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कोलेस्ट्रॉल की दवा का नया विकल्प:अब साल में दो बार इंजेक्शन लगवाकर 50% तक घटा सकेंगे कोलेस्ट्रॉल, यूके में मरीजों को मिला नया विकल्प; घटेंगे हृदय रोगों के मामले

कोलेस्ट्रॉल की दवा का नया विकल्प:अब साल में दो बार इंजेक्शन लगवाकर 50% तक घटा सकेंगे कोलेस्ट्रॉल, यूके में मरीजों को मिला नया विकल्प; घटेंगे हृदय रोगों के मामले

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अब बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने के लिए बार-बार स्टेटिंस दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसे कंट्रोल करने के लिए इंजेक्शन के रूप में दवा उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसे इक्लिसिरेन नाम दिया गया है। इस इंजेक्शन को साल में दो बार लगवाना होगा। इसकी शुरुआत बुधवार को यूके की हेल्थ एजेंसी NHS ने कर दी है। एक्सपर्ट्स इसे 'गेम चेंजिंग' ट्रीटमेंट यानी बड़ा बदलाव लाने वाला इलाज बता रहे हैं। नए इंजेक्शन से कितना फायदा होगा, यह किन मरीजों को मिलेगा, भविष्य में इसका क्या असर पड़ेगा, जानिए इन सवालों के जवाब... 50 फीसदी तक घट जाएगा बैड कोलेस्ट्रॉलआसान भाषा में समझें तो कोलेस्ट्रॉल एक चर्बी वाला चिपचिपा पदार्थ होता है जो रक्त वाहिकाओं में इकट्ठा होता है। धीरे-धीरे यह इकट्ठा होकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और धमनियों के डैमेज होने की वजह बनता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल भी कहते हैं। रिपोर्ट के ...
पॉल्यूशन का उम्र पर असर:वायु प्रदूषण के कारण भारतीयों की उम्र 9 साल तक घट सकती है उम्र, इसका सबसे बुरा असर उत्तर भारत के 48 करोड़ लोगों पर पड़ रहा

पॉल्यूशन का उम्र पर असर:वायु प्रदूषण के कारण भारतीयों की उम्र 9 साल तक घट सकती है उम्र, इसका सबसे बुरा असर उत्तर भारत के 48 करोड़ लोगों पर पड़ रहा

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एयर पॉल्यूशन बीमार करने के साथ इंसान की उम्र भी घटा रहा है। अमेरिकी शोधकर्ताओं की नई रिपोर्ट चौंकाने वाली है। रिपोर्ट कहती है, एयर पॉल्यूशन भारतीयों की उम्र को 9 साल तक कम कर सकता है। दुनियाभर में बढ़ रहे प्रदूषण का असर उत्तर भारत में रहने वाले 48 करोड़ लोगों पर पड़ रहा है। इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो देश के दूसरे हिस्से तक एयर पॉल्यूशन का बुरा असर पड़ सकता है। रिसर्च रिपोर्ट जारी करने वाले शिकागो यूनिवर्सिटी के द एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (EPIC) का कहना है, ऐसे हालातों को कंट्रोल करने के लिए ऐसी पॉलिसी लागू करने की जरूरत है जिससे हवा प्रदूषण से मुक्त हो सके। उत्तर भारत में प्रदूषण सबसे खतरनाकरिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर के प्रदूषित शहरों की रैकिंग में भारतीय शहरों की संख्या बढ़ी है। दुनियाभर में जहरीली हो रही हवा से हर साल लाखों लोगों की मौत हो रही है। दुनिया के दूसरे शहरों के मुका...
अब स्मार्टवाॅच की जरूरत नहीं:स्मार्ट टी-शर्ट से मॉनिटर कर सकेंगे दिल की धड़कन, कार्बन नैनो फायबर्स से बने इसके कपड़े को धो भी सकेंगे; इसकी ईसीजी रिपोर्ट ज्यादा सटीक

अब स्मार्टवाॅच की जरूरत नहीं:स्मार्ट टी-शर्ट से मॉनिटर कर सकेंगे दिल की धड़कन, कार्बन नैनो फायबर्स से बने इसके कपड़े को धो भी सकेंगे; इसकी ईसीजी रिपोर्ट ज्यादा सटीक

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हार्ट को मॉनिटर करने के लिए वैज्ञानिकों ने स्मार्टवॉच का नया विकल्प तैयार किया है। टेक्सास की राइस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसी स्मार्ट टी-शर्ट विकसित की है जो इंसान के हार्ट पर नजर रखती है। वैज्ञानिकों का दावा है, स्मार्ट टी-शर्ट चेस्ट स्ट्रेप से ज्यादा बेहतर काम करती है। यह टी-शर्ट पहनने में कफर्टेबल भी है। क्यों खास है यह स्मार्ट टी-शर्ट स्मार्ट टी-शर्ट दिखने में एक आम कपड़े जैसी लगती है। बेहद पतले कार्बन नैनोट्यूब फायबर से बुनकर इसके कपड़े को तैयार किया गया है।यह नैनोट्यूब फायबर मेटल फायबर की तरह काम करता है और बेहतर कंडक्टिविटी देता है। इस कपड़े को आसानी से धोया भी जा सकता है।यह स्मार्ट टी-शर्ट नैनो-फायबर की मदद से हार्ट रेट के बारे में बताती है, इससे पता चलता है कि हार्ट बीट सही चल रही है या नहीं।शोधकर्ताओं का कहना है, नैनोट्यूब फायबर से बने होने के कारण इस कपड़े मे...
नई HIV वैक्सीन ट्रायल में हुई फेल:जॉनसन एंड जॉनसन की HIV वैक्सीन ट्रायल में संक्रमण रोकने की क्षमता मात्र 25 फीसदी; लेकिन अमेरिका में जारी रहेगा ट्रायल

नई HIV वैक्सीन ट्रायल में हुई फेल:जॉनसन एंड जॉनसन की HIV वैक्सीन ट्रायल में संक्रमण रोकने की क्षमता मात्र 25 फीसदी; लेकिन अमेरिका में जारी रहेगा ट्रायल

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जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने अपनी नई HIV वैक्सीन ट्रायल के नतीजे जारी किए। वैक्सीन ट्रायल में फेल साबित हुई है। ट्रायल के दौरान नई वैक्सीन HIV का संक्रमण रोकने में मात्र 25 फीसदी ही असरदार साबित हुई है। ट्रायल रिपोर्ट में यह वैक्सीन भले ही असरदार साबित न हुई हो, लेकिन इससे किसी तरह के साइड इफेक्ट होने की पुष्टि नहीं हुई है। जॉनसन एंड जॉनसन मंगलवार को बयान जारी करके ट्रायल के नतीजों की जानकारी दी। कम्पनी ने HIV वैक्सीन का ट्रायल अफ्रीका में किया था। ट्रायल का नाम 'इमबोकोडो' रखा गया था। इसमें अफ्रीकी देश की 2600 महिलाओं को भी शामिल किया गया था। उम्मीद की जा रही थी कि ट्रायल के नतीजे सकारात्मक आएंगे और इस खतरनाक बीमारी को खत्म किया जा सकेगा। ट्रायल में ऐसा नहीं हो पाया। जॉनसन एंड जॉनसन के मुख्य वैज्ञानिक पॉल स्टॉफेल्स का कहना है, एचआईवी का वायरस काफी अलग और जटिल है। यह सीधेतौर पर मरीज की इम...
अखरोट का दिल से कनेक्शन:रोजाना आधा कप अखरोट हृदय रोग का खतरा घटाता है और 8.5% तक कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करता है, जानिए यह क्यों है जरूरी

अखरोट का दिल से कनेक्शन:रोजाना आधा कप अखरोट हृदय रोग का खतरा घटाता है और 8.5% तक कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करता है, जानिए यह क्यों है जरूरी

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रोजाना आधा कप अखरोट खाते हैं तो हृदय रोगों का खतरा घटता है और कोलेस्ट्रॉल 8.5 फीसदी तक कम हो जाता है। यह दावा हॉस्पिटल क्लीनिक डे बार्सिलोना के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ता और बार्सिलोना के आहार विशेषज्ञ एमिलियो रोस कहते हैं, पहले हुए कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि अखरोट हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा घटाता है। हमने अपनी नई रिसर्च में बैड कोलेस्ट्रॉल के जरिए यह समझाने की कोशिश की है कि इसका हृदय रोगों में क्या रोल है और कैसे असर डालता है। बैड कोलेस्ट्रॉल कैसे नुकसान पहुंचाता है, रिसर्च कैसे हुई, अखरोट कैसे हृदय रोगों से बचाता है और इसके क्या फायदे हैं, जानिए इन सवालों के जवाब 628 लोगों पर ऐसे हुई रिसर्चशोधकर्ताओं का कहना है, अखरोट के फायदों को समझने के लिए 628 लोगों पर दो साल तक रिसर्च की गई। इनकी उम्र 63 से 79 साल के बीच थी। ये सभी बार्सिलोना और कैलिफोर्निया ...
प्रोस्टेट बढ़ने के इलाज का नया विकल्प:स्प्रिंग जैसी डिवाइस से रुक-रुक कर होने वाली यूरिन का इलाज किया जा सकेगा, दावा; ट्रायल में यह डिवाइस सुरक्षित और असरदार साबित हुई

प्रोस्टेट बढ़ने के इलाज का नया विकल्प:स्प्रिंग जैसी डिवाइस से रुक-रुक कर होने वाली यूरिन का इलाज किया जा सकेगा, दावा; ट्रायल में यह डिवाइस सुरक्षित और असरदार साबित हुई

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दुनियाभर में लाखों पुरुष प्रोस्टेट ग्लैंड के बढ़ने की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसा होने पर पेशाब पूरी तरह से नहीं हो पाती। वैज्ञानिकों ने इसके इलाज के लिए एक स्प्रिंगनुमा डिवाइस तैयार की है। इस इम्प्लांट को प्रभावित हिस्से में लगाकर समस्या को घटा सकते हैं। इस स्प्रिंग इम्प्लांट को विकसित करने वाली अमेरिकी कम्पनी जेनफ्लो के शोधकर्ताओं का दावा है कि शुरुआती ट्रायल में मरीजों में तेज रिकवरी देखी गई है और साइडइफेक्ट भी नहीं सामने आए। क्या होता है प्रोस्टेट का बढ़ना?प्रोस्टेट बढ़ने के मामले 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में सामने आते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर हर तीसरे पुरुष में प्रोस्टेट बढ़ने से जुड़े लक्षण दिखते हैं। प्रोस्टेट का बढ़ना क्या होता है, अब इसे समझिए। मूत्रमार्ग की नली के जरिए पेशाब बाहर निकलता है, लेकिन इस हिस्से में मौजूद प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़ने पर इस नली से पेशाब पू...
अमेरिकी शोधकर्ताओं का दावा:वैक्सीन लेने वाले उन 90 फीसदी लोगों में भी एंटीबॉडीज बनीं जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर, इनकी एंटीबॉडीज स्वस्थ इंसान जितनी स्ट्रॉन्ग

अमेरिकी शोधकर्ताओं का दावा:वैक्सीन लेने वाले उन 90 फीसदी लोगों में भी एंटीबॉडीज बनीं जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर, इनकी एंटीबॉडीज स्वस्थ इंसान जितनी स्ट्रॉन्ग

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कोरोना की वैक्सीन असरदार है, वैज्ञानिकों का इसका एक और प्रमाण दिया है। अमेरिकी शोधकर्ताओं की हालिया रिसर्च कहती है, वैक्सीन के डोज लगने के बाद 90 फीसदी तक उन लोगों में भी एंटीबॉडीज की संख्या बढ़ीं जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है। इनमें मौजूद एंटीबॉडीज उतनी ही स्ट्रॉन्ग थीं जितना एक स्वस्थ इंसान में होती हैं। रिसर्च की 3 बड़ी बातें एंटीबॉडी के रिस्पॉन्स को समझने के लिए अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन ने 133 मरीजों पर रिसर्च की। ये सभी मरीज इंफ्लेमेट्री बॉवेल डिसीज, रूमेटॉयड आर्थराइटिस, ल्यूपस व स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस से जूझ रहे हैं और इम्यूनिटी को दबाने वाली इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं ले रहे थे।इनकी तुलना 33 स्वस्थ लोगों से की गई। इनका ब्लड सैम्पल लिया गया। ये ऐसे लोग थे जिन्हें फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन की पहली डोज लेने के 3 हफ्ते बाद दूसरी डोज लगी थी।जांच रिपोर्ट में सामने आय...
कॉफी से दिल का कनेक्शन:रोजाना 3 कप कॉफी हृदय रोगों का खतरा 17% और स्ट्रोक का रिस्क 21% तक कम करती है, नई रिसर्च में वैज्ञानिकों का दावा; जानिए इसे कितना पीएं

कॉफी से दिल का कनेक्शन:रोजाना 3 कप कॉफी हृदय रोगों का खतरा 17% और स्ट्रोक का रिस्क 21% तक कम करती है, नई रिसर्च में वैज्ञानिकों का दावा; जानिए इसे कितना पीएं

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रोजाना 3 कप कॉफी दिल को दुरुस्त रखती है। यह 21 फीसदी तक स्ट्रोक और 17 फीसदी तक खतरनाक हृदय रोगों का खतरा घटाती है। यह दावा बुडापेस्ट की सेमेल्विस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। कॉफी का सेहत पर क्या असर पड़ता है, इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं ने बड़े स्तर पर रिसर्च की है। कॉफी कैसे दिल को स्वस्थ रखती है, यह कैसे पता चला और क्या 3 कप से ज्यादा कॉफी पीने पर शरीर को नुकसान पहुंच सकता है, जानिए इन सवालों के जवाब... रिसर्च की 2 बड़ी बातेंरिसर्च प्रोसेस: शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक में रजिस्टर्ड 4,60,000 लोगों पर रिसर्च की। रिसर्च के दौरान इनकी सेहत और काफी पीने की आदतों का विश्लेषण किया गया। रिसर्च को समझने के लिए इन लोगों को तीन भागों में बांटा गया। पहला ग्रुप: 22 फीसदी लोगों ने कॉफी बिल्कुल भी नहीं पी।दूसरा ग्रुप: 58 फीसदी लोगों ने आधा से 3 क...
रक्त के थक्के पता लगाने का नया तरीका:वैज्ञानिकों ने डाई का इंजेक्शन लगाकर ब्लॉकेज पता लगाने का नया तरीका खोजा, दावा; यह जांच एंजियोग्राम से भी बेहतर और सुरक्षित

रक्त के थक्के पता लगाने का नया तरीका:वैज्ञानिकों ने डाई का इंजेक्शन लगाकर ब्लॉकेज पता लगाने का नया तरीका खोजा, दावा; यह जांच एंजियोग्राम से भी बेहतर और सुरक्षित

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वैज्ञानिकों ने शरीर में रक्त के थक्के पता लगाने के लिए नई जांच विकसित की है। डाई की मदद से देखा जा सकता है कि शरीर के किस हिस्से में रक्त के थक्के जमे हैं। शरीर में रक्त के थक्कों का पता लगना जरूरी है क्योंकि ये हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाते हैं। यह रिसर्च करने वाली एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, नई जांच की मदद से हृदय के बाहर मौजूद ब्लड में ब्लड क्लॉट्स देखे जा सके हैं। ऐसे पता लगाते हैं रक्त के थक्केशोधकर्ताओं का कहना है, शरीर में जहां-जहां ब्लड क्लॉटिंग हुई है उस हिस्से की धमनियों में ब्लॉकेज हो जाता है। ब्लॉकेज होने पर धमनियां डैमेज हो जाती हैं। शोधकर्ताओं ने नई जांच के ट्रायल के लिए 94 मरीजों को चुना। इन मरीजों के हाथ में डाई को इंजेक्ट किया। यह डाई ब्लड में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाती है। जहां-जहां धमनियों में डैमेज होता है वहां पर डाई के पहुंचने पर एक तरह का प्रका...
लैंसेट जर्नल की रिसर्च:कोविड के कारण हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले 50% मरीजों में सालभर बाद भी एक लक्षण जरूर दिख रहा, चीनी शोधकर्ताओं का दावा

लैंसेट जर्नल की रिसर्च:कोविड के कारण हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले 50% मरीजों में सालभर बाद भी एक लक्षण जरूर दिख रहा, चीनी शोधकर्ताओं का दावा

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कोरोना को मात देने के 1 साल बाद भी 50 फीसदी मरीजों में एक न एक लक्षण जरूर दिख रहे हैं। इनमें सांस लेने में दिक्कत और थकान जैसे लक्षण शामिल हैं। ये लक्षण खासतौर पर हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद रिकवर होने वाले मरीजों में दिख रहे हैं। लैंसेट जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले कोरोना के मरीज सालभर के बाद कैसा महसूस कर रहे हैं, उनमें कौन से लक्षण दिख रहे हैं। इस पर चीन के नेशनल सेंटर फॉर रेस्पिरेट्री मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने स्टडी की है। 1733 मरीजों पर हुई रिसर्च शोधकर्ताओं ने चीन के वुहान में कोरोना के 1,733 मरीजों पर स्टडी की। ये ऐसे मरीज थे जो संक्रमण के बाद रिकवरी के लिए 6 माह तक हॉस्पिटल में भर्ती रहे थे। इनमें से 1,276 मरीजों का अगले एक साल तक हेल्थ चेकअप किया गया। संक्रमण से लेकर हर छोटी-छोटी बात तक को अगले एक साल तक रिकॉर्ड किया गया। इनमें से एक ...