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नगरपरिषद आज तक नहीं कर पाई आवार कुत्तों की समस्या का सामाधान

  • एक बार फिर लोगों ने प्रशासन से लगाई गुहार, निजात दिलाने की मांग
    श्रीगंगानगर।
    शहर में लगातार बढ रहे आवारा कुत्तों के आतंक से जनता को निजात दिलाने के लिए नगरपरिषद ने एक करोड़ रुपए का बजट पारित कर रखा है। बजट पारित किए लगभग साल का समय हो जाने के बावजूद इस बजट का इस्तेमाल करना तो दूर इस समस्या के समाधान के लिए अधिकारी कोई रुपरेखा तक नहीं बना पाए है। ऐसे में आए दिन कोई न कोई आवारा कुत्तों के आतंक का शिकार हो रहा है। बुधवार वेलकम विहार में हुई ऐसी ही एक घटना के बाद कई पार्षदों और अन्य लोगों ने सामुहिक रुप से प्रशासन को कुत्तों के आतंक से राहत दिलाने की मांग कि है। जिला कलक्टर के नाम प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि शहर में आवारा कुत्तों का आए दिन आतंक बढता जा रहा है। कुत्तों की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि कमजोर, बुर्जुग और बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। नगरपरिषद ने इनकी नसबंदी के लिए 1 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया था। परन्तु इस मामले में कुछ नहीं किया जा रहा। ऐसे में प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेकर शहर को आवारा कुत्तों से होने वाली समस्याओं से निजात दिलाए। कुत्तों की नसबंदी की व्यवस्था कि जाए और शहर से बाहर नर और मादा कुत्तों के लए अलग-अलग शेल्टर होम बनाए जाएं। जिससे इनकी संख्यामें हो रही वृद्धि को रोका जा सके। इस दौरान नगरपरिषद नेता प्रतिपक्ष डॉ.बबीता गौड़, पूर्व पार्षद पवन गौड़, उपसभापति लोकेश सिहाग, प्रियंक भाटी, संतोष, सन्तोष डागला, राजेश, राधेश्याम, कमल कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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