नई दिल्ली
26 साल की वेटलिफ्टर मीराबाई चानू दूसरी बार ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। 2016 रियो ओलिंपिक में वह क्लीन एंड जर्क में मेडल नहीं जीत सकी थीं। इस बार वे 49 किलो वेट कैटेगरी में मेडल की प्रबल दावेदार हैं। मीराबाई वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर-4 पर काबिज हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार वे अनुभव की कमी की वजह से मेडल नहीं जीत सकी थीं, लेकिन इस बार सफलता जरूर मिलेगी।
तीसरी रैंकिंग पर काबिज नॉर्थ कोरिया की री सोंग इस बार ओलिंपिक नहीं खेल रहीं, क्योंकि उनके देश ने टोक्यो गेम्स से हटने का फैसला किया है। वहीं, टॉप-2 पर चीन की वेटलिफ्टर हैं।
मीराबाई ने कहा कि वे टोक्यो ओलिंपिक में मेडल जीतने में सफल होंगी, क्योंकि उनके पास ओलिंपिक खेलने का अनुभव है। 2016 रियो गेम्स मीराबाई का पहला ओलिंपिक था। तब अनुभव की कमी के कारण वे मेडल जीतने में सफल नहीं हो सकी थीं।
मीराबाई ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया
इस साल अप्रैल में हुए ताशकंद एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में मीराबाई चानू ने स्नैच में 86 किग्रा का भार उठाने के बाद क्लीन एंड जर्क में वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम करते हुए 119 किलोग्राम का भार उठाया। वह कुल 205 किग्रा के साथ तीसरे स्थान पर रही थीं। इससे पहले क्लीन एंड जर्क में वर्ल्ड रिकॉर्ड 118 किग्रा का था। चानू का 49 किग्रा में इंडिविजुअल बेस्ट परफॉर्मेंस कुल 203 किग्रा (88 किग्रा और 115 किग्रा) था, जो उन्होंने पिछले साल फरवरी में नेशनल चैंपियनशिप में बनाया था।
11 साल की उम्र में वेटलिफ्टिंग में जीता था पहला मेडल
मीराबाई मणिपुर की इंफाल की रहने वाली हैं। उन्होंने वेटलिफ्टिंग में पहला गोल्ड 11 साल की उम्र में लोकल वेटलिफ्टिंग टूर्नामेंट में जीता था। उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर वेटलिफ्टिंग करियर की शुरुआत वर्ल्ड और जूनियर एशियन चैंपियनशिप से की। वे कुंजरानी देवी को अपना आदर्श मानती हैं।
वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय
मीराबाई वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर हैं। यह उपलब्धि उन्होंने 2017 में (49 किलो वेट कैटेगरी) हासिल की। उन्होंने 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 49 किलो वेट कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता था। मीराबाई ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता।
चोट के बाद 2019 में की शानदार वापसी
मीराबाई को 2018 में पीठ दर्द से जूझना पड़ा था। हालांकि उसके बाद उन्होंने 2019 के थाईलैंड वर्ल्ड चैंपियनशिप से वापसी की और चौथे नंबर पर रहीं। तब उन्होंने पहली बार 200 किग्रा से ज्यादा का वजन उठाया था। चानू कहती हैं कि उस समय भारत सरकार का पूरा सपोर्ट मिला। इलाज के लिए मुझे अमेरिका भेजा गया। इसके बाद मैंने न केवल फिर से वापसी की, बल्कि अपने करियर का सबसे ज्यादा वजन उठाने में भी सफल हुई।