Saturday, May 9निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

राजस्थान के 3 टीचर्स को अवॉर्ड देंगे राष्ट्रपति:एक ने जनरल साइंस से बनाए ‘साइंटिस्ट’, दूसरे ने मैथ्स के फॉर्मूले फील्ड में समझाए, तीसरे ने दिए इंटरनेशनल प्लेयर

बीकानेर

कोरोना में जब बच्चे घर में सहमे हुए बैठे थे, किताब से दूर थे तो एक टीचर ने ऑनलाइन एज्यूकेशन का प्रकाश फैलाया। एक-दो नहीं बल्कि अनेक नए प्रयोग करते हुए सरकारी स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन एजुकेशन से जोड़ा। एक टीचर ने स्कूल के पीछे कचरा डालने का डंपिंग यार्ड बन चुके मैदान को सच में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बना दिया। इतना ही नहीं इस स्टेडियम से खिलाड़ियों को इंटरनेशनल गेम्स तक पहुंचा दिया। एक टीचर ने गणित को इतना इनोवेटिव बना दिया कि कठिन लगने वाला ये सब्जेक्ट उनके स्टूडेंट्स के लिए अब एंटरटेनिंग हो गया है। इन तीनों टीचर्स को आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद नेशनल अवार्ड से सम्मानित करेंगे।

दीपक जोशी अपने स्टूडेंट व प्रोजेक्ट के साथ।

दीपक जोशी अपने स्टूडेंट व प्रोजेक्ट के साथ।

जनरल साइंस को बना दिया इनोवेटिव
बीकानेर के राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल में जनरल साइंस के सीनियर टीचर दीपक जोशी ने साइंस के छोटे छोटे फार्मूलों से बच्चों को जोड़कर इस विषय के प्रति अवेयरनेस बढ़ाने का जोरदार काम किया है। यही कारण है कि गांव में रहने वाले सरकारी स्कूल के बच्चों ने शहरों की महंगी स्कूल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को साइंस एग्जिबिशन में कई बार हराया। शुद्ध पानी के लिए आरओ का खर्चा करने के बजाय मिट्‌टी के बर्तनों से पानी को साफ करने की विधि हो या फिर खेत में फिजूल मानी गई खींप से रेफ्रीजरेटर बनाने का कारनामा हो।

महज पांच सौ रुपए में ‘दीपक सर’ के स्टूडेंट्स ने इको फ्रेंडली चुल्हा बना दिया। इस चूल्हें में सोलर से चलने वाला पंखा है तो इससे बनने वाली ईंधन से कार्बनडाइई ऑक्साइड बहुत कम बनती है। ऐसे अनेक कारनामे करने के बाद जब कोरोना काल आया तो दीपक ने यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपने स्टूडेंट्स को पढ़ाने का अनूठा काम किया। उनके चैनल पर 120 कंटेंट उपलब्ध है। आज इन्हीं उपलब्धियों पर उन्हें राष्ट्रपति अवॉर्ड के लिए चयनित किया गया है। दीपक बताते हैं कि वो हर स्टूडेंट को विज्ञान से जोड़ना चाहते हैं।

जय सिंह ने झुंझुनूं के इस स्कूल में इंटरनेशनल ग्राउंड बना दिया।

जय सिंह ने झुंझुनूं के इस स्कूल में इंटरनेशनल ग्राउंड बना दिया।

डंपिंग यार्ड को बना दिया इंटरनेशनल ग्राउंड
झुंझुनू के सरकारी स्कूल में PTI के रूप में काम करने वाले जय सिंह खुद भारत के लिए नहीं खेल पाए तो उन्होंने अपना सपना बच्चों से पूरा किया। फिजिकल टीचर के रूप में जय सिंह ने देवरोड स्थित स्कूल में जब जॉइन किया तो वहां पीछे मैदान में कबाड़ पड़ा था। गंदा पानी डालने के लिए इस जगह का उपयोग हो रहा था, जबकि कागजों में ये मैदान था। जय सिंह ने यहीं से सफर शुरू किया और सबसे पहले इस मैदान को एक करोड़ रुपए की लागत से इंटरनेशनल मैदान बना दिया।

खास बात ये है कि आज न सिर्फ झुंझुनूं बल्कि राजस्थान के किसी भी सरकारी स्कूल में ऐसा मैदान नहीं है। यहां तक कि राज्य के एकमात्र बीकानेर के स्पोर्ट्स स्कूल में भी ऐसा मैदान नहीं है, जहां फुटबॉल, हॉकी, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस सहित दर्जनभर खेल हो सकते हैं। यहां सिर्फ सरकारी स्कूल के स्टूडेंट ही नहीं बल्कि सेना के लिए फौजी भी तैयार हो रहे है। सैनिक बनने की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को जय सिंह फ्री ट्रेनिंग इसी मैदान पर दे रहे हैं।

इस मैदान से पिछले पांच सालों में साठ से ज्यादा बॉयज और अस्सी से ज्यादा गर्ल्स स्टेट में खेल चुके हैं तो बीस से ज्यादा बॉयज और तीस से ज्यादा गर्ल्स नेशनल खेल चुकी हैं। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित ब्रिक्स गेम्स और 19वीं नेशनल फेडरेशन में भी जय सिंह के स्टूडेंट हिस्सा ले चुके हैं। जय सिंह बताते हैं कि जब शुरू में गर्ल्स मैदान में नहीं आ रही थीं, तो उन्होंने अपनी बेटी को मैदान में उतारा, फिर अन्य गर्ल्स भी आनी शुरू हुईं।

बिरला बालिका विद्यापीठ झुंझुनूं की टीचर अचला वर्मा

बिरला बालिका विद्यापीठ झुंझुनूं की टीचर अचला वर्मा

मैथ्स को बना दिया एंटरटेनिंग
स्टूडेंट्स को पूछा जाये तो उनके लिए गणित सबसे से कठिन विषय होता है। बिरला बालिका विद्यापीठ झुंझुनूं की टीचर अचला वर्मा के स्टूडेंट्स के लिए यह सबसे सरल और मजा देने वाला विषय है। दरअसल, अचला वर्मा ने गणित के सूत्र समझाने के लिए कई नए तरीके इजाद किए हैं। उन्होंने अपने टीचर्स को बोर्ड पर ही फार्मूले नहीं समझाए बल्कि फील्ड में काम करवाया। मैजरमेंट के लिए स्टूडेंट्स को मैदान में उतारा। यहां तक कि पाइथोगोरस के नियम सिखाने के भी नए तरीके निकाले। यही कारण है कि गणित को समझने के नए तरीके धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।

अचला वर्मा का कहना है कि गणित बहुत सरल विषय है, लेकिन इसके लिए बच्चों से प्रेक्टिकल करवाना होगा। उन्होंने अपने कमजोर स्टूडेंट्स को भी इतना तैयार कर दिया कि आज वो इंजीनियर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *