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वजन घटाएगा ‘लव हार्मोन’:वजन घटाएगा नोज स्प्रे, इसमें मौजूद ऑक्सीटोसिन हार्मोन खाने की इच्छा पर कंट्रोल करेगा और मोटापा घटेगा; लंदन के शोधकर्ताओं का दावा

वजन घटाएगा ‘लव हार्मोन’:वजन घटाएगा नोज स्प्रे, इसमें मौजूद ऑक्सीटोसिन हार्मोन खाने की इच्छा पर कंट्रोल करेगा और मोटापा घटेगा; लंदन के शोधकर्ताओं का दावा

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नाक में डालने वाले स्प्रे से मोटापा घटाया जा सकता है। यह दावा लंदन के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, स्प्रे में मौजूद ऑक्सीटोसिन हार्मोन इंसान को अधिक खाने के बारे में सोचने से रोकता है। पिछले कुछ सालों में हुई रिसर्च में सामने आया है कि इंसानों द्वारा तैयार किया गया ऑक्सीटोसिन नाक में स्प्रे करने से कई समस्याओं में राहत मिलती है। जैसे- ऑटिज्म से जूझने वाले बच्चों के कान में कई तरह की आवाजें सुनाई देती हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे टिनिटस कहते हैं। इस स्प्रे की मदद से इसमें राहत मिलती है। इसके अलावा सेक्स की इच्छा घटने पर यह हार्मोन स्प्रे के रूप में दिया जाता है। जो असरदार साबित हुआ है। इम्पीरियल कॉलेज लंदन और किंग्सटन यूनिवर्सिटी की हालिया रिसर्च में सामने आया है कि यह भूख को भी कंट्रोल करता है। रिसर्च के दौरान खाने से जुड़ी तस्वीर दिखाने से पहले 40 महि...
गर्भवती महिलाओं को अलर्ट करने वाली खबर:महिलाओं में महामारी का तनाव भी प्रेग्नेंसी में समस्याएं पैदा कर रहा, गर्भनाल की जांच में हुई पुष्टि; इंग्लैंड के शोधकर्ताओं का दावा

गर्भवती महिलाओं को अलर्ट करने वाली खबर:महिलाओं में महामारी का तनाव भी प्रेग्नेंसी में समस्याएं पैदा कर रहा, गर्भनाल की जांच में हुई पुष्टि; इंग्लैंड के शोधकर्ताओं का दावा

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गर्भवती महिलाओं पर इंग्लैंड में हुई रिसर्च अलर्ट करने वाली है। रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है, गर्भवती महिलाओं को कोविड न होने के बावजूद भी उनकी हालत बिगड़ने का खतरा है। महामारी का तनाव उनकी प्रेग्नेंसी में समस्याएं पैदा कर सकता है। यह बात महामारी में 115 गर्भवती महिलाओं पर हुई रिसर्च में सामने आई है। 2020 में हुई गर्भनाल की जांच हुईरिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने 2020 में गर्भवती महिलाओं की गर्भनाल जांची। रिपोर्ट में सामने आया कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान कोविड हुआ था उनकी गर्भनाल में तीन गुना समस्याएं दिखीं। वहीं, संक्रमित न होने वाली महिलाओं के गर्भनाल में हुई दिक्कत के दोगुना मामले सामने आए। गर्भनाल में दिक्कत होने के मायने क्या हैं?कोख में पल रहा बच्चा मां से एक गर्भनाल के जरिए जुड़ा होता है। इस गर्भनाल के जरिए मां से ऑक्सीजन और पोषक तत्व बच्चे के हर अंग तक पहुंचत...
गर्भवती महिलाओं को अलर्ट करने वाली खबर:महिलाओं में महामारी का तनाव भी प्रेग्नेंसी में समस्याएं पैदा कर रहा, गर्भनाल की जांच में हुई पुष्टि; इंग्लैंड के शोधकर्ताओं का दावा

गर्भवती महिलाओं को अलर्ट करने वाली खबर:महिलाओं में महामारी का तनाव भी प्रेग्नेंसी में समस्याएं पैदा कर रहा, गर्भनाल की जांच में हुई पुष्टि; इंग्लैंड के शोधकर्ताओं का दावा

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गर्भवती महिलाओं पर इंग्लैंड में हुई रिसर्च अलर्ट करने वाली है। रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है, गर्भवती महिलाओं को कोविड न होने के बावजूद भी उनकी हालत बिगड़ने का खतरा है। महामारी का तनाव उनकी प्रेग्नेंसी में समस्याएं पैदा कर सकता है। यह बात महामारी में 115 गर्भवती महिलाओं पर हुई रिसर्च में सामने आई है। 2020 में हुई गर्भनाल की जांच हुईरिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने 2020 में गर्भवती महिलाओं की गर्भनाल जांची। रिपोर्ट में सामने आया कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान कोविड हुआ था उनकी गर्भनाल में तीन गुना समस्याएं दिखीं। वहीं, संक्रमित न होने वाली महिलाओं के गर्भनाल में हुई दिक्कत के दोगुना मामले सामने आए। गर्भनाल में दिक्कत होने के मायने क्या हैं?कोख में पल रहा बच्चा मां से एक गर्भनाल के जरिए जुड़ा होता है। इस गर्भनाल के जरिए मां से ऑक्सीजन और पोषक तत्व बच्चे के हर अंग तक पहुंचत...
चीन में चौंकाने वाला मामला:22 साल के शख्स ने 10 मिनट में डेढ़ लीटर कोल्ड ड्रिंक पी, पेट में गैस बनने से धमनी फटी और लिवर डैमेज हुआ; पढ़ें पूरा मामला

चीन में चौंकाने वाला मामला:22 साल के शख्स ने 10 मिनट में डेढ़ लीटर कोल्ड ड्रिंक पी, पेट में गैस बनने से धमनी फटी और लिवर डैमेज हुआ; पढ़ें पूरा मामला

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चीन में 22 साल के एक शख्स की 10 मिनट में 1.5 लीटर कोल्ड ड्रिंक पीने से मौत हो गई। डॉक्टर्स का कहना है लगातार बिना रुके इतनी कोल्ड ड्रिंक्स पीने से मरीज में गैस बनी और मौत हुई। मरीज की पहचान नहीं हो सकी है। यह घटना होने के 6 घंटे बाद उसे बीजिंग के चाओयेंग हॉस्पिटल ले जाया गया। भर्ती होने के समय उसका पेट फूला हुआ था और तेज दर्द हो रहा था। मरीज का कहना था, उसने तेज गर्मी से बचने के लिए कोल्ड ड्रिंक पी थी। डॉक्टर्स का कहना है, एक सांस में कोल्ड ड्रिंक पीने आंतों में गैस बन गई। गैस के दबाव के कारण धमनी फट गई थी। मेडिकल रिपोर्ट में सामने आईं चौंकाने वाली बातेंमेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, जब मरीज की जांच की गई तो कई परेशानियां सामने आईं। मरीज में पहले से कोई बीमारी नहीं थी, लेकिन उसका हार्ट रेट बढ़ा हुआ था। ब्लड प्रेशर लो था और तेजी से सांस ले रहा था। सीटी स्कैन में निमेटोसिस की पुष्टि हुई...
बीमार करने वाले व्हाइट फूड:मैदा, नमक अजीनोमोटो और शक्कर कैंसर, डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ाते हैं, जानिए ये शरीर को कैसे पहुंचाते हैं नुकसान

बीमार करने वाले व्हाइट फूड:मैदा, नमक अजीनोमोटो और शक्कर कैंसर, डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ाते हैं, जानिए ये शरीर को कैसे पहुंचाते हैं नुकसान

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स्वस्थ शरीर के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कम खाना और ज्यादा शारीरिक मेहनत करना। लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है भोजन में जरूरी पोषक तत्वों का होना। बदली हुई जीवनशैली, भोजन में फास्ट फूड और पैकेज्ड फूड की बढ़ी हुई मात्रा ने हमारे भोजन से पोषक तत्वों की मात्रा को कम कर दिया है। इनमें चीनी, नमक, मैदा और अजीनोमोटो जैसे पदार्थ शामिल हैं। खास बात यह है कि प्रोसेस्ड फूड में इनकी मात्रा खतरनाक स्तर तक होती है। हार्वर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, ये न केवल कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं। बल्कि ये उम्र को कम से कम दस साल तक कम कर सकते हैं। फूड एंड डाइटेटिक एक्सपर्ट अनुपा दास से जानिए जानिए, उन चार चीजों के बारे में जिनका ओवरयूज खतरनाक है और ये कैसे नुकसान पहुंचाते हैं। मैदा: मोटापा, कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का कारण ...
खानपान से बढ़ता ग्लोबल वार्मिंग का खतरा:मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स से 57 फीसदी तक हो रहा कार्बन उत्सर्जन, अमेरिकी वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला दावा; जानिए इसके मायने क्या हैं

खानपान से बढ़ता ग्लोबल वार्मिंग का खतरा:मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स से 57 फीसदी तक हो रहा कार्बन उत्सर्जन, अमेरिकी वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला दावा; जानिए इसके मायने क्या हैं

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कार्बन का उत्सर्जन भी ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है। ग्लोबल वार्मिंग यानी दुनियाभर में बढ़ता तापमान। कार्बन के उत्सर्जन पर वैज्ञानिकों की नई रिसर्च चौंकाने वाली है। रिसर्च कहती है, पौधों से तैयार होने वाले खाने के मुकाबले मीट और डेयरी प्रोडक्ट दोगुना कार्बन उत्सर्जन करते हैं। जो पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है। कार्बन उत्सर्जन बढ़ने से ग्रीन हाउस गैसों का स्तर बढ़ता है, हालात ऐसे ही रहे तो गर्मी और बढ़ेगी। यह दावा अमेरिका की इलिनॉयस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं अपनी हालिया रिसर्च में किया है। रिसर्च कैसे हुई, कार्बन का ग्रीन हाउस गैस से क्या है कनेक्शन और इसके मायने क्या हैं, जानिए इन सवालों का जवाब... यह रिसर्च कैसे हुई, पहले इसे समझेंखाने की चीजों से कार्बन उत्सर्जन का सम्बंध समझने के लिए वैज्ञानिकों ने 200 देशों में रिसर्च की। इन देशों में उगने वाली 171 फसलों और जानवरों से तैयार कि...
मलेरिया का ऐसा मामला भी:अफ्रीका में ड्रग रेसिस्टेंट मलेरिया के मामले सामने आए, मरीजों पर इसकी सबसे कारगर दवा बेसअर साबित हो रही; जानिए इसके क्या मायने हैं

मलेरिया का ऐसा मामला भी:अफ्रीका में ड्रग रेसिस्टेंट मलेरिया के मामले सामने आए, मरीजों पर इसकी सबसे कारगर दवा बेसअर साबित हो रही; जानिए इसके क्या मायने हैं

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अफ्रीका में ड्रग रेसिस्टेंट मलेरिया के मामले सामने आए हैं। यानी मलेरिया के खास तरह स्ट्रेन पर इसकी दवाएं बेअसर हो रही हैं। अफ्रीका के युगांडा में इसके प्रमाण भी मिले हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, चिंता करने वाली बात यह है कि मरीजों पर मलेरिया की वो दवा बेअसर साबित हो रही है, दुनियाभर में जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल इसके इलाज में किया जाता है। ड्रग रेसिसटेंट मलेरिया के मामले बढ़ते रहे तो इसकी दवाएं मलेरिया को रोकने में नाकाम साबित होंगी। कैसे पता चला मलेरिया का नया स्ट्रेन, अफ्रीका में इसका मिलना क्यों है सबसे ज्यादा खतरनाक, हर साल कितने लोग मलेरिया से दम तोड़ रहे... जानिए इन सवालों के जवाब- कैसे पता चला कि मरीज पर दवा हुई बेअसर? शोधकर्ताओं का कहना है, युगांडा में मलेरिया के जिन मरीजों का इलाज सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा आर्टिमीसिनिन से किया जा रहा था, उनके ब्लड सैम्पल लिए गए।...
अमेरिकी ऊंट ‘लामा’ से कोरोना को मात देने की तैयारी:लामा के शरीर में बनने वाली नैनोबॉडीज कोरोना पीड़ित की नाक में स्प्रे करके वायरस को मात देंगे वैज्ञानिक, ये अल्फा-बीटा वैरिएंट्स पर भी असरदार

अमेरिकी ऊंट ‘लामा’ से कोरोना को मात देने की तैयारी:लामा के शरीर में बनने वाली नैनोबॉडीज कोरोना पीड़ित की नाक में स्प्रे करके वायरस को मात देंगे वैज्ञानिक, ये अल्फा-बीटा वैरिएंट्स पर भी असरदार

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दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले लामा यानी ऊंट के शरीर में बनने वाली नैनोबॉडीज कोरोना से लड़ने में इंसान की मदद कर सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, नैनोबॉडीज प्रोटीन के मिलकर बनी होती हैं। वायरस से लड़ने वाले इस प्रोटीन को कोरोना पीड़ितों की नाक में स्प्रे के रूप में दिया जा सकता है। ये नैनोबॉडीज एक तरह की एंटीबॉडीज ही हैं। रिसर्च करने वाले ऑक्सफोर्डशायर के रोजालिंड फ्रैंकलिन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन अमेरिकी ऊंट में बनने वाली नैनोबॉडीज कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट्स से लड़ सकती हैं। कोरोना से संक्रमित जानवरों में ये नैनोबॉडीज देने पर उनके लक्षणों में कमी आई। इन नैनोबॉडीज को लैब में बड़े स्तर पर तैयार किया जा सकता है, जो इंसानों के लिए ह्यूमन एंटीबॉडीज का सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने वाला एक विकल्प साबित हो सकती हैं। अमेरिकी ऊंट लामा को फिफी भी कहते हैं। प्रयोग क...
मायोपिया रोकने वाला स्मार्ट चश्मा:चीनी वैज्ञानिकों ने मायोपिया के बढ़ते असर को धीमा करने वाला स्मार्ट चश्मा बनाया, दूर की चीजें देखना हुआ आसान; दो साल में 67% घटा बीमारी का असर

मायोपिया रोकने वाला स्मार्ट चश्मा:चीनी वैज्ञानिकों ने मायोपिया के बढ़ते असर को धीमा करने वाला स्मार्ट चश्मा बनाया, दूर की चीजें देखना हुआ आसान; दो साल में 67% घटा बीमारी का असर

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वैज्ञानिकों ने ऐसा स्मार्ट चश्मा विकसित किया है जो आंखों की बीमारी मायोपिया के असर को कम करता है। मायोपिया होने पर मरीज को दूर की चीजें साफ नहीं दिखाई देतीं। जैसे- 2 मीटर दूरी पर रखी चीज मरीज को धुंधली दिखती है। यह चश्मा कितना असर करता है, इस पर रिसर्च भी की गई है। चीन की वेंझाउ मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 167 बच्चों को यह चश्मा पहनाकर अध्ययन किया। बच्चों को दिन में 12 घंटे तक यह चश्मा पहनने को कहा गया। 2 साल तक ऐसा करने के बाद मायोपिया का असर 67 फीसदी तक कम हो गया। मायोपिया होने पर आंखें में क्या बदलाव होता है, चश्मा कैसे काम करता है और देश में ऐसे मरीजों की क्या स्थिति है, जानिए इन सवालों के जवाब मायोपिया होने पर होता क्या है?आसान भाषा में समझें तो आंखों का आईबॉल उम्र के साथ चारों तरफ गोलाई में बढ़ता है। मायोपिया के मरीजों का आईबॉल उम्र के साथ चौड़ा होने लगता है। इससे विजन तैयार करने ...
इंजेक्शन का डर खत्म करने की कोशिश:पौधा खाते ही शरीर में पहुंचेगी कोरोना की वैक्सीन, अमेरिकी वैज्ञानिक डेवलप कर रहे है ऐसा प्लांट

इंजेक्शन का डर खत्म करने की कोशिश:पौधा खाते ही शरीर में पहुंचेगी कोरोना की वैक्सीन, अमेरिकी वैज्ञानिक डेवलप कर रहे है ऐसा प्लांट

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कैलिफोर्निया वैक्सीन का नाम सुनते ही कई लोगों को इंजेक्शन का डर सताने लगता है। अमेरिका के वैज्ञानिक इसी डर को खत्म करने की कोशिश में जुटे हैं। वो ऐसा पौधा विकसित कर रहे हैं जिसे खाने के बाद इंसान में वैक्सीन पहुंच जाएगी। इसकी शुरुआत कोविड वैक्सीन से की जाएगी। आसान भाषा में समझें तो लोगों को पौधा खिलाकर कोविड की वैक्सीन दी जाएगी। वैक्सीन वाले पौधे को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया रिवरसाइड के शोधकर्ता विकसित कर रहे हैं। पौधे की मदद से कोरोना की mRNA वैक्सीन को इंसान में पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। पौधों में कैसे पहुंचेगी वैक्सीन, कैसे इसमें स्टोर होगी, वैक्सीन के इस नए तरीके के क्या फायदे होंगे और कितना कुछ बदलेगा, जानिए इन सवालों के जवाब.... सबसे पहले जानिए, कैसे काम करती है mRNA टेक्नोलॉजी से तैयार कोविड वैक्सीनफाइजर और मॉडर्ना ने अपनी वैक्सीन को तैयार करने में mRNA ...