बीकानेर. राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के दिन जैसे-जैसे बीत रहे हैं, वैसे-वैसे आयोजन की गहराई नजर आ रही है। मंगलवार की रात पद्मश्री हंसराज हंस ने सूफी तराने छेड़े तो उपस्थित दर्शक झूम उठे। उनके गीतों में आवाज की मिठास इतनी जबरदस्त रही कि तेज हवा और हल्की रिमझिम के बीच भी दर्शकों ने अपनी सीट नहीं छोड़ी।

हंसराज हंस का दर्शकों ने जबरदस्त अभिवादन किया।
पद्मश्री हंसराज हंस ने डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में सूफी तराने छेड़े, उनके अलाप भरे, क्लासिल पुट लगाए तो श्रोताओं की रूह बाग-बाग हो गई। हर संगीत प्रेमी झूम उठा, डूब गया हंस के आलापों में, सुरों में, गानों की धमक में, दिल छूने वाली दिलकश पेशकश में। उन्होंने महफिल का आगाज राग मलकोस की बंदिश प्यार नहीं है सुर से जिसको… से किया। उन्होंने राजस्थान के गजल गायक जगजीत सिंह को उनकी गजल ‘गरज बरस प्यासी धरती को फिर पानी दे मौला’ गाकर स्वरांजली दी। इसके बाद एक से एक उम्दा पेशकश का दौर चला।
हंस ने अभी इश्क दी गली विच्चों कोई कोई लगदां… गाना शुरू ही नहीं किया था कि धुन छिड़ते ही श्रोता समझ गए कौन सा गाना है, और लगे झूमने। जब गाना शुरू हुआ तो कोई संगीत प्रेमी ऐसा नहीं था, जो न झूमा हो। यह आलम तब नहीं रहा जब ऐ जो सिली सिली ओंदी है हवा… गाना शुरू होते ही श्रोता उसके बोलों, धुन और हंस की आवाज के जादू में खो से गए और निशब्द से पूरा गाना सुना, खबू तालियां बजाई, जमकर दाद दी। दिल टोटे-टोटे हो गया… तराने के शुरू से अंत तक तमाम शामियान खूब झूमे, खूब सुर में सुर मिलाए। ऐसा लगा मानो सूफी गायक हंस ने तमाम श्रोताओं के दिल की तमन्ना यह गाना गाकर पूरी कर दी। पूरे प्रोग्राम के दौरान जब दर्शकों से हंस के गानों के बारे में पूछा तो लगा कि हंस ने षायद ही कोई ऐसा गाना गाया है, जो सुपर-डुपर हिट नहीं हुआ हो। उन्होंने नित खैर मंगा सोणिया मैं तेरी… में तो तमाम कला प्रेमियों को हर लफ्ज, हर तान, हर लय के साथ सुर मिलाने और झूमने पर मजबूर कर दिया। इससे भी ज्यादा एक्साइटमेंट तो तब देखने को मिला जब सुपर सिंगर हंस ने अपने एक और सुपरहिट सॉन्ग दिल चोरी साड्डा हो गया… ओए कि करिए… कि करिए… गाकर हर मौजूद शख्स का दिल जीत लिया। उन्होंने सूफी कलाम ‘सुनो महाराजा जगत के वाली’ और ‘छाप तिलक…’ पेश कर शामियान की रूह तक को छू लिया।
कार्यक्रम में संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भाजपा के संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव अमिता प्रसाद सरभाई, वेस्ट जोन कल्चरल केंद्र की निदेशक किरण सोनी गुप्ता, बीएसएफ के महानिरीक्षक पुष्पेंद्र सिंह सहित तमाम प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

सांचू बॉर्डर पर भी इसी महोत्सव के तहत कलाकारों ने प्रस्तुति दी।

लखनऊ से आई आकांक्षा श्रीवास्तव के नृत्य ने हर किसी को प्रभावित किया।
कथक में चतुरंग, अष्टपदी और 33 चक्कर की बंदिश ने रिझाया
मंगलवार की शाम तब खास हो गई जब देश-विदेश में मशहूर लखनऊ की कथक नृत्यांगना आकांक्षा श्रीवास्तव के निर्देशन में दस नर्तक-नृत्यांगनाओं ने कथक के विभिन्न रूपों का उम्दा मुजाहिरा किया। इस दौरान पेश चतुरंग में सावन में अपने प्रियतम की प्रतीक्षा करती नायिका की अभिव्यक्ति ने सुधी दर्शकों को आह्लादित कर दिया। इसमें मोर की गत, पद संचालन और अंग विन्यास ने नृत्य प्रेमियों का दिल जीत लिया। पारंपरिक कथक की प्रस्तुति में ताल, अष्टमंगल 11 मात्रा की पेशकश में टुकड़े, परन, तिहानिया और 33 चक्कर की बंदिश का जादू सुधी दर्शकों के सिर चढ़कर बोला, सब वाह-वाह कर उठे, यहां तक कि कथक नहीं जानने वाले भी दाद दिए बगैर नहीं रह सके।

श्रीकोलायत में भी भजन संध्या का आयोजन रखा गया। हालांकि यहां दर्शक बहुत कम थे।
इस दौरान महाराज बिंदादीन द्वारा रचित आठ पद, जिसमें कथक का पूर्ण साहित्य है की अष्टपदी की प्रस्तुति ने कला प्रेमियों की खूब सराहना पाई। इसमें कथक के शुद्ध पक्ष के साथ कभी भगवान शिव, तो कभी भगवान कृष्ण को मंच पर साकार कर दिया। इस प्रस्तुति में आकांक्षा के साथ सिमरन कश्यप, शैली मौर्या, प्रीति तिवारी, गौरी शर्मा, सीमा सोनी, सपना सिंह, श्रद्धा श्रीवास्तव, आदित्य गुप्ता और विकास अवस्थी शामिल थे।

कथक प्रस्तुति में कलाकारों को खूब सराहा गया।

अलग अलग प्रदेशों से आए कलाकारों ने लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी।

हरियाणा के कलाकार मंच पर आए तो दर्शक सीट छोड़कर उनके साथ झूमे।

पंजाब के कलाकारों ने लोक नृत्य प्रस्तुत किए।