नई दिल्ली
जब भी त्योहार के सीजन की शुरुआत होती है, तो हर तरफ का माहौल बदला-बदला नजर आता है। जैसे कि इन दिनों नजर आ रहा है, क्योंकि धनतरेस, छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली जैसे कई अन्य त्योहार बेहद पास हैं और कुछ ही दिनों बाद देश में दिवाली का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाएगा। धनतेरस के अगले दिन छोटी दिवाली होती है। इस दिन लोग अपने-अपने घरों में दीये जलाते हैं और खुशियां मनाते हैं। साथ ही कहा जाता है कि इस दिन से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। लेकिन इस दिन को हम नरक चतुर्दशी के नाम से जानते हैं। इस दिन की कई मान्यताएं भी हैं, जिन्हें पूरा करना काफी शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी क्यों कहा जाता है? शायद नहीं, तो चलिए हम आपको इस बारे में बताते हैं।
इसलिए कहा जाता है नरक चतुर्दशी
दरअसल, मान्यता के अनुसार, इसी दिन श्रीकृष्ण भगवान ने राक्षस नरकासुर का वध किया था और साथ ही 16 हजार से ज्यादा महिलाओं को मुक्त किया था। ये सभी नरकासुर के बंदी गृह में थीं। तभी से छोटी दिवाली के दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में भी मनाया जाता है।
यमराज के लिए जलाया जाता है दीया
नरक चतुर्दशी को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन यमराज के नाम का एक दीया जरूर जलाना चाहिए। कहा जाता है कि अगर इस दिन कोई व्यक्ति यमराज देवता के लिए दीया जलाता है, और उनकी पूजा करता है तो उसे अपने जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति मिलने के साथ ही अकाल मृत्यु का भय भी नहीं रहता है।
इस दिन दीए भी जलाए जाते हैं
नरक चतुर्दशी के दिन को बेहद खास माना जाता है और इसके अगले दिन दिवाली का त्योहार होता है। वहीं, छोटी दिवाली के दिन लोग दीये जलाते हैं, क्योंकि इस दिन दीये जलाने की भी परंपरा है।
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