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रिश्तेदार की नाबालिग लड़की का अपहरण कर दुष्कर्म करने के आरोपी को 10 वर्ष कठोर कारावास

श्रीगंगानगर। बालकों का लैंगिक अपराधों से सरंक्षण अधिनियम (पोक्सो एक्ट) मामलों की विशेष अदालत (संख्या 1) के न्यायाधीश सुरेंद्र खरे ने एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर दुष्कर्म करने के आरोपी युवक को आज 10 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई और 60 हजार रूपए का अर्थदंड लगाया।अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
विशिष्ट लोक अभियोजक गुरुचरणसिंह रुपाणा ने प्रकरण के तथ्यों की जानकारी देते बताया कि स्थानीय जाखड़ कॉलोनी निवासी एक शख्स ने 9 दिसंबर 2015 को महिला थाना में गिरिराज उर्फ दीपक मीणा (19)निवासी जुल्मी रोड एचएस कॉलोनी थाना कोतवाली रामगंज मंडी जिला कोटा पर उसकी 15 वर्षीय पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया था। परिवादी की 11वीं कक्षा में अध्ययनरत पुत्री 2 दिसंबर को गगन पथ पर एक कोचिंग सेंटर में जाने के बाद दोपहर 2 बजे घर आई थी। फिर शाम 4:30 बजे सहेली के जन्मदिन में जाने का कह कर चली गई और वापस नहीं आई। परिवादी ने पुलिस को बताया कि 6 दिसंबर को मोबाइल पर कॉल कर बेटी ने बताया कि वह दिल्ली में रेलवे स्टेशन के नजदीक एक कॉलोनी में है। वापस उसी नंबर पर कॉल की गई तो किसी सुनील नामक व्यक्ति ने बताया कि अभी कुछ देर पहले एक लड़की ने उसका फोन लेकर कॉल की थी। सुनील रावतभाटा,कोटा से बोल रहा था। पुलिस ने नाबालिग लड़की को कोटा से बरामद किया और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया। लड़की के बयान दर्ज किए गए, जिसमें उसने आरोपी पर बहला-फुसलाकर ले जाने और शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया।इस पर अपहरण के मुकदमे में दुष्कर्म की धाराएं जोड़ दी गईं।
अनुसंधान करने पर पुलिस को पता चला कि परिवादी शख्स आरोपी गिरिराज उर्फ दीपक का रिश्तेदार है। आरोपी ने जनवरी 2015 में अपने इस रिश्तेदार को मोबाइल फोन पर नए साल की शुभकामनाओं का मैसेज भेजा था। बाद में परिवादी की पुत्री ने इस नंबर पर फोन किया।इसके बाद गिरिराज मीणा उर्फ दीपक से उसकी लगातार फोन पर बात होने लगी। दोनों में प्रेम प्यार हो गया।इसी बीच गिरिराज बीएसएफ में भर्ती होने के लिए श्रीगंगानगर आया।दो दिन वह अपने इसी रिश्तेदार के घर रुका। इसी दौरान ही मौका पाकर उसने लड़की से शारीरिक संबंध भी बनाए। इसके बाद वह 2 दिसंबर 2015 को श्रीगंगानगर आया और लड़की को बहला-फुसलाकर ले गया।एक मंदिर में जाकर दोनों ने एक दूसरे को पति पत्नी मान लिया। गिरिराज लड़की को रावतभाटा ले गया।किराए के एक मकान में रहकर मजदूरी करने लगा। फिर ये कोटा के संतोषीनगर में आकर किराए के मकान में रहने लगे। यहीं से पुलिस ने लड़की को दस्तयाब और आरोपी को गिरफ्तार किया।
विशिष्ट लोक अभियोजक ने बताया कि अदालत में चालान पेश होने पर अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह, 24 दस्तावेजी साक्ष्य और 12 आर्टिकल (वस्तुएं)पेश की गईं। न्यायाधीश सुरेंद्र खरे ने आज निर्णय देते हुए धारा 376 (2) (एन)और 5एल/6 पोक्सो एक्ट के तहत 10 वर्ष कठोर कारावास और 50 हजार का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। धारा 366 और 363 में 7-7 वर्ष कठोर कारावास की सजा और 5-5 हजार का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना राशि 60 हजार रूपए पीड़िता को देने के आदेश दिए गए हैं।इसके अलावा उसे प्रतिकर स्कीम के तहत प्रति कर राशि देने की अनुशंसा भी की गई है।अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक-एक महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। विशिष्ट लोक अभियोजक ने बताया कि दीपक जमानत पर रिहा था। आज अदालत ने उसे दोषी करार देकर सजा सुनाते हुए जमानत मुचलके निरस्त कर दिए। उसे सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया।