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महानगरों में पढ़ाई काफी नहीं:नौकरी पाने में 12वीं के मार्क्स अहम नहीं, साइंस से ज्यादा मैनेजमेंट में रोजगार

नई दिल्ली

एंप्लॉयबिलिटी एंड स्किल्स रिव्यू के नाम से आई रिपोर्ट ने इन मिथकों के पर्दा उठा दिया है कि महानगरों में रहते हुए प्रीमियर संस्थानों में पढ़ना और 10वीं व 12वीं कक्षा में ज्यादा नंबर लाना अच्छा रोजगार पाने की गारंटी है। रिपोर्ट बताती है कि छोटे शहर, कस्बे व गांवों के आवेदकों का कार्यस्थल पर प्रदर्शन महानगरों के आवेदकों के बराबर ही है।

इंजीनियरिंग (साइंस) के छात्रों की तुलना में प्रबंधन, लॉ व ह्यूमैनिटी के छात्रों को रोजगार मिलने की संभावना अधिक है। यह बात भी सामने आई कि कम्युनिकेशन स्किल यानी अपनी बात को रखने का कौशल रोजगार पाने का एक मात्र कौशल नहीं है बल्कि संरचनात्मक दृष्टिकोण, काम करने की क्षमता व मोटिवेशन कहीं ज्यादा जरूरी कुशलताएं हैं।

विमेंस इंडिया चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और रोजगार व कौशल का विश्लेषण करने वाली इंटरनेशनल संस्था ग्रेड (ग्लोबल रिव्यू, असेसमेंट एंड डिटर्मिनेशन ऑफ एंप्लॉयबिलिटी) ने 10,043 छात्रों, प्रशिक्षुओं, आवेदकों व नए मानव संसाधन के टेस्ट व विस्तृत सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। सर्वे में देश के सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों के 1089 शहरों के 1774 शैक्षणिक संस्थाओं व 6084 संस्थाओं के रेस्पोंडेंट शामिल थे। नौकरी देते समय एक नियोक्ता अपने भावी कर्मचारी में जिन 11 कुशलताओं की अपेक्षा करता है, रिपोर्ट में उन सभी का विश्लेषण किया गया।

नगालैंड में सबसे अधिक एंप्लॉयबिलिटी
रिपोर्ट में देश में सबसे अधिक एंप्लॉयबिलिटी नगालैंड की 60% रही जबकि सबसे कम मिजोरम की 44.5% रही। एंप्लॉयबिलिटी का राष्ट्रीय औसत 54.22% है।

ये 18 राज्य राष्ट्रीय औसत से ऊपर
नगालैंड, मेघालय, दादर-नगर हवेली, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गोवा, राजस्थान, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पुड्‌डूचेरी, केरल, हिमाचल, मप्र, ओडिशा, असम, लक्षद्वीप, उत्तराखंड।

ये राज्य राष्ट्रीय औसत से नीचे
झारखंड, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, प. बंगाल, पंजाब, सिक्किम, बिहार, गुजरात, तमिलनाडु, मणिपुर, अंडमान व नीकोबार, अरुणाचल, मिजोरम।

शहरों व गांवों की कुशलता में सिर्फ 2.4% का फर्क
टियर-1 (महानगर) के आवेदकों का कुशलता स्तर 55.5%, टियर-2 (शहर) के आवेदकों का 54.1% और टियर-3 (कस्बों व ग्रामीण इलाके) के आवेदकों का 53.1% आंका गया।

मैनेजमेंट छात्रों के लिए रोजगार के ज्यादा मौके
स्ट्रीमवार देखा जाए तो मैनेजमेंट छात्रों की एंप्लॉयबिलिटी 55.6% है। इंजीनियरिंग छात्रों की एंप्लॉयबिलिटी 53.4% और अन्य कोर्स (लॉ, ह्यूमिनिटी, आर्ट्स) के छात्रों की एंप्लॉयबिलिटी 55.1% है, यानी साइंस स्ट्रीम से ज्यादा।

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