बढ़े तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें किसानों के साथ-साथ कई लोग चोटिल हो गए। कुछ पुलिस वालों के भी मामूली चोटें आईं।दोपहर एक बजे से तीन बजे तक जिला कलेक्ट्रेट और इसके आसपास के इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही। भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात करना पड़ा। भाजपा ने प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार पर श्रीगंगानगर जिले के किसानों को पूरी मात्रा में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं करवाने, डीजल-पेट्रोल तथा बिजली की दरों में कमी लाने के लिए करों में कटौती नहीं करने सहित किसानों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर आज अपने जन जागरण अभियान के तहत जिला कलेक्ट्रेट पर धरने की घोषणा की थी। दूसरी तरफ तीन कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी गठित संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल श्रीगंगानगर जिले के आधा दर्जन किसान संगठनों ने इसे भाजपा की नौटंकी करार देते हुए विरोध जताने का आह्वान किया था। दोनों पक्षों में टकराव नहीं हो जाए, इसके मद्देनजर प्रशासन ने माकूल बंदोबस्त किए थे। भाजपा को जिला कलेक्ट्रेट के ट्रेजरी वाले गेट पर धरना लगाने के लिए जगह दी गई थी। यहां पर बड़ा शामियाना लगाया गया। दूसरी तरफ महाराजा गंगासिंह चौक से रेलवे स्टेशन को जाने वाले मार्ग पर नगर परिषद व जिला परिषद के बीच किसान के धरने के लिए जगह निर्धारित की गई।दोनों जगह में करीब 300 मीटर का फासला था। इस फासले में भी चार जगह बैरिकड लगाई गए।टकराव तथा अप्रिय स्थिति को टालने के लिए 700 पुलिसकर्मियों, कई थाना प्रभारियों, पुलिस उप अधीक्षकों, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों, आरएसी और क्यूआरटी के कमांडो को तैनात किया गया।
टकराव की नौबत दोपहर 1:30 बजे आई जब भाजपा अजा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कैलाश मेघवाल पुरानी आबादी थाना व मल्टीपरपज स्कूल से आगे से होते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समीप पहुंचे।वहां गाड़ी खड़ी कर चार पांच कार्यकर्ताओं के साथ मारा गंगासिंह चौक की तरफ चल पड़े। एक पुलिस अधिकारी ने श्री मेघवाल को इस तरफ से जाने से मना किया ।उनको कलेक्ट्रेट के अंदर से होकर ट्रेजरी गेट की तरफ जाने के लिए कहा। मगर श्री मेघवाल सीधे गंगासिंह चौक की तरफ चले गए।जहां से मुड़ कर उन्हें ट्रेजरी गेट पर जाना था। उन्होंने भाजपा का साफा भी पहना हुआ था। उनको गंगासिंह चौक में देखकर सामने ही बैठे किसान उद्वेलित हो गए। एकाएक किसान बैरीकेडिंग तोड़ते हुए आगे बढ़े और कैलाश मेघवाल को पकड़ लिया। बचने के लिए श्री मेघवाल भाजपा धरना स्थल की तरफ भागे, लेकिन किसानों ने पकड़ कर कपड़े फाड़ दिए। उनके साथ धक्का-मुक्की की। पुलिसकर्मी जब तक बचाव करते तब तक भीड़ ने कपड़े फाड़ते हुए कैलाश मेघवाल को अर्धनग्न कर दिया। इससे सामने धरने पर बैठे भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। उन्होंने किसानों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। जवाब में किसानों ने भी जमकर नारेबाजी की। दोनों तरफ से लोग आगे बढ़ने लगे तो पुलिस बल को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
किसानों में इतना आक्रोश था कि उन्होंने बैरीकेडिंग उखाड़ दी, लेकिन पुलिस बल ने उनको आगे नहीं बढ़ने दिया। इस पर किसान वापिस पीछे की तरफ आए स्टेशन रोड से कोतवाली की तरफ मुड़ गए। इस मोड़ पर की हुई बैरिकेडिंग को किसानों ने ट्रैक्टर से उखाड़ दिया।पुलिस बल को धकलते हुए किसान कोतवाली के आगे से होकर पेट्रोल पंप के पास से मुड़कर जेल चौराहे की तरफ बढ़ने लगे। तब पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा,क्योंकि जेल चौराहे पर भाजपाइयों का धरना चल रहा था। अगर किसान वहां पहुंच जाते तो दोनों पक्षों में कहीं ज्यादा भीषण टकराव होता। लाठी चार्ज करने से भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग चोटिल हो गए। मौके पर मौजूद कार्यपालक मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों को स्थिति नियंत्रण में लाने में करीब आधा घंटा लगा।
इस घटनाक्रम के बाद आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया। किसानों ने कोतवाली के नजदीक पेट्रोल पंप चौराहे पर आम सभा की जिसमें माकपा के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल,कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष पृथ्वीपालसिंह संधू भाजपा नेता एवं गंग कैनाल प्रोजेक्ट के पूर्व चेयरमैन गुरबलपालसिंह संधू, अखिल भारतीय किसान सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्योपतराम मेघवाल, कालूराम थोरी, रविंद्र तरखान, ग्रामीण मजदूर किसान समिति(जीकेएस) के संयोजक रणजीत सिंह राजू, प्रवक्ता संतवीरसिंह मोहनपुरा, किसान संघर्ष समिति के अमरसिंह बिश्रोई, जय किसान आंदोलन के रमन रंधावा, किसान आर्मी के मनिंदर सिंह मान, ऐटा सिंगरासर नहर निर्माण संघर्ष समिति के संयोजक राकेश बिश्नोई सहित बड़ी संख्या में किसान नेताओं ने संबोधित करते हुए भाजपा पर आरोप लगाया कि वह किसानों के नाम पर सिर्फ नौटंकी कर रही है। तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर लोगों का ध्यान भटकाने के लिए धरने प्रदर्शन करने में लगी है। पिछले 5 वर्षों में भाजपा ने कभी भी इस इलाके में नहरी पानी की कमी की समस्या को नहीं उठाया। आज हुई झड़प को लेकर भी किसान नेताओं ने भाजपा पर ही उकसाने का आरोप लगाया।
दूसरी तरफ भाजपा के धरना स्थल पर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष डॉ राजेंद्र सिंह राठौड़, सांसद निहालचंद मेघवाल,प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बीकानेर संभाग प्रभारी माधोराम चौधरी, नोखा बीकानेर विधायक एवं जिला भाजपा प्रभारी बिहारीलाल बिश्नोई प्रदेश मंत्री विजेंद्र पूनिया, विधायक संतोष बावरी, बलबीर लूथरा, रामप्रताप कासनिया, पूर्व मंत्री सुरेंद्रपालसिंह टीटी, पूर्व विधायक अशोक नागपाल,शिमला बावरी, लालचंद मेघवाल, जिलाध्यक्ष आत्माराम तरड, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष श्रीमती चेष्टा सरदाना, युवा नेता गुरवीरसिंह बराड़,भाजपा के स्थानीय निकायों में अध्यक्ष राजेंद्र लेघा, मनीष कौशल, कांता कीचड़ और प्रियंका बैलाण, जुगल डूमरा आदि ने जिला प्रशासन पर आज माकूल बंदोबस्त नहीं किए जाने को लेकर आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व सक्रिय हैं, जो इस तरह की हिंसक झड़पों पर उतारू हो जाते हैं। भाजपा नेताओं ने धरना स्थल पर हुई सभा में झड़प होने से पहले बिजली-पानी,पेट्रोल-डीजल की कीमतों आदि के मुद्दों को लेकर प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार पर अनेक आक्षेप लगाए। झड़प हो जाने के पश्चात भाजपा के इन नेताओं का शिष्टमंडल जिला कलेक्टर से मिला। उन को ज्ञापन देकर आज के घटनाक्रम के दोषों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की। इस संबंध में कोतवाली में देर रात मुकदमा दर्ज होने की संभावना है।
हीरो की तरह कंधों पर उठाया
अचानक हुई झड़प में किसानों द्वारा धक्का-मुक्की, हाथापाई कर कपड़े फाड़ देने से कैलाश मेघवाल बड़े क्षुब्ध नजर आए। दूसरी तरफ धरना स्थल पर मौजूद भाजपा के तमाम दिग्गज नेताओं में निराशा और मायूसी दिखाई दी। इस घटनाक्रम ने पिछले 10 दिन से इस धरने के लिए की जा रही मेहनत पर पानी फिर गया। जिन मुद्दों को लेकर जन जागरण अभियान चलाते हुए इस जिला स्तरीय धरने का आयोजन किया गया था, वे सब कहीं पीछे रह गए। दूसरी तरफ कुछ कार्यकर्ताओं ने कैलाश मेघवाल को एक हीरो की तरह अपने कंधों पर उठा लिया। उन्हें कंधों पर लेकर धरना स्थल पर आए। भाजपा में अब यह सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन ने धरना स्थल पर आने-जाने के मार्ग निर्धारित किए हुए थे तो श्री मेघवाल दूसरे रास्ते से किसानों के धरना स्थल की तरफ से क्यों चले गए? इस पर श्री मेघवाल के समर्थकों का कहना है कि उनको पूरा ज्ञान नहीं था। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जब वे गंगासिंह चौक की तरफ जा रहे थे तो एक पुलिस अधिकारी ने ही उनको गुमराह कर दिया।
पीएम नरेंद्र मोदी के होर्डिंग फाडे
कोतवाली के नजदीक किसान जब आम सभा कर रहे थे और इसके बाद उन्होंने जेल चौराहे की तरफ जब बढ़ना शुरू किया तो पुलिस बल तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। इससे भगदड़ मच गई। सिविल लाइंस की गलियों, पुराने राजकीय चिकित्सालय परिसर, रविंद्र पथ रोड तथा कोतवाली रोड की तरफ भाग कर किसानों ने जान बचाई। लाठी चार्ज हो जाने से किसानों में और भी ज्यादा आक्रोश बढ़ गया। कोतवाली के साथ पेट्रोल पंप कैंपस में पीएम नरेंद्र मोदी के चित्र वाले कोविड-19 नि:शुल्क वैक्सीनेशन के लगे एक बड़े होर्डिंग को देखते ही देखते किसानों ने फाड़ दिया। किसानों ने कई जगहों पर पुलिस की बैरीकेडिंग को उखाड़ा अथवा तोड़ दिया। भाजपाइयों की तुलना में किसानों की संख्या कुछ कम थी, लेकिन उनमें आक्रोश तथा जोश ज्यादा था,जो पुलिस बल ही नहीं बल्कि भाजपाइयों पर भी भारी पड़ा।