उदयपुर
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वसुंधरा राजे के करीबी कैलाश मेघवाल के पत्र से फिर मेवाड़ और राजस्थान की राजनीति में भूचाल आ गया है। 9 सितंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले कैलाश मेघवाल ने भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया को पत्र लिखकर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया को पद से हटाने की मांग की है। मेघवाल ने इसके लिए सदन में कटारिया के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने को कहा है। इसके साथ-साथ मेघवाल ने कटारिया पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
बता दें कि गुलाबचंद और कैलाश मेघवाल पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे हैं। हालांकि मेघवाल का पत्र सामने आने के बाद कटारिया ने सिर्फ इतना कहा कि कैलाश मेघवाल ने पत्र लिखा है, अब पार्टी जो भी निर्णय लेगी सहर्ष स्वीकार करेंगे।

गुलाबचंद कटारिया
भास्कर से बोले मेघवाल : ये मनमानी करते हैं, कांग्रेस से जीती महिला को जिला प्रमुख बना दिया, मूल्य आधारित राजनीति नहीं
अपने पत्र को लेकर कैलाश मेघवाल ने कहा कि ये मनमानी करते हैं, इसलिए लेटर लिखना पड़ा। मूल्य आधारित राजनीति नहीं है। अभी इन्होंने कांग्रेस से जीती हुई महिला को जयपुर में जिला प्रमुख बना दिया और जश्न मना रहे हैं। ये कोई मूल्य आधारित राजनीति का प्रमाण है क्या। इस देश में लोगों ने लोकसभा ठुकराई है, प्रधानमंत्री पद ठुकराया है। देश में अटल बिहारी वाजपेयी, दीनदयाल उपाध्याय जैसे आदर्श रहे और यहां ये जश्न मना रहे हैं। सतीश पूनिया को पत्र नहीं मिलने की बात पर भी मेघवाल ने कहा कि कोई झूठ बोले तो उसका कुछ नहीं किया जा सकता। अब अरुण सिंह आ आ रहे हैं दिल्ली से, वो इसलिए आ रहे हैं। देखते हैं वो क्या कहते हैं।
महाराणा प्रताप और राम पर बयान का जिक्र
मेघवाल ने अपने पत्र में कटारिया की महाराणा प्रताप और भगवान राम पर की गई टिप्पणियों को अनर्गल बताते हुए उनकी निंदा की है। मेघवाल ने कहा कि कटारिया के इसी तरह के बयानों से पार्टी को मेवाड़ में नुकसान हुआ है। पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी और गुलाबचंद कटारिया की तकरारों का भी मेघवाल ने जिक्र किया। मेघवाल ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि कटारिया किरण माहेश्वरी की पुत्री दीप्ति माहेश्वरी को राजसमंद से हरवाना चाहते थे, इसलिए उनकी सभा में इस तरह का बयान दिया। यही वजह रही कि दीप्ति सिर्फ 5 हजार वोटों से जीती, अन्यथा वो बड़े अंतर से जीततीं।

कैलाश मेघवाल का पत्र
मेघवाल ने कहा कि इस तरह से महाराणा प्रताप और राम के बारे में दिए गए दो बयान भारतीय जनता पार्टी के गले की फांस बन गई है। राजस्थान में वर्तमान समय में कांग्रेस पार्टी की सरकार है। ये सरकार लुंज पुंज और गुटबाजी के दौर से गुजर रही है। ऐसे हालात में भी भारतीय जनता पार्टी को तीनों उप चुनाव में वोट का बहुत बड़ा घाटा हुआ है। जेपी नड्डा को कैलाश मेघवाल की ओर से लिखे पत्र में तीनों विधानसभा चुनाव का भी विश्लेषण करके दिया है।
पैसे की हेरा-फेरी का आरोप, भींडर की तारीफ की
मेघवाल ने पत्र में कटारिया की छत्रछाया में लाखों-करोड़ों की हेरा-फेरी होने का भी आरोप लगाया है। साथ ही मेघवाल ने कटारिया को सुंदर सिंह भंडारी के दबाव के चलते मिले टिकट का भी जिक्र किया। मेघवाल ने यह भी कहा कि कटारिया ने कई नेताओं- कार्यकर्ताओं को षड्यंत्रपूर्वक राजनीति में आगे नहीं बढ़ने दिया। मेघवाल ने इस दौरान कटारिया के धुर-विरोधी वल्लभनगर से पूर्व विधायक रणधीर सिंह भींडर की तारीफ भी की।

उपचुनाव पर हो सकता है असर
मेघवाल के इस पत्र का सीधा असर राजस्थान में दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर हो सकता है। खास बात यह है कि यह दोनों ही सीटें मेवाड़ में हैं। उदयपुर की वल्लभनगर और प्रतापगढ़ की धरियावद सीट पर उपचुनाव होने हैं। दोनों ही सीटों पर कटारिया दखल रखते हैं। वल्लभनगर में तो जनता सेना के रणधीर सिंह भींडर से कटारिया का 36 का आंकड़ा है। ऐसे में यह पत्र आने के बाद इन सीटों पर टिकटों के वितरण, चुनाव प्रचार और उसके परिणाम पर असर दिख सकता है।
कई बड़े नेताओं को भी भेजा पत्र
मेघवाल ने अपना पत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ-साथ 8 अन्य नेताओं को भी भेजा है। इनमें आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, दत्तात्रेय होसाबले, गृहमंत्री अमित शाह केंद्रीय गृहमंत्री, वसुंधरा राजे, भूपेंद्र यादव केंद्रीय मंत्री, ओम माथुर, अरुण सिंह प्रदेश प्रभारी और डॉ सतीश पूनिया शामिल हैं।