श्रृंगार की पूर्णता नख से शिख यानी सिर से लेकर पैरों के नाखून तक होती है। यह एक संपूर्ण श्रृंगार का मानक है, ऐसा समझ लीजिए। पुराने जमाने में मेहंदी से लेकर इत्र-फुलेल और फूलों आदि को श्रृंगार के लिए उपयोग में लाया जाता था। फिर धातु के गहने बनने लगे। तब से अब तक गहनों को पहनने के तरीके और चलन दोनों में कई परिवर्तन हुए हैं। एंकलेट्स या पाजेब या पैंजनी या पायल ऐसा ही एक गहना है। नई नवेली दुल्हन के पैरों में छम छम करते नूपुर घर भर में गृहलक्ष्मी के आने की आहट जगा दिया करते थे। इसलिए ब्याह-शादियों में महिलाओं के लिए भारी भरकम पाजेब देने का रिवाज भी है। धीरे-धीरे दुल्हन के पारंपरिक पहनावे और साज सज्जा में अंतर भी आया। पहनावे से लेकर गहनों की बनावट तक हर चीज का फ्यूजन हुआ और इसके साथ ही बदल गया एंकलेट्स का लुक भी। अब एंकलेट्स जीन्स, स्कर्ट, कैप्री, आदि के साथ भी पहने जाते हैं और दोनों पैरों की जगह एक पैर में भी दिखाई देते हैं।