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घर-घर और मंदिरों में व्रत-पूजन, ठाकुरजी के झूले का श्रृंगार

बीकानेर. सावन के शुक्ल पक्ष की एकादशी बुधवार को पवित्रा एकादशी के रूप में मनाई गई। घर-घर और मंदिरों में देव प्रतिमाओं का अभिषेक, पूजन और श्रृंगार कर महाआरती की गई। विशेष प्रकार के तंतु से तैयार रंग बिरंगी पवित्रा ठाकुरजी के अर्पित की गई। कई श्रद्धालुओं ने एकादशी पर भगवान विष्णु का विशेष रूप से पूजन कर पवित्रा अर्पित की। श्रद्धालुओं ने एकादशी का व्रत रखा। भजन, कीर्तन और स्तुती गान किया।


ज्योतिषाचार्य पंडित राजेन्द्र किराडू के अनुसार धर्मग्रंथों में पवित्रा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन विशेष रूप से किया जाता है। देवताओं का पूजन कर पवित्रा अर्पित की जाती है। अगले दिन श्रद्धालु इस पवित्रा को धारण करते है। इसे पवित्रा एकादशी, पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है।

झूलों का विशेष श्रृंगार

पवित्रा एकादशी पर शहर में स्थित वैष्णव मंदिरों में ठाकुरजी के झूलों का विशेष श्रृंगार पवित्रा से किया गया। मंदिरों में ठाकुरजी का विशेष पूजन, श्रृंगार कर पवित्रा अर्पित की गई। रघुनाथसर कुआ क्षेत्र स्थित गिरिराज मंदिर में गिरिराज जी का विशेष पवित्रा से श्रृंगार किया गया। पंडित लालचंद व मनोज कुमार त्रिवेदी ने पूजन व श्रृंगार किया। घर-घर में स्थापित देव प्रतिमाओं के पवित्रा अर्पित की गई।

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