दिमाग की क्षमताएं बढ़ाने के लिए उसे चुनौती देनी पड़ती है। मानसिक गतिविधियों से मस्तिष्क की सामंजस्य बैठाने की क्षमता बढ़ती है। इससे हियरिंग लॉस और डिप्रेशन से भी बचाव होता है।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कैथरीन पैप के मुताबिक, न्यूरोजेनेसिस प्रक्रिया से मस्तिष्क में नई कोशिका बनती हैं। जब आप अपनी मानसिक क्षमताओं को चैलेंज करते हैं तो मस्तिष्क कोशिकाओं के बीच नया कनेक्शन बनाता है। ऐसा होने पर दिमाग अधिक एक्टिव रहता है और तेज काम करता है।
दोनों हाथों का इस्तेमाल करें
न्यूरोबायोलॉजिस्ट लॉरेंस कैट्ज के मुताबिक, दोनों हाथों का बराबर इस्तेमाल करने से क्रिएटिव और लॉजिकल थिंकिंग बेहतर होती है। इसके लिए उल्टे हाथ से ब्रश करना, बालों में कंघी या फिर लिखने में दोनों हाथों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
नई भाषा सीखें, ब्रेन की एक्टिविटी बढ़ती है
किसी भी दूसरी भाषा में पारंगत होने में वर्षों लग जाते हैं। आसान भाषा में सझमें तो मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों को एक्टिवेट किए बिना दूसरी भाषा को सीखना संभव नहीं है। इससे मस्तिष्क अधिक एक्टिव रहता है।
जापानी विधा ‘ऑरिगेमी’ से एक्टिव रहता है ब्रेन
कागज को मोड़कर उससे कलाकृतियां बनाने की सालों पुरानी जापानी पद्धति ऑरिगेमी भी दिमाग पर पॉजिटिव असर डालती है। ऑरिगेमी में गणित, विज्ञान जैसे विषयों का समावेश होने के कारण यह ब्रेन को एक्टिव रखती है।
फिजिकल एक्टिविटी भी रखती है दिमाग को एक्टिव
कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि रोजाना की फिजिकल एक्टिविटी भी दिमाग को तेज और संक्रिय रखती है। शोधकर्ता कहते हैं, फिजिकल एक्टिविटी के कारण दिमाग में ऑक्सीजन का सर्कुलेशन तेज होता है। यह दिमाग पर सकारात्मक असर छोड़ता है।