जयपुर
बसपा और निर्दलीय विधायकों को सरकार में महत्व मिलने के मुद्दे पर कांग्रेस में चल रही खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही। अलवर से पूर्व सांसद और किशनगढ़बास से विधानसभा चुनाव हार चुके कांग्रेस नेता डॉ. करण सिंह यादव ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने निर्दलियों और बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों को सरकार में महत्व दिए जाने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अशोक गहलोत सरकार की मजबूरी है। यादव ने कहा- निर्दलीय और बसपा से आने वाले विधायक अपने क्षेत्रों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित कर रहे हैं। निर्दलियों और बसपा से आने वाले विधायकों को एकतरफा महत्व मिल रहा है। इसकी वजह से पार्टी को नुकसान हो रहा है। जिस क्षेत्र में 13 निर्दलीय और 6 बसपा के प्रत्याशी जीत कर आए हैं, वहां के पार्टी कार्यकर्ता पूरी तरह उपेक्षित हैं। विधायकों ने इन क्षेत्रों में सबकुछ अपने हाथों में ले लिया है। जहां पर कांग्रेस उम्मीदवार बीजेपी से हारा है, वहां पर वह विधायक की तरह ही है। करण सिंह यादव प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय (पीसीसी) में सोमवार को मीडिया से बात कर रहे थे।
साइडलाइन करने का आरोप
यादव ने कहा- वर्तमान स्थिति में हमलोग साइडलाइन कर दिए गए हैं। कांग्रेस में जो काम करने वाले लोग थे, वह अपने आप को बाहर मान रहे हैं। नगर पालिका और इन क्षेत्रों में मनोनयन संबंधी निर्णय में भी दूसरी पार्टी से आए विधायकों व निर्दलियों की चल रही है। अशोक गहलोत की मजबूरी है कि उन लोगों को खुश रख कर सरकार चला रहे हैं। इससे कांग्रेस का जो नुकसान हो रहा है, उसकी भरपाई नहीं होगी। आगे चुनाव आएंगे। उसमें इसका असर देखने को मिलेगा।
अजय माकन से मिले थे नेता
कांग्रेस प्रभारी अजय माकन के 28-29 जुलाई को जयपुर में कांग्रेस विधायकों से लिए गए फीडबैक के दौरान ही कई हारे हुए उम्मीदवारों ने मांग उठाई थी कि उनसे भी बात हो। उस वक्त पूर्व मंत्री और तिजारा से चुनाव हार चुके एए खान उर्फ दुर्रु मियां अजय माकन से समय लेने गए थे। बाद में उन्हें दिल्ली बुलाया। अलवर जिले में कांग्रेस टिकट पर 2018 का विधानसभा चुनाव हार चुके करण सिंह यादव, दुर्रू मियां और डॉ आरसी यादव ने दिल्ली में अजय माकन से मुलाकात करके अपनी उपेक्षा का मुद्दा उठाया था।