चुनावी साल में नए जिलों की घोषणा; हर महिला मुखिया को स्मार्टफोन-फ्री इंटरनेट
जयपुर. राजस्थान में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए गहलोत सरकार मेगा प्लान की तैयारियों में जुट गई है। चुनावी साल में बड़े स्तर पर लोकलुभावन घोषणाओं के लिए अभी से गोपनीय तौर पर काम शुरू कर दिया गया है।
दिसंबर में सरकार की चौथी वर्षगांठ से लेकर फरवरी में सरकार के आखिरी बजट तक बड़े स्तर पर लोकलुभावन घोषणाएं की जाएंगी। अभी से उनका खाका तैयार किया जा रहा है। नेताओं और अफसरों की कोर टीम को इस काम में लगा दिया है और ब्रेन स्टॉर्मिंग भी शुरू हो चुकी है।
विधानसभा चुनाव में अभी तकरीबन 15 महीने बचे हैं, ऐसे में चुनावी साल में जाने से पहले गहलोत सरकार व्यक्तिगत लाभ वाली योजनाओं पर जोर दे रही है। ऐसी योजनाओं से वोटर सीधा जुड़ता है और इससे सरकार को लेकर पर्सेप्शन बनता है, इसी का फायदा उठाने के लिए सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं-कार्यक्रमों पर फोकस किया जा रहा है।
लोगों तक सीधा फायदा पहुंचाने वाली स्कीम्स पर फोकस
सरकार की दिसंबर में चौथी वर्षगांठ पर बड़े स्तर पर ऐसी घोषणाएं करने की तैयारी है, जिससे पॉपुलर डिमांड पूरी होती हों। आम आदमी को सीधा फायदा पहुंचाने वाली स्कीम्स में नई घोषणाएं शामिल होंगी। किसानों, छात्रों, महिलाओं और कमजोर तबके के लोगों पर फोकस किया जा रहा है, इन तबकों के लिए चौथी वर्षगांठ से लेकर बजट तक कई घोषणाएं होंगी। फिलहाल सीएम के स्तर पर मंथन का दौर चल रहा है।
नए जिलों पर कमेटी अलग-अलग जिलों के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर उनके ज्ञापन ले रही है। ऐसी कमेटियों में स्थानीय जनप्रतिनिधि और पार्टी नेता शामिल हैं। माना जा रहा है कि कमेटी सितंबर तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है।
सियासी लाभ वाली छोटी मांगों पर नजर
ब्लॉक लेवल तक की मांगों को भी मंगवाकर उन्हें पूरा करने से होने वाले सियासी फायदे का गणित भी देखा जा रहा है। छोटी-छोटी मांगों को पूरा करने वाली घोषणाओं को भी बजट में शामिल किया जाएगा। तहसील लेवल की सैकड़ों मांगें कई साल से लंबित चल रही हैं, उन्हें चौथी सालगिरह से लेकर अगले बजट तक पूरा किया जा सकता है, ऐसी मांगों को फिल्टर किया जा रहा है।
लोगों की भावनाओं से जुड़ी मांगों का ब्यौरा
सीएम को यह फीडबैक दिया गया है कि इलाकेवार भावनात्मक रूप से अहम मांगों को पूरा करने का सियासी तौर पर ज्यादा फायदा हो सकता है। इनमें धार्मिक, सामाजिक और क्षेत्रीय स्तर की छोटी-छोटी मांगें हैं, लेकिन उनसे जनता की भावनाएं जुड़ी हैं। जिलों से ऐसी भावनात्मक मांगों का भी अलग से ब्यौरा जुटाया जा रहा है। सियासी पर्सेप्शन बदलने वाली भावनात्मक मांगों को पहले पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
गहलोत सरकार दिसंबर में एनिवर्सरी पर हर वर्ग के लिए कुछ ऐलान करने की तैयारी में है। स्टूडेंट से लेकर बुजुर्ग और किसानों से लेकर आदिवासियों के लिए नए घोषणाओं का ऐलान हो सकता है। हालांकि, क्या आएगा इसको लेकर केवल अनुमान है।