नई दिल्ली
केंद्र सरकार भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) के निजीकरण पर नए सिरे से विचार करने की तैयारी में है। इसके साथ ही बीपीसीएल की बिक्री की शर्तों में भी बदलाव संभव है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
पीटीआई से अधिकारी ने कहा, भू-राजनीतिक स्थिति और ऊर्जा बदलाव जैसे पहलू हैं, जिनपर गौर करने की जरूरत है। ग्रीन और रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बदलाव की वजह से मौजूदा शर्तों के साथ निजीकरण मुश्किल है। संभावित खरीदारों को कितनी हिस्सेदारी की बिक्री की जाएगी, इसपर भी नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। साथ ही शर्तों को सुगम करना होगा, ताकि निवेशक गठजोड़ (कंसोर्टियम) बना सकें। हालांकि, अभी कंपनी के लिए वित्तीय बोलियां नहीं मांगी गई हैं।
सरकार बेच रही समूची हिस्सेदारी: आपको बता दें कि सरकार बीपीसीएल में अपनी समूची 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। बीपीसीएल के लिए तीन रुचि पत्र (ईओआई) मिले हैं। इनमें से एक पेशकश उद्योगपति अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाले वेदांता समूह की ओर से आई है। वेदांता के अलावा निजी इक्विटी कंपनियां अपोलो ग्लोबल और आई स्कावयर्ड की पूंजीगत इकाई थिंक गैस शामिल हैं।