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राजस्थान के सिंचाई पानी में प्रदूषण बंद करे पंजाब सरकार : निहालचंद

श्रीगंगानगर। पंजाब प्रदेश की औद्योगिक ईकाइयों द्वारा राजस्थान को आने वाले पानी में प्रदूषण की अत्यधिक मात्रा और समझौते के अनुसार राजस्थान को हिस्से का पूरा पानी नहीं मिलने जैसे मुद्दों को लेकर लोकसभा की जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति द्वारा बुधवार पुन: चंडीगढ़ में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें जल संसाधन स्थायी समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल, अरुण सिंह, श्रीगंगानगर से सांसद निहालचन्द समेत अन्य सदस्यों, पंजाब जलदाय विभाग और जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। यह बैठक मुख्य तौर पर पंजाब की औद्योगिक ईकाइयों और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन द्वारा सतलुज-व्यास नदियों में बहाए जा रहे औद्योगिक अपशिष्ट, कूड़े कचरे के माध्यम से राजस्थान को प्रवाहित होने वाले जल से जुडी प्रदूषण की समस्याओं और पंजाब प्रदेश द्वारा राजस्थान को समझौते के अनुसार हिस्से का पूरा पानी नहीं दिए जाने के सम्बन्ध में थी, जिस पर सांसद निहालचन्द ने राजस्थान की ओर से अपनी बात रखते हुए समिति और पंजाब सरकार के अधिकारियों का ध्यान गंदे पानी की आवक जैसे ज्वलंत मुद्दे पर आकर्षित करते हुए बताया कि पंजाब द्वारा राजस्थान प्रदेश को गंदे पानी की आवक बहुत पुराना मुद्दा है, जिसके स्थायी समाधान के लिए स्थानीय लोग और प्रशासन समेत हम सभी लोग पिछले कई सालों से प्रयासरत है, लेकिन पंजाब सरकार की उदासीनता के चलते ये समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
इस दूषित पानी की मार राजस्थान के 10 से ज्यादा जिलों के करोड़ों लोगों पर पड़ रही है, जिस वजह से यहां कैंसर, पीलिया, चर्म रोग और पेट संबंधी अन्य रोगों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
गंग कैनाल के पानी के शेयर को खखां हैड पर काउंट करें
सांसद ने बैठक में समिति के अध्यक्ष और पंजाब के अधिकारियों से एक बार पुन: राजस्थान प्रदेश में पंजाब द्वारा दूषित पानी की आवक बंद करने और समझौते अनुसार हिस्से का पूरा पानी दिए जाने जैसे गंभीर मुद्दों के स्थायी समाधान की मांग करते हुए जल्द ही सकारात्मक कार्यवाही करने पर जोर दिया, साथ ही उन्होंने गंग कैनाल के पानी के शेयर को खखा हेड पर काउंट करने का सुझाव भी समिति को दिया। समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने पंजाब सरकार के अधिकारियों को इस दिशा में शीघ्र ही सकारात्मक और ठोस कार्यवाही हेतु निर्देशित किया है, साथ ही उन्होंने इसकी स्टेटस रिपोर्ट भी लोकसभा समिति और केंद्र सरकार को भेजने को कहा है।
एक लीटर पानी में 30 माइक्रोग्राम यूरेनियम है
सांसद ने बताया कि एक सर्वे के अनुसार राजस्थान व पंजाब में पीने के 1 लीटर पानी में 30 माइक्रोग्राम युरेनियम पाया जाता है, जबकि यूरोपीय देशों में ये केवल 5 माइक्रोग्राम है । इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है, कि यहाँ के लोग कितने दूषित पानी का उपभोग कर रहे है और इसका आने वाले भविष्य पर क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा। दूषित पानी के मामले में पंजाब के 22 जिले और राजस्थान के 16 जिले डार्क जोन में है, जहाँ पानी में फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक होने से ये पानी सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक हो जाता है।

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