बीकानेर. आकाश में छाई काली घटाओं और रिमझिम बारिश के दौरान राष्ट्रीय पक्षी मोर ने जैसे ही स्वछन्द विचरण किया और प्राकृतिक वातावरण मिला, उन्होंने अपने पंख फैलाकर खुशी प्रकट की। पूरा वातावरण मोर की मधुर गुंजन से गूंज उठा। यह अवसर था वन विभाग की ओर से प्राकृतिक वातावरण में छोड़े गए 20 मोरों का। इन घायल और बीमार राष्ट्रीय पक्षियों का पब्लिक पार्क परिसर स्थित जन्तुआलय में उपचार चल रहा था।
डीएफओ (वन्यजीव) डॉ.सुनील कुमार गौड के अनुसार इन 20 मोरों को रेस्क्यू कर करीब दो माह पहले जन्तुआलय लाए गए थे। वेटरनरी विश्वविद्यालय के सहयोग से इनका उपचार किया गया। पशु चिकित्सक की ओर से इनके मेडिकल फिट होने का प्रमाण पत्र मिलनेे के बाद गुरुवार को इनको सुरक्षित स्थानों पर प्राकृतिक वातावरण में स्वछन्द विचरण के लिए छोड़ दिया गया है। डॉ.मीनाली जैन ने फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया। वहीं विभाग के जन्तुआलय अधीक्षक रवि शंकर कच्छावा, फोरेस्ट गार्ड सीताराम सहित कालूसिंह व बंटी कुमार ने मोर के उपचार में सहयोग किया।
किसी के चलने में दिक्कत, किसी के उडऩे में परेशानी
वन विभाग के फोरेस्ट गार्ड सीताराम के अनुसार रेस्क्यू कर लाए गए मोर घायल और बीमार स्थिति में थे। वेटरनरी चिकित्सक की देखरेख में इनका उपचार शुरू किया गया। रेस्क्यू कर लाए गए २० मोर में किसी की आंख में तो किसी के पैर में चोट थी तो किसी को उडऩे में परेशानी हो रही थी। घायल व बीमार स्थिति में इनकों श्रीडूंगरगढ़, नोखा सहित जिले के विभिन्न स्थानों से लाया गया था।