एक्टर और सिंगर पीयूष मिश्रा ने हाल ही में दिए इंटरव्यू के दौरान अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘तुम्हारी औकात क्या है पीयूष मिश्रा’ के बारे बात की। इस बीच उन्होंने बताया कि जब वो 7वीं कक्षा में थे तो एक महिला रिश्तेदार ने उनका यौन उत्पीड़न किया था।

पीयूष मिश्रा ने अपनी यह किताब फरवरी में लॉन्च की थी।
पीयूष बताते हैं कि करीब 50 साल पहले हुए इस हादसे ने उन्हें बुरी तरह से झकझोर कर रख दिया था। वो आज भी इससे पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।
पीयूष ने छिपाई महिला की पहचान
हादसे के बारे में बात करते हुए पीयूष ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि उन्होंने ऑटोबायोग्राफी में यौन उत्पीड़न के इस किस्से का जिक्र किया है, लेकिन महिला का नाम और उसकी पहचान नहीं बताई है। क्योंकि, उनका मकसद किसी से बदला लेना नहीं है।
पीयूष ने कहा- ‘7वीं कक्षा में हुई इस घटना से मैं शौक हो गया था।’

जो कुछ हुआ उससे मैं बहुत ज्यादा हैरान था- पीयूष
उस यौन उत्पीड़न ने मुझे जिंदगी भर की तकलीफ दे दी- पीयूष
पीयूष ने आगे कहा- ‘शारीरिक संबंध एक ऐसी चीज है, जिससे आपकी पहली मुलाकात हमेशा अच्छी होनी चाहिए। वरना ये जिंदगी भर के लिए आपको डरा देता है। उस यौन उत्पीड़न ने मुझे जिंदगी भर की तकलीफ दे दी और इससे उबरने में एक लंबा समय और कई साथी लगे। इस हादसे से बाहर आने में मेरे अंदर की कला ने बहुत मदद की।’

पीयूष मानते हैं कि सालों पहले हुए इस हादसे ने उन्हें बुरी तरह से तोड़ दिया।
मेरा मकसद किसी से बदला लेना नहीं- पीयूष मिश्रा
बातचीत के दौरान पीयूष बोले- ‘मैं कई लोगों की पहचान नहीं बताना चाहता। उनमें से कई महिलाएं और कई पुरुष अब फिल्म इंडस्ट्री में स्टैबलिश हो चुके हैं। मैं उनसे अब किसी भी चीज का बदला नहीं लेना चाहता हूं।’
मैं जिस तरह की बातें कहता हूं, युवा मुझसे कनेक्ट होता है- पीयूष
यूथ से कनेक्शन के बारे में बात करते हुए पीयूष ने कहा- ‘हो सकता है मैं जिस तरह की बातें कहता हूं, युवा मुझसे कनेक्ट होता है। या शायद में यूथ को महसूस होता है कि कोई ऐसा कलाकार है, जो ज्यादा भारी शब्द इस्तेमाल नहीं करता है। मैं अपने अंदर किसी भी तरह का बड़प्पन नहीं रखता हूं और मैं जितना युवाओं से खुद को रिलेट कर पाऊंगा, बतौरा कलाकार मेरे लिए यह बेहतर होगा।’

पीयूष आज के युवाओं के पसंदीदा लेखकों और गायकों में से एक हैं।
पीयूष ने किताब के जरिए शेयर की अपनी जर्नी
पीयूष मिश्रा की ऑटोबायोग्राफी उनकी जर्नी के बारे में बताती है। आखिर किस तरह वो ग्वालियर की गलियों से निकलकर दिल्ली के मंडी हाउस तक पहुंचे और फिर वहां से मुंबई तक का सफर कैसे तय हुआ। किताब में उनका नाम संताप त्रिवेदी या हैमलेट है। क्योंकि NSD में उन्हें इसी नाम से जाना जाता था।