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मंत्रिमंडल फेरबदल, राजनीतिक नियुक्तियां और संगठन में बदलाव की चर्चा जोरों पर

कई विधायक दिल्ली में,गहलोत शीघ्र जा सकते हैं दिल्ली
श्रीगंगानगर।
पंजाब में परिवर्तन के बाद अब राजस्थान में भी मंत्रिमंडल फेरबदल, राजनीतिक नियुक्तियां और संगठन में व्यापक बदलाव की चर्चाएं जोरों पर होने लगी है। ऐसे संकेत मिलने लगे हैं कि नवरात्र में राजस्थान में राजनीतिक बदलाव होना शुरू हो जाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली जाने की योजना बना रहे हैं। दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका के साथ इस संबंध में विचार कर अंतिम निर्णय किया जाएगा। सीएम गहलोत के दिल्ली दौरे का कार्यक्रम शीघ्र ही फाइनल हो सकता है। वे अब स्वस्थ हैं। सीएम गहलोत ने पिछले दिनों राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट), प्रशासन शहरों और गांवों के संग अभियान को लेकर बैठकें भी ली थीं। अब सीएम गहलोत राजनीतिक फैसले ले सकते हैं। इनमें मंत्रिमंडल फेरबदल, राजनीतिक नियुक्तियां और संगठन से जुड़े फैसले शामिल है। माना जा रहा हैं कि नवरात्र शुरु होते ही ये काम होने शुरू हो जाएंगे। सीएम गहलोत के लिए इस बार सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उन्होंने अपने संकट के दौरान बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से कांग्रेस में शामिल किए गए 6 विधायकों के साथ-साथ निर्दलियों को भी मंत्री पद दिलाने की कोशिश को झटका लग सकता है। ऐसे में कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। नए लोगों को मौका मिलेगा। जातिगत आधार पर मंत्रिमंडल में फेरबदल के साथ-साथ संगठन में चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा भी जोरों पर है। चार जातियों के वरिष्ठ नेताओं की तलाश की जा रही है इसमें से कुछ मंत्री भी शामिल हैं।
जोशी सक्रिय राजनीति में आएंगे!
मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी सक्रिय राजनीति में आने की चर्चा भी अब जोरों पर होने लगी। यही कारण है कि उनसे पायलट और अन्य मंत्रियों की मुलाकात से यह प्रतीत होने लगा है कि वह आने वाले समय में अपने बदले के स्वरूप में नजर आएंगे। सूत्रों का कहना है कि उनकी राहुल गांधी से प्रदेश में होने वाले बदलाव के संबंध में गोपनीय तरीके से बातचीत हुई है। यही कारण है कि अब उनकी हिम्मत राजनीति में पहले से अधिक बढ़ गई है। दो मंत्रियों को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में शामिल करने की चर्चा है,जिसमें से पंजाब के प्रभारी रहे राजस्व मंत्री हरीश चौधरी के साथ ही डॉ. रघु शर्मा का नाम शामिल है।
दिल्ली में लगा जमघट
दिल्ली के राजस्थान हाउस में इन दिनों सत्ताधारी विधायकों के साथ-साथ निर्दलीय विधायकों का जमघट लगा हुआ है। डॉ. महेश जोशी और डॉ. जितेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह अवाना, राजेंद्र सिंह बिधूड़ी, निर्दलीय विधायकों में रामकेश मीणा सहित विभिन्न नेताओं के दिल्ली में रहने की चर्चा है।सचिन पायलट समर्थित कई विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सचिन पायलट को जो वादा कर रखा है कि उसका ध्यान में रखकर ही मंत्रिमंडल फेरबदल, संगठन में बदलाव और राजनीतिक विरोधियों के फैसले किए जाएंगे।
पायलट का खेमा
माना जा रहा है कि सचिन पायलट की ओर से 5 लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। जिसमें हेमाराम चौधरी, दीपेंद्र सिंह शेखावत, रमेश मीणा, बृजेंद्र ओला, मुरारी लाल मीणा के नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा 4 संसदीय सचिव और संगठन तथा राजनीतिक नियुक्तियों में भी उनके लोगों को पर्याप्त नेतृत्व मिलने की संभावना बन रही है।
गहलोतका खेमा
सीएम गहलोत भी अपने समर्थकों को अधिक से अधिक लोगों को मंत्री पद दिलाने की भरपूर कोशिश करेंगे। बांसवाड़ा में महेंद्रजीत सिंह मालवीय, शकुंतला रावत,साफिया जुबेर या जाहिदा खान दोनों में से एक को,राजेंद्र गुढ़ा, योगेंद्र अवाना, निर्दलियों में संयम लोढ़ा, महादेवसिंह खंडेला के अलावा पहली बार विधायक बने 6 को संसदीय सचिव बनाया जा सकता है। इसमें बीएसपी निर्दलीय और कुछ कांग्रेस के विधायक भी शामिल हो सकते हैं।
इनकी हो सकती है छुट्टी!
सीएम गहलोत मौजूदा मंत्रिमंडल में से कई मंत्रियों को हटाए जाने की तैयारी भी कर रहे हैं। इसमें राजस्व मंत्री हरीश चौधरी, खान मंत्री प्रमोद भाया जैन, सहकारिता मंत्री उदय आंजना, परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास, शिक्षा राज्यमंत्री गोविंदसिंह डोटासरा, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, महिला बाल विकास राज्यमंत्री ममता भूपेश, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भंवर सिंह भाटी, गृह सुरक्षा राज्यमंत्री भजनलाल लाल जाटव और मोटर गैराज राज्यमंत्री राजेंद्र यादव हटाए जाने की तैयारी की जा रही है। मंत्रिमंडल बदलाव में कई मंत्रियों की छुट्टी होने की संभावना बन रही है। कई मंत्रियों को अपने पद से हटने का डर सता रहा है और वे इसीलिए पद बचाने की लॉबिग कर रहे है। चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा दिल्ली यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने संगठन महामंत्री के सी वेणुगोपाल सहित विभिन्न नेताओं से मुलाकात कर अपने मंत्री पद को बचाने के पूरे प्रयास किए हैं। परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने तो इस संभावना को देखते हुए रविवार रात को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी से उनके घर जाकर मुलाकात की थी। उन्हें लग रहा हैं कि कहीं उनका मंत्री पद चला नहीं जाए। प्रदेश में विधायकों ने कईयों की शिकायतें की थी। इनमें काम नहीं करने, सुनवाई नहीं होने जैसी शिकायतें ज्यादा थी। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट दिल्ली में सक्रिय है और वे नेताओं से मिल रहे हैं। उनकी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात हो चुकी है।
किसे मिलेगा मौका
फिलहाल श्रीगंगानगर से निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़ की न तो जयपुर में चर्चा हो रही है और ना ही नई दिल्ली में कोई उनका नाम ले रहा है। इस बार विधायक गुरमीतसिंह कुन्नर के सितारे भी गर्दिश में हैं।पायलट के करीबी माने जाने वाले गुरमीतसिंह कुछ समय से अशोक गहलोत का विश्वास जीतने में लगे हैं। विधायक जगदीशचंद्र जांगिड़ के नाम की भी फिलहाल कोई चर्चा जयपुर और दिल्ली में नहीं हो रही। हनुमानगढ़ जिले से चौधरी विनोद के आसार फिर भी ठीक लग रहे हैं।उनको अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है। वैसे भी चौधरी विनोद का पंजाब और दिल्ली के रास्ते जयपुर में पलड़ा बाकियों की अपेक्षा कुछ ज्यादा वजनदार है। सूत्रों का कहना है कि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों की इस बार 3 वर्ष बाद तक हो रही उपेक्षा को अशोक गहलोत बाकी रहते 2 वर्षों के लिए नजरअंदाज नहीं कर सकते। ऐसे में इन दोनों जिलों से किसी एक विधायक को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। दिलचस्प सवाल यह है कि मंत्रिमंडल में जगह पाने वाला एकमात्र विधायक सचिन पायलट के में से होगा या अशोक गहलोत के खेमे से।
भटकी राह का मुसाफिर !
सचिन पायलट की स्थिति उस यात्री जैसी है जो एक अच्छी बस में बैठा था, लेकिन उस से उतर गया।दूसरी बस में उसे जगह नहीं मिली और अब वह फिर पहली वाली बस में ही चढ़ने की कोशिश कर रहा है।यह पूरी कहानी असमंजस अविश्वास और जल्दबाजी की है।फिलहाल ऐसा लगता है कि सचिन पायलट अपनी सारी लड़ाई सिर्फ अपने चंद समर्थक अखबारों और मीडिया तथा यूट्यूब चैनलों के जरिए ही लड़ने जा रहे हैं। दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से उनकी मुलाकात को कुछ इस तरह से प्रचारित किया जा रहा है, मानो उनके सिर पर ताज रखा ही जाने वाला है जबकि राजनीति के दस्तूर कुछ और हैं।फिलहाल ऐसा लगता नहीं कि राजस्थान में सचिन के लिए बहुत कुछ करने को बचा है। आलाकमान उन्हें उनकी शर्तों पर काम करने देगा, इसमें संदेह है।सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे।इन दोनों में से ही कोई भी पद मिलना लगभग असंभव है।ज्यादा से ज्यादा अपने कुछ समर्थकों को मंत्रिमंडल या संगठन में शामिल करवा सकते हैं। उनके खुद के लिए राजस्थान में संभावनाएं काफी कम नजर आ रही हैं। इसके जिम्मेदार भी वे खुद ही हैं। इसलिए दोषी भी किसी और को नहीं ठहराया जा सकता। सचिन समर्थक मीडिया का एक ग्रुप अब यह कहने लगा है कि उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी जिम्मेदारी दी जाएगी।कांग्रेस में यह पहले भी होता रहा है कि किसी एक नेता को राज्य की राजनीति से दूर करने के लिए किसी दूसरे प्रदेश में भेज दिया जाए।राजस्थान की तुलना पंजाब के हालात से करने वाले लोग भी इस बात से तो सहमत हैं ही कि यहां अशोक गहलोत के रूप में एक बड़ी चुनौती सामने है,जिनका राजस्थान के हर विधानसभा क्षेत्र में अपना प्रभाव है।यह प्रभाव बनने में 40 साल का समय लगा है जबकि सचिन पायलट युवा होने के बावजूद एक वर्ग और क्षेत्र विशेष में ही अपना प्रभाव छोड़ पा रहे हैं।ऐसे में राजस्थान की राजनीति में कोई भी समीकरण उन्हें सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने में सक्षम नजर नहीं आ रहा।

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