बांसवाड़ा
बारिश को लेकर राजस्थान के अलग-अलग जिलों में भगवान इंद्र को मनाने के लिए टोटके किए जा रहे हैं। ऐसे ही बांसवाड़ा जिले में एक अनूठी परंपरा है। यहां महिलाएं भगवान इंद्र को मनाती नहीं बल्कि उन्हें धमकाती हैं। इसके लिए वे सड़कों पर तलवार और लाठियां लेकर निकलती हैं। महिलाएं इंद्र देव को धमकी देती हैं कि बरस जाओ, नहीं तो अपराध बढ़ जाएंगे।
बरसों पुरानी यह परंपरा जिले के आनंदपुरी इलाके में चली आ रही है। जहां बारिश की कामना के लिए महिलाएं पुरुषों के कपड़े पहन घर से निकलती हैं। हाथ में तलवार और लाठियां लहराते हुए एक विशेष आवाज के जरिए भगवान इंद्र को धमकाती हैं। मान्यता है कि इसके माध्यम से इंद्र को संदेश भेजने की पहल की जाती है कि धरती पर लोग देवताओं की पूजा करते हैं। उन देवताओं के राजा तुम हो। ऐसे में सूखे के दौरान खाने को कुछ नहीं रहेगा तो पेट पालने के लिए धरती पर इंसान लुटेरा बन जाएगा। एक-दूसरे पर हमले बढ़ जाएंगे। इंसान ही इंसान का दुश्मन बन जाएगा। इसलिए अपराध जन्म नहीं ले, देवताओं के प्रति लोगों की धारणा नहीं बदले। इससे पहले अपना वजूद बनाए रखते हुए तुम बरस जाओ। आनंदपुरी, कलिंजरा और सल्लोपाट में इस तरह के चलन को स्थानीय भाषा में ‘धाड़’ कहा जाता है।

आदिवासी बाहुल्य आनंदपुरी तहसील क्षेत्र में परंपरा निभातीं महिलाएं।
पुरुष रहते हैं घरों में कैद
आनंदपुरी निवासी बुजुर्ग भूरजी डामोर ने बताया कि उनके परिवारों में महिलाएं बारिश की कामना को लेकर धाड़ करती हैं, लेकिन इन परंपराओं का चलन कब से हैं। ये कहना उनके मुश्किल है। इतना जरूर है कि इसे 70 साल चुके हैं। बचपन से जब भी यहां सूखे के हालात हुए हैं गांव की महिलाएं पुरुषों की वेशभूषा में घरों के बाहर आकर घूमती हैं। इस दौरान पैरों में बड़े घुंघरू और हाथ में लाठियां, या उनके पास जो भी हथियार हो। उसका प्रयोग करती हैं। इसकी खास बात यह है कि इस दौरान गांव के पुरुष घरों में रहते हैं और महिलाओं के सामने नहीं आते।

परंपरा के तहत सामने आई बस के चालक को लूट की धमकी देता महिला समूह।
सूखे के कारण हो चुकी है ऐसी कई घटनाएं
यहां के ग्रामीणों की माने तो जिले में कई बार ऐसे हालात हो चुके हैं। बारिश नहीं होने पर जब सूखे की स्थिति आ जाती है तो जिले में लूटपाट की घटनाएं बढ़ जाती थी। उस समय शाम होने के बाद यहां के जंगली इलाकों वाली सड़कों से आम आदमी का गुजरना मुश्किल होता था। गलती से भी कोई वाहन या आम आदमी गुजरता था (खास तौर पर होली त्यौहार से पहले) तब उसे लूट लिया जाता था। वाहन और आम आदमी को रोकने के लिए अंधेरे में छिपकर पथराव किया जाता था।