श्रीगंगानगर

श्रीगंगानगर के कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल में लगाए अतिरिक्त बैड।
शहर के सरकारी अस्पताल में जहां एक ओर बैड की कमी सामने आ रही है वहीं ऑक्सीजन की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में रोगियों के परिजन ऑक्सीजन के लिए जुगाड़ बैठाने का प्रयास कर रहे हैं। हॉस्पिटल में रोगियों को तो ऑक्सीजन मिल रही है वहीं होम आइसोलेट रोगियों को ऑक्सीजन का संकट होने पर हॉस्पिटल तो पहुंच रहे हैं लेकिन वहां ऑक्सीजन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। प्राइवेट हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन नहीं होने से अब वहां का दबाव भी सरकारी अस्पताल पर आ रहा है।
देर रात ऑक्सीजन पर संकट
ऑक्सीजन की उपलब्धता प्रशासनिक अधिकारियों की कमेटी की अनुमति पर हो रही है। ऐसे में देर रात ऑक्सीजन लेना परेशानी बन रहा है। एक रोगी के परिजनों ने बताया कि शनिवार देर रात उनके रोगी का ऑक्सीजन स्तर घटा तो चिंता गहराने लगी। सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों से संपर्क किया तो उन्होंने दबी जुबान में माना कि जिस तेजी से रोगी आ रहे हैं, उसके अनुरूप ऑक्सीजन की उपलब्धता में थोड़ी परेशानी आ रही है। उनका कहना था कि हालांकि रोगी की हालत देखते हुए सभी को ऑक्सीजन देने का प्रयास कर रहे हैं। ऑक्सीजन उपलब्ध है लेकिन रोगी काफी तेजी से आ रहे हैं।
बड़े शहरों से आ रहे रोगी
वहीं बड़े शहरों से भी रोगी अब श्रीगंगानगर का रुख कर रहे हैं। ऐसे ही एक रोगी के पिता ने बताया कि उनकी बेटी दिल्ली में बीमार होने पर उसे श्रीगंगानगर लाया गया है। यहां सरकारी अस्पताल में बैड के साथ ऑक्सीजन की संभावना नजर आ रही है।
वैक्सीनेशन सेंटर में लगाए बैड
इसके साथ ही वैक्सीनेशन सेंटर में भी बैड लगा दिए गए हैं। पूर्व में कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल में वैक्सीनेशन हो रहा था। अब रोगियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर वहां भी बैड लगा दिए गए हैं।
प्लांट पर निगरानी
वहीं रोगियों के प्लांट उस ऑक्सीजन बॉटलिंग प्लांट तक जाने को तैयार हैं जो शहर के रीको में स्थित है, लेकिन वहां भी प्रशासन के अधिकारी नियुक्त हैं जिनकी अनुमति के बाद ही ऑक्सीजन मिल पा रही है। इस प्लांट के संचालक राजेश अग्रवाल का कहना था कि प्रशासन के दो अधिकारी उनके प्लांट पर है। उनकी देखरेख में सरकारी हॉस्पिटल को ऑक्सीजन सप्लाई हो रही है।