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सूंघने की घटती क्षमता का कनेक्शन सिर्फ कोरोना से नहीं:अल्जाइमर्स और ऑटो इम्यून डिजीज में भी घट जाती है सूंघने की क्षमता, लम्बे समय तक ऐसा रहना ठीक नहीं

सूंघने की घटती क्षमता का कनेक्शन सिर्फ कोरोना से नहीं:अल्जाइमर्स और ऑटो इम्यून डिजीज में भी घट जाती है सूंघने की क्षमता, लम्बे समय तक ऐसा रहना ठीक नहीं

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खुशबू को न महसूस कर पाना यानी सूंघने की क्षमता का घटना कोविड का एक बड़ा लक्षण है। ज्यादातर लोगों को लगता है ऐसा सिर्फ कोविड होने पर होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। कई ऐसी बीमारियां हैं, जिसमें सूंघने की क्षमता घट जाती है। सूंघने की घटती क्षमता अल्जाइमर्स, सिजोफ्रेनिया या दूसरी ऑटो इम्यून बीमारी का संकेत हो सकता है। इन बीमारियों में ब्रेन के वो हिस्से सिकुड़ जाता है या प्रभावित हो जाता है जो जो सूंघने के लिए काम करता है। पार्किंन्सन फाउंडेशन के अनुसार, पार्किंन्सन बीमारी से पीड़ित अधिकांश लोगों में सूंघने की कुछ क्षमता घट जाती है। इसे हाइपोस्मिया कहा जाता है। ऐसे में यह गंभीर खतरा हो सकता है। मौत का खतरा 50 फीसदी तक बढ़ जाता है अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियंस के अनुसार, जिन बुजुर्गों में सूंघने की क्षमता कम पाई गई उनमें अगले 10 साल में मृत्यु का खतरा 50% तक अधिक रहा। हालांकि कई बार सामान्य ...
मांओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:प्रेग्नेंसी के 10वे हफ्ते में ही बताया जा सकेगा बच्चे का जन्म समय से पहले होगा या नहीं, एक बैक्टीरियल टेस्ट से मिलेगी जानकारी

मांओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:प्रेग्नेंसी के 10वे हफ्ते में ही बताया जा सकेगा बच्चे का जन्म समय से पहले होगा या नहीं, एक बैक्टीरियल टेस्ट से मिलेगी जानकारी

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प्री-मैच्योर बर्थ से नवजात में मौत का खतरा 50 फीसदी तक बना रहता है। प्री-मैच्योर बर्थ का मतलब है प्रेग्नेंसी के 37वें हफ्ते से पहले बच्चे का जन्म होना। समय से पहले जन्म होने पर बच्चे में कई तरह के खतरे बढ़ते हैं। इसलिए ऐसी डिलीवरी को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने एक टेस्ट की सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है, प्रेग्नेंसी के 10वें हफ्ते में ही खास तरह के बैक्टीरिया और केमिकल की जांच करके यह भविष्यवाणी की जा सकेगी कि नवजात की प्री-मैच्योर बर्थ होगी या नहीं। रिसर्च करने वाले किंग्स कॉलेज लंदन के महिला रोग विशेषज्ञ प्रो. एंड्रयु शेनन का कहना है, प्री-मैच्योर बर्थ की भविष्यवाणी करना बेहद मुश्किल है। मेरी टीम ने मिलकर इसकी भविष्वाणी करने का एक तरीका खोजा है। जो समय रहते महिला को अलर्ट कर सकेगा और खतरा घटा सकेगा। कैसे प्री-मैच्योर बर्थ की भविष्यवाणी की जा सकती है, नवजात की प्री-मैच्योर बर...
कोरोना का एक असर यह भी:66% भारतीयों को ऑनलाइन रहने की पड़ी लत, रोजाना स्क्रीन पर 4 घंटे से अधिक समय बिता रहे; जानिए यह आदत शरीर के लिए कितना है खतरनाक

कोरोना का एक असर यह भी:66% भारतीयों को ऑनलाइन रहने की पड़ी लत, रोजाना स्क्रीन पर 4 घंटे से अधिक समय बिता रहे; जानिए यह आदत शरीर के लिए कितना है खतरनाक

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कोरोनाकाल में 66 फीसदी भारतीयों को ऑनलाइन रहने की लत लग गई है। ये औसतन रोजाना 4.4 घंटे स्क्रीन के सामने बिता रहे हैं। यह दावा सायबर सिक्योरिटी फर्म नॉर्टन के हालिया सर्वे में किया गया है। सर्वे कहता है, ऑनलाइन क्लासेस और घर पर ऑफिस वर्क करने के अलावा 82 फीसदी लोग ऐसे हैं जो मोबाइल स्क्रीन के सामने समय बिता रहे हैं। कोरोना काल में ऐसे मामले बढ़े हैं। वयस्कों के लिए स्मार्टफोन सबसे कॉमन डिवाइस बन गया है, 84 फीसदी वयस्क इसके साथ काफी समय बिता रहे हैं। ऑनलाइन रहने की आदत कितनी खराब है, यह शरीर पर क्या असर डालती है और इसे कैसे दूर करें, इन सवालों का जवाब जानने से पहले इस सर्वे को समझें... पहले सर्वे की 4 बड़ी बातें जानिए कोरोनाकाल में देश के लोग स्मार्टफोंस के साथ कितना समय बिता रहे हैं, इसे समझने के लिए सायबर सिक्योरिटी फर्म नॉर्टन ने सर्वे किया। इसमें 1 हजार लोग शामिल और सर्वे ऑनलाइन...
प्रेग्नेंसी में धूप भी जरूरी:बच्चे की प्री-मैच्योर डिलीवरी रोकने के लिए प्रेग्नेंसी की शुरुआत से रोजाना कुछ मिनट धूप में बैठें, यह बीपी कंट्रोल करने के साथ ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है

प्रेग्नेंसी में धूप भी जरूरी:बच्चे की प्री-मैच्योर डिलीवरी रोकने के लिए प्रेग्नेंसी की शुरुआत से रोजाना कुछ मिनट धूप में बैठें, यह बीपी कंट्रोल करने के साथ ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है

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प्री-मैच्योर डिलीवरी यानी बच्चे का समय से पहले पैदा होना। ऐसे बच्चों में कमजोरी के अलावा कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। प्री-मैच्योर डिलीवरी के मामलों को घटाने के लिए वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है। रिसर्च कहती है, ऐसी प्री-मैच्योर डिलीवरी का खतरा घटाना है तो गर्भवती माएं शुरुआत से ही कुछ देर धूप में बिताएं। ऐसा करने से 10 फीसदी तक इस तरह की डिलीवरी रोकी जा सकती हैं। रिसर्च करने वाली एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है, स्कॉटलैंड में गर्भवती महिलाएं धूप में बहुत कम ही निकलती हैं। ऐसी महिलाओं में 10 फीसदी प्री-मैच्योर डिलीवरी का खतरा बना रहता है। इससे बच्चे की मौत का खतरा बढ़ता है। गर्भवती महिलाओं के लिए धूप क्यों जरूरी है, यह कैसे काम करती है, धूप में कब बैठें और इसके क्या फायदे हैं, जानिए इन सवालों के जवाब प्रेग्नेंसी में धूप क्यों है जरूरी, पहले इसे समझें पहली वजह:&n...
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC की स्टडी:वैक्सीन न लगवाने वाले लोगों में कोविड होने का खतरा 29 फीसदी तक ज्यादा, हॉस्पिटल में भर्ती होने का रिस्क भी 29.2 गुना अधिक

अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC की स्टडी:वैक्सीन न लगवाने वाले लोगों में कोविड होने का खतरा 29 फीसदी तक ज्यादा, हॉस्पिटल में भर्ती होने का रिस्क भी 29.2 गुना अधिक

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अगर आपने अब तक वैक्सीन नहीं लगवाई है तो अलर्ट होने की जरूरत है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी की हालिया स्टडी कहती है, वैक्सीन न लगवाने वाले लोगों में कोरोना होने का खतरा 29 फीसदी तक ज्यादा है। संक्रमण होने पर इनके हॉस्पिटल में भर्ती होने का रिस्क 29.2 गुना अधिक है। रिसर्च के मुताबिक, संक्रमण और हॉस्पिटल में भर्ती होने के आंकड़े बताते हैं कि कोविड से बचने के लिए वैक्सीन की सुरक्षा कितनी ज्यादा जरूरी है। वर्तमान में फैल रहे डेल्टा वैरिएंट के दौर में वैक्सीन और भी ज्यादा जरूरी है। सीडीसी ने लॉस एंजलिस और कैलिफोर्निया के 43,127 संक्रमित मरीजों पर स्टडी की। यह मरीज 1 मई से 25 जुलाई के बीच हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। रिसर्च कहती है, आमतौर पर कोरोना का संक्रमण होने के 14 दिन के अंदर मरीज हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं। जून में हॉस्पिटल में भर्ती होने वालों के मामले बढ़ेलॉस एंजलिस और कैलिफ...
इंसानों की तरह बंदर भी तनाव से जूझते हैं, जब बड़ा इनाम जीतने की बारी आती है तो ये भी नर्वस हो जाते हैं; अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा

इंसानों की तरह बंदर भी तनाव से जूझते हैं, जब बड़ा इनाम जीतने की बारी आती है तो ये भी नर्वस हो जाते हैं; अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा

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बंदर भी इंसानों की तरह दबाव में आ जाते हैं। जब मामला पुरस्कार जीतने का हो तो बंदर इंसानों की तरह अपनी परफार्मेंस में जी-जान लगा देते हैं। अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बंदरों पर एक रिसर्च की। रिसर्च में सामने आया कि बंदरों में परफॉर्मेँस का दबाव बढ़ने पर ये घुटन महसूस करते हैं। जब बात पुरस्कार जीतने की आती है तो यह दबाव और बढ़ जाता है। 3 बंदरों को ट्रेनिंग देकर स्टडी की बंदर कितना तनाव से जूझते हैं, इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने रिसर्च की। वैज्ञानिकों ने 3 रीसस बंदरों को चुनौतियों से निपटने के लिए ट्रेनिंग दी। परिणाम के तौर पर सामने आया जब इनाम यानी रिवॉर्ड को जैसे-जैसे बढ़ाया जाता है बंदरों की परफार्मेंस में भी इजाफा होता है। वैज्ञानिकों का कहना है, जब बंदरों के सामने जैकपॉट यानी सबसे बड़ा इनाम रखा गया तो 25 फीसदी बंदर फेल हो गए। इसकी वजह है जैकपॉट को जीतने...
दुनियाभर में ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह गरीबी और मोटापा, गरीब देशों में इसके मामले बढ़ रहे; जानिए इसे कंट्रोल करना क्यों है जरूरी

दुनियाभर में ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह गरीबी और मोटापा, गरीब देशों में इसके मामले बढ़ रहे; जानिए इसे कंट्रोल करना क्यों है जरूरी

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दुनियाभर के लोगों में ब्लड प्रेशर यानी हायपरटेंशन बढ़ने की वजह गरीबी और मोटापा भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बुधवार को कहा, मोटापा हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। ज्यादातर लोगों इसके बारे में जानकारी न होने पर समय पर इलाज नहीं हो पाता। हाई ब्लड प्रेशर पर WHO और इम्पीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने मिलकर रिसर्च की। लैंसेट जर्नल में पब्लिश रिसर्च कहती है, पिछले 30 सालों में हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में थोड़ा बदलाव आया है। इसके मामले अधिक आय वाले देशों में घट रहे हैं और निम्न आय वाले देशों में बढ़ रहे हैं। अमीर देशों ने समय के साथ हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का तरीका सीख लिया है। दुनियाभर में कितने लोग इससे परेशान हैं, गरीब देशों को क्या बदलाव लाने की जरूरत है और मोटापे के इलावा कौन से फैक्टर इसका खतरा बढ़ाते हैं, जानिए इन सवालों के जवाब दुनिय...
पानी पीने का एक फायदा यह भी:हार्ट फेल होने का खतरा घटाना है तो रोजाना 8 गिलास पानी पिएं, पानी से सीरम सोडियम को कंट्रोल कर सकते हैं यही खतरा बढ़ाता है

पानी पीने का एक फायदा यह भी:हार्ट फेल होने का खतरा घटाना है तो रोजाना 8 गिलास पानी पिएं, पानी से सीरम सोडियम को कंट्रोल कर सकते हैं यही खतरा बढ़ाता है

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रोजाना आप 8 गिलास पानी पीते हैं तो हार्ट फेल होने का खतरा घट जाता है। शरीर में पानी की कमी पूरी करके ऐसा होने से रोका जा सकता है। 25 साल तक 15,792 लोगों पर हुई स्टडी कहती है, शरीर में पानी की कमी होने पर हार्ट फेल होने का रिस्क बढ़ता है। रिसर्च करने वाले अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के वैज्ञानिकों ने 15,792 लोगों के सीरम सोडियम का लेवल जांचा। ब्लड में सोडियम की मात्रा से पता चलता है कि शरीर में पानी कमी है या नहीं। आमतौर पर एक्सपर्ट एक इंसान को रोजाना 2 लीटर पानी पीने की सलाह देते हैं लेकिन पिछले कई अध्ययनों में यह साबित हुआ है कि लोग इतना पानी नहीं पीते हैं। दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौतें हृदय रोगों से होती हैं। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक, दुनियाभर में हर 3 में से 1 मौत हृदय रोग से हो रही है। इसके 80 फीसदी मामले मध्य आय वर्ग वाले देशों में सामने आते हैं। पानी पीने स...
मेडिटेशन पर वैज्ञानिकों की मुहर:दिन में रोजाना 10 मिनट का मेडिटेशन इंसान की एकाग्रता को बढ़ाता है, ब्रेन स्कैनिंग से हुई पुष्टि; न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं का दावा

मेडिटेशन पर वैज्ञानिकों की मुहर:दिन में रोजाना 10 मिनट का मेडिटेशन इंसान की एकाग्रता को बढ़ाता है, ब्रेन स्कैनिंग से हुई पुष्टि; न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं का दावा

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मेडिटेशन एकाग्रता बढ़ाने का काम करता है। हालिया रिसर्च में यह बात साबित भी हुई है। 8 हफ्तों तक रोजाना मेडिटेशन करने वाले 10 स्टूडेंट्स पर वैज्ञानिकों ने रिसर्च की। ये स्टूडेंट्स हफ्ते में 5 दिन रोजाना 10 मिनट तक मेडिटेशन करते थे। रिसर्च के बाद इन स्टूडेंट्स के ब्रेन की स्कैनिंग की गई। स्कैनिंग रिपोर्ट में सामने आया कि इससे ब्रेन में ऐसे बदलाव होते हैं जो एकाग्रता को बढ़ाते हैं। मेडिटेशन दिमाग के नेटवर्क को जोड़ता हैरिसर्च करने वाली न्यूयॉर्क की बिंगहैम्प्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, मेडिटेशन ब्रेन के उन दो कनेक्शन को जोड़ता है जो एकाग्रता के साथ सोचने और ध्यान लगाने के लिए प्रेरित करता है। जब भी इंसान किसी काम को मन लगाकर करता है तो यही दोनों कनेक्शन काम करते हैं। अल्जाइमर और ऑटिज्म का कनेक्शन भी इसी नेटवर्क होता है।इस रिसर्च के नतीजे कम्प्यूटर नीति विशेषज्ञ जॉर्ज वेंसचेंक औ...
दवा से कम नहीं, मां का दूध:ब्रेस्ट मिल्क से सुपरबग को दे सकते हैं मात, जो बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स से नहीं खत्म होते उसे मां के दूध से खत्म किया जा सकता है

दवा से कम नहीं, मां का दूध:ब्रेस्ट मिल्क से सुपरबग को दे सकते हैं मात, जो बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स से नहीं खत्म होते उसे मां के दूध से खत्म किया जा सकता है

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मां के दूध से सुपरबग को भी मात दी जा सकती है। सुपरबग ऐसे बैक्टीरिया को कहते हैं, जिस पर एंटीबायोटिक्स दवाएं बेअसर साबित हो जाती हैं। ऐसे ड्रग रेसिस्टेंट सुपरबग पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है, ब्रेस्ट मिल्क में मौजूद शुगर से इन्हें खत्म किया जा सकता है। लैब में इसका ट्रायल भी किया गया है जो सफल रहा है। मां के दूध से कैसे सुपरबग को मात दी जा सकती है, यह प्रयोग कितना असरदार है और कैसे मरीजों के काम आएगा, जानिए इन सवालों के जवाब... बिना एंटीबायोटिक्स के कैसे खत्म करेंगे बैक्टीरियावैज्ञानिकों का कहना है, ब्रेस्ट मिल्क में मौजूद शुगर उन बैक्टीरिया को खत्म कर सकता है, जो एंटीबायोटिक्स से भी नहीं खत्म किए जा सकते। मरीज में इस शुगर का इस्तेमाल तब किया जा सकेगा, जब उसमें बैक्टीरिया के संक्रमण को खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक्स भी काम करना बंद कर दें। किस बैक्टीरिया पर प्रयोग किया...