–लोगों को नहीं मिल पा रहा सुविधा का लाभ, लोकार्पण के करीब साल बाद भी नहीं हो पाए सफाई ठेके
श्रीगंगानगर। नगरपरिषद द्वारा 50-50 लाख रुपए की लागत से बनाए गए आधुनिक शौचालयों का आम नागरिक को कोई लाभ नहीं मिल रहा। जब से इन शौचालयों का लोकार्पण किया गया है तभी से इनमें से अधिकांश पर ताले लटक रहे हैं। जबकि इनके निर्माण के दौरान दावा किया था कि इनके निर्माण से लोगों को राहत मिलेगी और शहर की सफाई व्यवस्था में भी सुधार होगा। जानकारी अनुसार पिछली सरकार द्वारा निकायों में 50-50 लाख रुपए की लागत से आधुनिक शौचालय बनाने के लिए बजट स्वीकृत किया था।
जिला मुख्यालय पर भी पांच स्थानों पर आधुनिक शौचालयों का निर्माण करवाया गया। इसमें एक सार्वजनिक शौचालय को नगरपरिषद अधिकारियों ने अपनी सुविधा के लिए नगरपरिषद परिसर में ही बनवा डाला। इसके अलावा बस स्टेण्ड, इन्दिरा वाटिका, पुलिस लाइन के पास और एक कच्ची बस्ती क्षेत्र में बनवाया गया है। बस स्टेण्ड पर बने आधुनिक शौचालय, पुलिस लाइन और इन्दिरा वाटिका में बने शौचालय का लोकार्पण सभापति करूणा चाण्डक द्वारा गत वर्ष समारोह पूर्वक किया गया। इसके बाद कुछ दिनों के लिए इन पर लगे ताले भी खुले परन्तु इसके बाद से इन पर लटके ताले आज तक नहीं खोले गए हैं। जिससे इन स्थानों पर आने वाले लोगों को लाखों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी इन शौचालयों का लाभ नहीं मिल पा रहा। इस मामले में जब नगरपरिषद अधिकारियों से बात करनी चाही तो उनके फोन बन्द आ रहे थे। बजट खपाने का बने जरीया जानकारी अनुसार बस स्टेण्ड पर बने शौचालय का 22 नवम्बर को और इन्दिरा वाटिका में बने शौचालय का 23/12/2020 को लोकार्पण किया गया था। लोकार्पण के दौरान शहर में विकास के दावे करने के साथ इनके बनने से लोगों को राहत मिलने की बात कही गई थी। परन्तु चंद दिन दिखावे के लिए खुले यह शौचालय बाद में बन्द कर दिए गए । पुलिस लाइन के बाहर बने शौचालय के ताले तो शायद तक एक बार भी नहीं खुले। ऐसे में यह शौचालय आम आदमी को राहत देने की जगह केवल बजट खपाने का साधन साबित हुए है।अभी तक नहीं हो पाया ठेकानगरपरिषद द्वारा इन शौचालयों के रख-रखाव और यहां सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन्हे ठेके पर दिया जाना था। परन्तु आज ऐसा नहीं हो पाया। जानकारी मिली है कि नगरपरिषद में बने शौचालय का सफाई ठेका दिया गया। इसके बावजूद यहां सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। आलम यह है नगरपरिषद परिसर में बने शौचालय के पास से गुजरते समय लोगों को अपनी नाक पर कपड़ा रखना पड़ता है। यहीं हाल नगरपरिषद द्वारा शहर में बनाए गए अन्य यूरिनल का है। इनकी सफाई के लिए नगरपरिषद द्वारा जेटिंग मशीन मंगवाई गई परन्तु इनकी नियमित सफाई नहीं होती।