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21 माह बाद भी सदन में शहर की समस्याओं पर चर्चा नहीं

बीकानेर. शहरवासी जन समस्याओं से परेशान है। आए दिन पार्षदों सहित आमजन निगम कार्यालय पहुंचकर समस्याएं रख रहे है। निगम बोर्ड की बैठक नहीं होने से जनसमस्याओं पर सदन में चर्चा नहीं हो रही है। लोगों को जो राहत निगम कमेटियों के माध्यम से मिलती है, लेकिन कमेटियों के गठन का मामला अधर में लटका होने से इनका लाभ भी लोगों को नहीं मिल रहा है।

निगम के पार्षदों की ओर से 21 महीनों में एक बार भी शहर की जनसमस्याओं पर सदन में चर्चा नहीं की गई है। जबकि इस दौरान निगम की तीन बैठकें हो चुकी है, जिनमें दो बैठकें केवल बजट से संबंधित रही। एक बैठक हंगामे के कारण महज कुछ मिनट बाद ही समाप्त हो गई थी। सदन में शहर की जन समस्याओं पर चर्चा नहीं होने से न समस्याओं का निस्तारण हो पा रहा है और न ही नीतिगत निर्णय हो पा रहे है। जो निर्णय जनप्रतिनिधियों को लेने होते है, वे निर्णय अधिकारी ले रहे है।

दो बैठकें बजट पर, एक हंगामें की भेंट चढ़ी
नगर निगम के वर्तमान निर्वाचित बोर्ड की तीन बैठके हुए है। पहली बैठक ४ फरवरी २०२० को हुई। इसमें केवल बजट रखा गया। दूसरी बैठक ७ फरवरी 2020 को हुई। इसमें पांच प्रस्तावित बिन्दु रखे गए थे। जिसमें जन समस्याओं का प्रस्ताव भी शामिल था। कमेटियों के गठन का बिन्दु इस बैठक में शामिल होने से बैठक शुरू होते ही महज कुछ मिनट बाद ही हंगामें की भेंट चढ़ गई। जनसमस्याओं पर चर्चा ही नहीं हुई। तीसरी बैठक इस साल ८ फरवरी को हुई। इसमें बजट रखा गया।

छह माह बाद भी बैठक नहीं

नगर पालिका अधिनियम के तहत स्थानीय निकायों में प्रत्येक दो माह के बाद साधारण सभा के आयोजन का नियम है। नगर निगम की पिछली बैठक ८ फरवरी को हुई थी। इस बैठक को हुए छह माह का समय हो गया है, लेकिन अब तक साधारण सभा की बैठक आहूत नहीं की गई है। जबकि कई बार पार्षद आयुक्त से साधारणसभा की बैठक बुलाने की मांग कर चुके है।

अभियान का लाभ मिलने पर संशय
गांधी जयंती से शहर में प्रशासन शहरों के संग अभियान का आयोजन होना है। इसके लिए 15 सितम्बर से तैयारी शिविर आयोजित करने प्रस्तावित है। निगम की साधारण सभा नहीं होने से पार्षदों को भी अब तक पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है कि अभियान के दौरान आमजन को किस प्रकार लाभान्वित करवाना है।

अधिकारी ले रहे निर्णय

निगम की साधारण सभा की बैठक नहीं होने से कई नीतिगत निर्णय प्रशासनिक अधिकारी ले रहे है। इससे आमजन को जो पूरा लाभ निगम की योजनाओं से मिलना चाहिए, नहीं मिल पा रहा है। निगम में कमेटियांे का मामला लटका हुआ है। कमेटियों के माध्यम से जो कार्य आमजन हित में होने चाहिए, नहीं हो पा रहे है। घर-घर कचरा संग्रहण कार्य में यूजर चार्ज का निर्णय सदन में होना है। बैठक नहीं होने से इस पर निर्णय नहीं हो पा रहा है।

निगम में है 92 पार्षद
नगर निगम में 80 वार्डो से 80 निर्वाचित पार्षद है। जबकि राज्य सरकार की ओर से हाल ही में 12 पार्षदों को मनोनीत किया है। निगम में वर्तमान में निर्वाचित और मनोनीत सहित कुल पार्षदों की संख्या 92 है। इन पार्षदों की ओर से अब तक एक बार भी सदन में बैठक शहर की जनसमस्याओं पर चर्चा नहीं की गई है।

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