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एम्स की रिसर्च:आर्थराइटिस और ग्लूकोमा के इलाज में योग असरदार, यह थैरेपी की तरह काम करता है; सूजन और घाव को घटाने का काम करता है

एम्स की रिसर्च:आर्थराइटिस और ग्लूकोमा के इलाज में योग असरदार, यह थैरेपी की तरह काम करता है; सूजन और घाव को घटाने का काम करता है

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आर्थराइटिस और ग्लूकोमा जैसी बीमारियों में भी योग असरदार है। एम्स के एक्सपर्ट्स ने अपनी हालिया रिसर्च में इसकी पुष्टि भी की है। एक्सपर्ट्स का कहना है, रिसर्च में साबित हो चुका है कि मेडिटेशन ग्लूकोमा और रूमेटॉयड आर्थराइटिस के इलाज एक एडिशनल थैरेपी की तरह काम करती है। ऐसे काम करता है योगएम्स से जुड़े राजेन्द्र प्रसाद सेंटर ऑफ ऑप्थेलेमिक साइंसेज के एक्सपर्ट्स तनुज दादा और कार्तिकेय महालिंगम का कहना है, ग्लूकोमा के मरीजों में मेडिटेशन मस्तिष्क का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ृाता है और आंखों को नुकसान पहुंचाने वाले इंट्राकुलर प्रेशर को घटाता है। यह सूजन घटाता है, घाव को भरता है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं, हालिया रिसर्च में यह जानने की कोशिश की गई कि मेडिटेशन का ट्रेब्रिकुलर मेशवर्क जीन एक्सप्रेशन पर क्या असर पड़ता है। ग्लूकोमा की बीमारी में इस जीन का अहम रोल होता है। ऐ...
सांस लेने और छोड़ने का तरीका दिमाग पर असर छोड़ता है, डिप्रेशन, पाचन में गड़बड़ी और हृदय रोगों में फायदा होता है; जानिए योग कैसे काम करता है

सांस लेने और छोड़ने का तरीका दिमाग पर असर छोड़ता है, डिप्रेशन, पाचन में गड़बड़ी और हृदय रोगों में फायदा होता है; जानिए योग कैसे काम करता है

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योग शब्द का संस्कृत में पहली बार इस्तेमाल ऋगवेद में किया गया। यह संस्कृत के शब्द 'युज' से बना है, जिसका मतलब है जोड़ना या जुड़ना। विज्ञान भी योग के बारे में यही बात कहता है, लेकिन अलग तरह से। योग कैसे काम करता है, इस पर बॉस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है। शोधकर्ता क्रिस स्ट्रीटर और उनकी रिसर्च टीम कहती है, इंसान का नर्वस सिस्टम यानी मस्तिष्क पूरे शरीर को जोड़ने और स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसमें योग भी अहम रोल निभाता है। आज विश्व योग दिवस है, इस मौके पर जानिए आखिर योग काम कैसे करता है.... वेगस नर्व योग से शरीर को जोड़े रखती हैशोधकर्ताओं के मुताबिक, योग का सीधा असर वेगस नर्व पर पड़ता है। यह शरीर की सबसे लम्बी तंत्रिका है। इसकी शुरुआत मस्तिष्क से होती है और पूरे शरीर में फैली होती है। इसके काम करने का असर हमारे श्वांस तंत्र, पाचन और हृदय पर होता है। ...
देश के 92.6% लोग मानते हैं योग जीवन बदल सकता है, 91.5% बोले; यह डायबिटीज कंट्रोल करने में असरदार; योग करने में बुजुर्ग सबसे आगे

देश के 92.6% लोग मानते हैं योग जीवन बदल सकता है, 91.5% बोले; यह डायबिटीज कंट्रोल करने में असरदार; योग करने में बुजुर्ग सबसे आगे

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नई दिल्ली देश में 92.6% लोग मानते हैं योग इंसान का जीवन बदल सकता है। 91.5% देशवासियों का कहना है, योग डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद करता है। ये आंकड़े देशभर में हुए सर्वे में सामने आए हैं। योग के बारे में लोग क्या सोचते हैं, इसे समझने के लिए स्वास्थ्य और आयुष मंत्रालय ने देशभर में सर्वे किया। सर्वे में 1,62,330 लोग शामिल हुए। सर्वे रिपोर्ट कहती है, देश की 11.8 फीसदी ही योग करती है। सबसे ज्यादा योग करने वाले दक्षिण भारत में हैं लेकिन सबसे ज्यादा दक्षिण के लोग मानते हैं कि योग जीवन को बदल सकता है। ऐसा मानने वालों में भी सबसे ज्यादा निम्न आय वर्ग के लोग शामिल हैं।योग करने में बुजुर्गों ने युवाओं को पीछे छोड़ासर्वे के मुताबिक, महिलाएं और पुरुष दोनों ही योग करने के मामले बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इनमें युवाओं के मुकाबले 60-79 साल बुजुर्गों की संख्या (12.1%) सबसे ज्यादा है, जबकि युवाओं ...
चीनी वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा:जिराफ से भी लम्बे होते थे गैंडे, इनका वजन 4 अफ्रीकी हाथियों के बराबर था; चीन में मिले विशाल गैंडों के जीवाश्म

चीनी वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा:जिराफ से भी लम्बे होते थे गैंडे, इनका वजन 4 अफ्रीकी हाथियों के बराबर था; चीन में मिले विशाल गैंडों के जीवाश्म

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कभी गैंडे जिराफ से भी लम्बे होते थे, चीन में इसके प्रमाण भी मिले हैं। उत्तरी-पश्चिमी चीन के शोधकर्ताओं ने विशाल गैंडों की ऐसी प्रजाति के जीवाश्म खोजे हैं जो जिराफ से भी लम्बे थे। वैज्ञानिकों का कहना है, 2.65 करोड़ साल पहले ये धरती पर चहलकदमी करते हुए पाए जाते थे। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन विशाल गैंडों को पैरासेराथेरियम लिनक्सियान्स के नाम से जाना जाता है। इनका वजन करीब 21 टन था, जो 4 अफ्रीकी हाथियों के बराबर था। 7 मीटर तक पहुंच सकता था सिरकम्युनिकेशन बायलॉजी जर्नल में पब्लिश रिपोर्ट के मुताबिक, ये गैंडे बिना सींग वाले थे और इनका सिर पेड़ों से पत्तियां खाने के लिए 7 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकता था। चीन के गांसू प्रांत में मिली विशाल गैंडे की खोपड़ी और जबड़ों की हड्डियां की जांच की गई। जांच में सामने आया कि ये ओलिगोसीन युग के अंतिम दौर की है। पाकिस्तान में प...
अमेरिकी वैज्ञानिक का दावा:इंसान के दिमाग को पढ़ने वाला हेलमेट तैयार; ट्रायल सफल रहा, 37 लाख रुपए कीमत के साथ जल्द ही मार्केट में उतारा जाएगा

अमेरिकी वैज्ञानिक का दावा:इंसान के दिमाग को पढ़ने वाला हेलमेट तैयार; ट्रायल सफल रहा, 37 लाख रुपए कीमत के साथ जल्द ही मार्केट में उतारा जाएगा

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अमेरिकी वैज्ञानिक ने ऐसा हेलमेट तैयार किया है तो इंसान का दिमाग पढ़ने में सक्षम है। हेलमेट तैयार करने वाले बायोहैकर ब्रायन जॉनसन का कहना है, इंसान के दिमाग में क्या चल रहा है, उसकी तस्वीर दिखाने में यह हेलमेट असरदार है। उम्मीद है 2030 तक ऐसे सेंसर वाले हेलमेट बनाए जा सकेंगे जो स्मार्टफोन से ज्यादा महंगे नहीं होंगे। फिलहाल वर्तमान में तैयार एक हेलमेट की कीमत 37 लाख रुपए है। मेंटल डिसऑर्डर के मरीजों को मिलेगी मददब्रायन का कहना है, इस हेलमेट को जल्द ही मार्केट में उतारा जाएगा। इसका इस्तेमाल उन लोगों के लिए वरदान साबित होगा जो मानसिक रोगी हैं या स्ट्रोक के मरीज हैं। यह मस्तिष्क के न्यूरॉन्स की एनालिसिस करता है और दिमाग की हर गतिविधि को अनगिनत समय तक पढ़ सकता है। इंसानी दिमाग को AI से जोड़ने का लक्ष्य थाकैलिफोर्निया के स्टार्टअप कर्नल के फाउंडर ब्रायन जॉनसन का कहना है, हम लम्बे समय से ऐसे...
चीनी वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला प्रयोग:नर चूहों ने दिया बच्चों को जन्म, 21 दिनों में इनमें चूहों के बच्चे विकसित हुए; सभी बच्चे स्वस्थ रहे

चीनी वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला प्रयोग:नर चूहों ने दिया बच्चों को जन्म, 21 दिनों में इनमें चूहों के बच्चे विकसित हुए; सभी बच्चे स्वस्थ रहे

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चीन में नर चूहों ने बच्चों को जन्म दिया है। यह प्रयोग शंघाई की नेवल मेडिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया है। वैज्ञानिकों ने इसे रैट मॉडल नाम दिया है। हालांकि, चीनी वैज्ञानिकों के इस प्रयोग की आलोचना भी की जा रही है। नर चूहों ने ऐसे बच्चे पैदा किएचीनी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च को चार भाग में पूरा किया है। वैज्ञानिकों ने सबसे पहले नर और मादा चूहे को अगल-बगल रखकर स्किन में टांका लगाकर जोड़ा। फिर मादा चूहों की बच्चेदानी को बाहर निकाला। इसे नर चूहों के शरीर में ट्रांसप्लांट किया। फिर नर चूहों को प्रेग्नेंट किया गया और सिजेरियन की मदद से डिलीवरी कराई गई। 21 दिनों में विकसित हुआ भ्रूणवैज्ञानिकों का कहना है, चूहों को प्रेग्नेंट करने के बाद अगले 21.5 दिनों तक इनमें भ्रूण विकसित हुए। समय पूरा होने पर इनकी सर्जरी की। रिसर्च में सामने आया कि जन्मे सभी नर बच्चे अगले तीन महीने तक जिंदा रह सक...
प्लास्टिक वेस्ट अब बेकार नहीं:दुनिया में पहली बार प्लास्टिक के कचरे से बनाया गया वनीला फ्लेवर, इसका इस्तेमाल फूड और फार्मा इंडस्ट्री में हो सकेगा

प्लास्टिक वेस्ट अब बेकार नहीं:दुनिया में पहली बार प्लास्टिक के कचरे से बनाया गया वनीला फ्लेवर, इसका इस्तेमाल फूड और फार्मा इंडस्ट्री में हो सकेगा

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वैज्ञानिकों ने पहली बार प्लास्टिक के कचरे से आइसक्रीम में मिलाया जाने वाला वनीला फ्लेवर तैयार किया है। इसे तैयार करने में जेनेटिकली मोडिफाइड बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया गया है। प्लास्टिक को वनीला (वेनिलीन) में कन्वर्ट करने वाली एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जोएना सैडलर का कहना है, प्लास्टिक के कचरे से बहुमूल्य केमिकल बनाने का यह पहला उदाहरण है। प्लास्टिक कचरा अब बेकार नहींएडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के स्टीफन वॉलेस का कहना है, हमारी रिसर्च उस सोच को चुनौती देती है जो मानते हैं प्लास्टिक का कचरा एक समस्या हैं। यह कार्बन का नया सोर्स है जिससे कई उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। वनीला फ्लेवर कैसे बना और यह कितने काम का है ग्रीन केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, सबसे पहले वैज्ञानिकों ने ई-कोली बैक्टीरिया के जीनोम में बदलाव किया। फिर प्लास्टिक से तैयार टेरिप्थेलिक एसिड को बै...
1,098 कैरेट का बेशकीमती तोहफा:अफ्रीका में मिला दुनिया का सबसे बड़ा हीरा, डायमंड कम्पनी ने राष्ट्रपति मोग्वेत्सी मसीसी को गिफ्ट किया तीसरा सबसे बड़ा हीरा

1,098 कैरेट का बेशकीमती तोहफा:अफ्रीका में मिला दुनिया का सबसे बड़ा हीरा, डायमंड कम्पनी ने राष्ट्रपति मोग्वेत्सी मसीसी को गिफ्ट किया तीसरा सबसे बड़ा हीरा

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अफ्रीका देश बोत्सवाना में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हीरा मिला है। यह 1,098 कैरेट का है। देबस्वाना डायमंड कंपनी ने इस हीरे को राष्ट्रपति मोग्वेत्सी मसीसी को बतौर गिफ्ट दिया है। पिछले 50 साल के इतिहास में पहली बार इस डायमंड कम्पनी को इतना बड़ा हीरा मिला है। दुनियाभर में इस हीरे की चर्चा है। खास बात है कि इससे पहले मिले दुनिया के दोनों सबसे हीरे अफ्रीका में ही पाए गए हैं। दुनिया का सबसे बड़ा हीरा 3,106 कैरेट काअब तक 3,106 कैरेट का दुनिया का सबसे बड़ा हीरा 1905 में अफ्रीका में मिला था। इसका नाम क्यूलियन स्टोन रखा गया था। वहीं, 1109 कैरेट का दूसरा सबसे बड़ा हीरा 2015 में बोत्सवाना में ही पाया गया था, जिसका नाम लेसेडी-ला-रोना था। हीरे का नामकरण बाकीदेबस्वाना डायमंड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर लिनेट आर्मस्ट्रॉग का कहना है, शुरुआती जांच में पता चला कि यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हीरा है। खन...
अमेरिकी वैज्ञानिकों का प्रयोग:स्मार्टफोन के कैमरे से देख सकेंगे मुंह के बैक्टीरिया, घर पर ही जुबान को स्कैन करें और देखें बैक्टीरिया है या नहीं

अमेरिकी वैज्ञानिकों का प्रयोग:स्मार्टफोन के कैमरे से देख सकेंगे मुंह के बैक्टीरिया, घर पर ही जुबान को स्कैन करें और देखें बैक्टीरिया है या नहीं

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अब मोबाइल फोन के कैमरे से भी बैक्टीरिया का पता लगाया जा सकता है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मोबाइल कैमरे में बदलाव किया और इसे एलईडी ब्लैक लाइट से जोड़ा। इस कैमरे से इंसान की जुबान को स्कैन किया गया। इस दौरान दांतों के बैक्टीरिया चमकते हुए नजर आए। इसकी मदद से एक्ने के बैक्टीरिया भी देखे जा सकते हैं। घर पर कर सकेंगे जांचइसे तैयार करने वाली वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है, स्मार्टफोन दुनियाभर में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यह लोगों के बजट में हैं और उनके लिए बैक्टीरिया की जांच करना आसान है। इस डिवाइस की मदद से घर पर लोग जान सकेंगे बैक्टीरिया है या नहीं। शोधकर्ता डॉ. रुईकैंन्ग वैंग का कहना है, स्किन और मुंह के बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। दांत और मुंह के मसूढ़ों के बैक्टीरिया घाव को भरने की रफ्तार को धीमा करते हैं। इस तरह चमकते हुए दिखते हैं बैक्टीरिया। ...
अमेरिकी वैज्ञानिकों का प्रयोग:वैज्ञानिकों ने बनाया बिना एसी के घर ठंडा रखने वाला ‘कूलिंग पेपर’, इससे कवर हुई बिल्डिंग्स और घरों को नहीं होगी कूलिंग सिस्टम की जरूरत

अमेरिकी वैज्ञानिकों का प्रयोग:वैज्ञानिकों ने बनाया बिना एसी के घर ठंडा रखने वाला ‘कूलिंग पेपर’, इससे कवर हुई बिल्डिंग्स और घरों को नहीं होगी कूलिंग सिस्टम की जरूरत

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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने ऐसा खास तरह का पेपर तैयार किया है। यह बिना एसी के घर को ठंडा रखने का काम करेगा। वैज्ञानिकों ने इसे 'कूलिंग पेपर' का नाम दिया है। इसे तैयार करने वाली नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का दावा है, कूलिंग पेपर से घर और बिल्डिंग कवर की जाएगी। ऐसी बिल्डिंग्स और घरों को ठंडा रखने के लिए किसी कूलिंग सिस्टम की जरूरत नहीं होगी। ऐसे काम करता है कूलिंग पेपरशोधकर्ता यी झेंग कहते हैं, कूलिंग पेपर का रंग हल्का होता है। यह घरों पर पड़ने वाली सूरज की तेज किरणों को परावर्तित करता है। इसके अलावा यह घर और बिल्डिंग के अंदर इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट, कुकिंग और शरीर की गर्मी को खींचते हैं। फिर इस गर्मी को घर और बिल्डिंग के बाहर ट्रांसफर करता है। झेंग कहते हैं, यह खास तरह का पेपर है जिसमें बेहद बरीक छिद्र हैं। यह माइक्रोफायबर से बना है जो गर्मी को एब्जॉर्ब करके माहौल को ठंडा रखता है।...