बीकानेर
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने NSUI के 52वें स्थापना दिवस पर अपने पुराने दिनों को याद किया। इसमें कुछ संघर्ष के दिन थे तो कुछ साथियों की ओर से की गई दगाबाजी का वक्त भी। यहां NSUI कार्यकर्ताओं की क्लास लेते हुए गहलोत ने अपने पुराने साथियों को भी याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि NSUI तब जगह जगह शिविर रखती थी। इन शिविरों में कांग्रेस की रीति नीति की जानकारी दी जाती थी। प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए एक कैंप देशनोक में रखा गया। जिस दिन कैंप था, मैं वहां पहुंचा तो पता चला जिसे जिम्मेदारी वो खुद ही वहां नहीं है। अब अचानक से सारी व्यवस्था करना हमारे लिए मुश्किल था। तब भवानी शंकर शर्मा को ये जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने ही सारी व्यवस्था की। आज भवानीशंकर शर्मा दुनिया में नहीं है लेकिन उनका काम याद आता है।
जब गहलोत को गाड़े पर सोना पड़ा
गहलोत ने कहा कि एक बार बीकानेर में कार्यक्रम के दौरान आए तो लेट हो गए। जयपुर की सारी गाड़ियां निकल गई थी। अब सुबह ही जाने का कार्यक्रम था। तब तिलक जोशी हमारे साथ थे। बीकानेर के ही तिलक जोशी एनएसयूआई के राज्य सचिव थे। हमें बाद में गाड़ी पकड़नी थी तो रात को कहीं भी जाने के बजाय सड़क किनारे पड़े गाड़ों पर ही हम सो गए, सुबह जल्दी उठे और जयपुर पहुंचे।
ट्रेन में नीचे सोते थे, बेडरोल लेकर चलते
गहलोत ने बताया कि ये भी वक्त था जब एक से दूसरे शहर में जाने के लिए हमारे पास कारें नहीं थी। रेल में जाते थे, सीट नहीं मिलती थी तो दो सीट्स के बीच में बेड रोल बीछाकर सोते थे। इसी बेड रोल में शेविंग किट सहित सारा सामान होता था।
तब भी पॉलिटिक्स चलती थी पार्टी में
गहलोत तब NSUI और कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उससे भी लड़ना पड़ा। ये सब चलता है पार्टी में। देशनोक केंप को ही याद करते हुए उन्होंने कहा कि तब भी पॉलिटिक्स चलती थी। कांग्रेस में, यूथ कांग्रेस में, एनएसयूआई में। ये सब चलता रहता है। गहलोत ने इन्हीं परिस्थितियों से निकलकर जनता के बीच काम करने की नसीहत युवा पीढ़ी को दी।