नई दिल्ली
देश में धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार हो रहा है। अप्रैल से जून के दौरान देश की GDP में 20.1% की तेजी देखी गई है। इससे रोजगार सृजन में भी थोड़ा फायदा मिला है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में 50 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। ये अनुमान देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अपनी एक रिपोर्ट में लगाया है।
2021-22 में श्रम बाजार की गतिविधियां सुधरेंगी
SBI के इकॉनोमिस्ट्स का मानना है कि 2021-22 में श्रम बाजार की गतिविधियां सुधरेंगी और महामारी के बीच कंपनियां नियुक्तियों को बढ़ा सकती हैं। अर्थशास्त्रियों ने EPFO और NPS के नियमित तौर पर जारी मासिक वेतन रजिस्टर आंकड़े का भी जिक्र किया।
अगस्त में 15 लाख लोगों ने नौकरियां गंवाई
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के मुताबिक अगस्त महीने में 15 लाख लोगों ने नौकरी गंवाई हैं। इसमें 13 लाख नौकरियां ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने गंवाई हैं। रोजगार को लेकर यह उम्मीद ऐसे समय में जताई गई है, जब दूसरी महामारी के बाद बेरोजगारों की संख्या बढ़ने और अर्थव्यवस्था में श्रम भागीदारी में कमी को लेकर चिंता जताई जा रही है।
अप्रैल से जून के दौरान 16.3 लाख नई नौकरियां
इकॉनोमिस्ट एसके घोष ने जानकारी दी कि किसी क्षेत्र को संगठित रूप देने की दर 10% है। वहीं कुल नियमित रोजगार (पेरोल) में नई नौकरी का अनुपात 50% है। SBI के इकॉनोमिस्ट्स की रिपोर्ट की माने तो अप्रैल से जून के दौरान 30.74 करोड़ नियमित रोजगार के नए अवसर मिले हैं। इसमें 16.3 लाख नई नौकरियां थीं, जो पहली बार EPFO और NPS से जुड़ीं है।
EPFO सब्सक्राइबर्स बढ़े
SBI की रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर नई नौकरियों में यही तेजी रही है तो 2021-22 में ये आंकड़ा 50 लाख के पार कर सकता है। जबकि ये 2020-21 में ये आंकड़ा 44 लाख था। रिपोर्ट में कहा गया है कि EPFO में शुद्ध रूप से अंशधारकों की संख्या फाइनेंशियल ईयर 2021-22 की पहली तिमाही में बढ़ी है।