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वैक्सीन का डेल्टा वायरस पर असर:वैक्सीन के दोनों डोज लेने के बाद डेल्टा वायरस से संक्रमण का खतरा 60 फीसदी तक घट जाता है, इम्पीरियल कॉलेज लंदन का दावा

वैक्सीन के दोनों डोज लेने के बाद कोरोना के नए रूप डेल्टा वायरस से भी संक्रमण का खतरा 50 से 60 फीसदी तक घट जाता है। यह दावा इम्पीरियल कॉलेज लंदन के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में किया है। रिसर्चर्स के मुताबिक, वैक्सीन न लेने वालों में संक्रमण का खतरा टीका लगवाने वालों के मुकाबले तीन गुना अधिक रहता है।

98,233 लोगों के बीच जाकर रैंडम सैम्पल लिए
रिसर्च के लिए 98,233 लोगों के घर जाकर सैम्पल लिए गए। 24 जून से 12 जुलाई के बीच सैम्पल की पीसीआर टेस्टिंग की गई। इनमें से 527 लोग पॉजिटिव आए। इन 527 पॉजिटिव सैम्पल में से 254 सैम्पल में मौजूद वायरस की उत्पत्ति को समझने के लिए दोबारा लैब में जांच की गई। रिपोर्ट में सामने आया कि इन सैम्पल्स में 100 फीसदी तक डेल्टा वायरस था।

रैंडम सैम्पल से वैक्सीन के असर को जांचा
इम्पीरियल कॉलेज के महामारी विशेषज्ञ पॉल इलियट का कहना है, हमनें लोगों के बीच से रैंडम सैम्पल लेकर कोरोना के खिलाफ वैक्सीन के असर को जांचा। इसमें एसिम्प्टोमैटिक मरीजों को भी शामिल किया गया। इस रिसर्च की मदद से संक्रमित और हॉस्पिटल में भर्ती किए जाने वाले मरीजों के बीच सम्बंध को समझने की कोशिश की जा रही है।

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के वैज्ञानिकों का कहना है, अगर डेल्टा वायरस संक्रमित करता है तो मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती होने की आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे में वैक्सीन की मदद से मरीजों के लिए सुरक्षा चक्र तैयार करना राहत देने वाली बात है। वैक्सीन लेने वालों में संक्रमण का खतरा 0.40 फीसदी है। वहीं, वैक्सीन न लेने वालों में यह खतरा तीन गुना ज्यादा यानी 1.21 फीसदी तक था।

युवाओं के लिए खतरा कम नहीं
इम्पीरियल कॉलेज ने युवाओं के लिए एक सर्वे कराया है। 24 जून से 12 जुलाई के बीच हुआ सर्वे कहता है, इंग्लैंड में हर 160 में से एक इंसान में संक्रमण का खतरा 4 गुना तक बढ़ गया था। सर्वे के मुताबिक, संक्रमण के मामले युवाओं में बढ़े थे। यहां संक्रमण के 50 फीसदी मामले 5 से 24 साल के युवाओं में देखे गए। इसलिए स्कूलों को बंद कराया गया। यही वजह है कि पीक पर पहुंचने से पहले ही कोरोना के मामलों में कमी आई।

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