Wednesday, May 13निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

सहनशीलता के अभाव से दरक रहे रिश्ते

सीमा सन्देश @ जितेन्द्र शर्मा
श्रीगंगानगर।
विवाह दो इंसानों को नहीं बल्कि दो परिवारों और संस्कारों को जोड़ता है। आज उसी विवाह के विच्छेद (शादी टूटने) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कभी सब्जी में नमक कम डालने, मोबाइल पर काफी देर तक बात करने या छुप-छुप कर बात करने, गांव की जगह शहर में रहने की इच्छा या घूमने के लिए बाजार नहीं ले जाने जैसी छोटी-छोटी बातों का इतना बड़ा बतंगड़ बन जाता है कि जो लोग अग्नि को साक्षी मान सात-जन्म साथ निभाने का वचन देते हैं; वह साथ जल्दी ही छूट जाता है।
इसके विपरीत सात जन्म तो छोड़ सात घंटे भी साथ रहने का तैयार नहीं होते। वर्तमान में मायके वाले अपनी बेटी के लगातार संपर्क में रहते हैं। दिनभर बेटी का फोन मायके वालों को करने के बाद पति-पत्नी के बीच बढ़ते हस्तेक्षप के कारण भी रिश्ते दरक रहे हैं। आए दिन इस तरह के मामलों से दो चार होने वाले अधिवक्ता, पुलिस अधिकारियों सहित काउंसलिंग से जुडेÞ अन्य लोगों के अनुसार तलाक की केवल एक ही वजह होती है; एक दूसरे के साथ तालमेल ना बैठा पाना, दूसरे के साथ सामंजस्य न होना।
रिश्ता कोई भी हो आपसी तालमेल से बहुत सी समस्याओं को हल करके एक-दूसरे के साथ सामंजस्य बैठाया जा सकता है। इसके लिए एक दूसरे की सामाजिक, आर्थिक या पारिवारिक पृष्ठभूमि का कोई महत्व नहीं होता। अगर दिलों में दूरी न हो तो रिश्ते और प्रगाढ़ होते हैं।