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शहर में बढ़ी कुत्तों की संख्या गलियों से निकलना मुश्किल

-आयुक्त ने नहीं कि सुनवाई तो कलक्टर से मिले पार्षद
श्रीगंगानगर।
कुत्तों को इंसान का सबसे वफादार साथी कहा जाता है, लेकिन अब इसी वफादार साथी के आक्रामक होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर में लोग इन आवारा कुत्तों के झुंड से परेशान हैं, जो हर आते-जाते लोगों पर हमला कर रहे हैं। इसके बावजूद इनकी संख्या पर नियंत्रण लगाने की कोई कोशिश नहीं की जा रही। आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर हावी है कि बड़ी संख्या में डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। सुबह से लेकर रात तक आवारा कुत्तों की दहशत से लोग बाजार में आने से डरने लगे हैें। इन की संख्या पर अंकुश लगाने और इन्हे शहर से बाहर निकलाने की मांग को लेकर काफी समय से पार्षदो द्वारा नगरपरिषद अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाई गई है। इतना ही नहीं बोर्ड की बैठक में भी यह मुद्दा काफी गर्माया था। परन्तु आज तब इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। लिहाजा कुत्तों की दहशत से कई बार लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होता जा रहा है।
नगरपरिषद में सुनवाई नहीं तो कलक्टर से गुहार
कुत्तों की बढती संख्या और इनके आतंक से छुÞटकारा दिलाने की मांग को लेकर बुधवार को पार्षदों के एक प्रतिनिधि मण्डल ने जिला कलक्टर से मुलाकात कर आवारा कुत्तों को शहरी ऐरिया से पकड़वाकर अन्यत्र छुड़वाने की मांग कि। पार्षद कमल नारंग ने बताया कि इससे पूर्व भी आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों से इस मामले में मिल कर राहत की गुहार लगाई गई परन्तु कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए अब कलक्टर से मुलाकात कर राहत दिलाने की मांग की गई है। इस दौरान पार्षद विजेन्द्र स्वामी, सुशील कुमार, बबीता गौड़, प्रियंक भाटी, प्रियंक स्वामी, लोकेश सिहाग सहित कई पार्षद मौजूद रहे।

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