अलवर
29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। राजस्थान भी अपने टाइगर रिजर्व के लिए देश-दुनिया में पहचान रखता है। इनमें से एक है 1113 वर्ग किमी में फैला सरिस्का टाइगर रिजर्व। जिसमें 23 टाइगर (बाघ) हैं। जिनमें 10 बाघिन, 6 बाघ और 7 शावक हैं। जिनको बचाने में वन विभाग के कर्मचारी भी दिन रात मशक्कत करते हैं। जिन्हें हरे योद्धा के नाम से जाना जाने लगा है। वे दिन-रात जोखिम उठाते हैं। बाघ को शिफ्ट करने से लेकर ट्रैंकुलाइज करने जैसे बड़े कदम सबसे पहले सरिस्का से उठाए जाने लगे थे। उसके बाद दुनिया भर में सरिस्का में बाघ बचाने के अनोखे तरीकों का बड़ा मैसेज गया। देखते ही देखते देश में कई प्रोजेक्ट टाइगर आगे बढ़े हैं।बाघों के संरक्षण में सरिस्का मील का पत्थर साबित हुआ है।
फिर बाघों को बचाने के लिए एनटीसीए का गठन
सरिस्का में लचर व्यवस्था के चलते 2004-05 में बाघ खत्म हो गए थे। इसके बाद पर्यटन प्रेमी के साथ अलवर को बड़ा झटका लगा। बाघाें के संरक्षण के लिए 2005-06 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्राेल ब्यूराे का गठन हुआ। फिर वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुए सम्मेलन के बाद बाघाें के संरक्षण के लिए हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस को मनाने का निर्णय लिया गया था। एनटीसीए के गठन के बाद बाघों के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासाें से अब भारत में दुनिया के 70 प्रतिशत से अधिक जंगली बाघ पाए जाते हैं।

सरिस्का में बाघ को बचाने के लिए यह हरी फौज है। वन विभाग की टीम दिन रात लगी रहती है।
देश में कर्नाटक नम्बर वन, अब सरिस्का में 23 बाघ
देश में सन् 2014 में बाघों की आबादी 1411 के करीब थी, जाे 4 साल बाद अखिल भारतीय बाघ अनुमान रिपोर्ट 2018 के अनुसार बढ़कर 2967 हाे गई। इनमें मध्य प्रदेश में बाघों की सबसे ज्यादा आबादी है। दूसरे नंबर पर कर्नाटक और तीसरे पर उत्तराखंड राज्य है। राजस्थान में बाघाें की संख्या 102 है। इनमें रणथंभाैर में 69, धाैलपुर में 4, कराैली में 4 और सरिस्का में 23 बाघ हैं। मुकंदरा तथा बूंदी के रामगढ़ इलाके में एक-एक बाघ ने अपनी टेरिटरी बनाई हुई है। एनटीसीए द्वारा हर 4 साल में बाघों की संख्या की रिपाेर्ट जारी की जाती है। नई गणना की रिपाेर्ट अब 2022 में जारी हाेगी।
क्याें मनातें हैं अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस
अवैध शिकार और वनों के नष्ट होने के कारण विश्व के कई देशों में बाघों की संख्या लगातार घट रही थी। ऐसे में वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में बाघ सम्मेलन हुआ। इसमें हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने और लाेगाें काे बाघों के संरक्षण के साथ इस वन्यजीव काे बचाने के लिए जागरुक करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन में वर्ष 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करने की प्रतिबद्धता जताई गई।

सरिस्का जंगल में बाघ।
1973 में हुई थी ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत
वर्तमान में भारत में कुल 51 टाइगर रिजर्व कोर और बफर क्षेत्र हैं। राजस्थान में 3 टाइगर रिजर्व हैं। बूंदी जिले में रामगढ़ टाइगर रिजर्व काे एनटीसीए ने मंजूरी दे दी है। अभी इसका नाेटिफिकेशन हाेना बाकी है। इस इलाके में भी एक बाघ ने टेरिटरी बनाई हुई है। इसके नाेटिफिकेशन के बाद देश में 52 टाइगर रिजर्व हाे जाएंगे।
राजस्थान के टाइगर रिजर्व
1. सरिस्का, कुल क्षेत्रफल 1213.29 वर्ग किलाेमीटर। बाघाें की कुल संख्या 23, इनमें 10 बाघिन, 6 बाघ एवं 7 शावक।
2. रणथंभाैर, कुल क्षेत्रफल 1411.29 वर्ग किमी। कुल संख्या 77, इनमें रणथंभाैर में 30 बाघिन, 20 बाघ तथा 19 शावक हैं। इसके अलावा धाैलपुर में 1 बाघ, 1 बाघिन और 2 शावक हैं। इसी तरह कराैली इलाके में 1 बाघ, 1 बाघिन व 2 शावक हैं।
3. मुकंदरा, कुल क्षेत्रफल 759.99 वर्ग किमी। कुल संख्या-1 बाघिन।
4. बूंदी जिले का रामगढ़ जंगल। यहां भी एक नर बाघ ने टेरिटरी बनाई हुई है।
मील का पत्थर साबित हुआ सरिस्का
पूपूर्व हैड ऑफ द फॉरेस्ट फोर्स राजस्थान आरएन मेहरोत्रा ने बताया कि सन् 2004-05 में सरिस्का से बाघों के खात्मे के बाद मैंने रणथंभाैर में कैमरा ट्रैप से गणना शुरू कराई। बाघाें काे ट्रेंक्युलाइज कर इलाज की शुरूआत भी सरिस्का से की गई। एनटीसीए व वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्राेल ब्यूराे का गठन किया। गांवाें के विस्थापन का काम तेजी से बढ़ा। बाघ अभयारण्याें काे पैसा मिलना शुरू हुआ। सन् 2008 में रणथंभाैर से पहला बाघ सरिस्का में शिफ्ट किया गया। यह भी संसार में पहला प्रयाेग था। भारत के बाद बंगलादेश, नेपाल, कंबाेडिया और लाओस ने ऐसा किया।