वैज्ञानिक प्रयोग के लिए अंतरिक्ष में बने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के एक सेगमेंट में दरार पड़ने की बात सामने आई है। रूस के अंतरिक्ष यात्रियों ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि भविष्य में यह दरार चौड़ी हो सकती है। इन दरारों से हवा पास हो सकती है या नहीं, इस पर वैज्ञानिकों ने कोई जानकारी नहीं दी है।
इससे पहले भी अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के उपकरणों के पुराने होने की बात कह चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि 2025 के बाद ये उपकरण टूट सकते हैं। हाल ही में यह स्पेस स्टेशन नियंत्रण से बाहर भी हो गया था। वैज्ञानिकों ने इसे सॉफ्टवेयर में हुई मानवीय भूल बताया था।
उपकरणों को बदलने की जरूरत
रॉकेट एंड स्पेस कॉर्पोरेशन एनर्जिया के मुख्य अधिकारी ब्लादिमीर सोलोव्योव का कहना है, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के जारया मॉड्यूल की कुछ जगहों पर सतही दरारें देखी गई हैं। यहां का इन-फ्लाइट सिस्टम 80 फीसदी तक एक्सपायर हो चुका है। पिछले साल ही ज्यादातर उपकरण एक्सपायर हो चुके थे। इन्हें जल्द ही बदलने की जरूरत है।
1998 में लॉन्च हुआ था जारया कार्गो मॉड्यूल
रशिया के जिस जारया कार्गो मॉड्यूल में दरारें देखी गई हैं, उसे 1998 में लॉन्च किया गया था। वर्तमान में इसका इस्तेमाल स्टोरेज के लिए किया जा रहा है। रशियन स्पेस एजेंसी का कहना है, ऐसा ही रहा तो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन 2030 काम करने लायक नहीं रहेगा।
स्पेस स्टेशन पर 2024 तक रहेगा रूस
अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को बनाया गया था। जुलाई में रूस की लापरवाही के चलते यह स्पेस स्टेशन बेकाबू हो गया था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने बमुश्किल इस पर कंट्रोल पाया था। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि वह 2024 तक इस स्पेस सिस्टम का हिस्सा बनी रहेगी।