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बालों के सफेद होने की एक वजह तनाव भी, स्ट्रेस कम करते हैं तो बालों का पुराना रंग वापस लौट सकता है; अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा

बालों के सफेद होने की एक वजह तनाव भी, स्ट्रेस कम करते हैं तो बालों का पुराना रंग वापस लौट सकता है; अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा

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अगर आपके बाल तेजी से सफेद हो रहे हैं तो तनाव से बचिए। अमेरिकी वैज्ञानिकों की नई रिसर्च कहती है, बालों के सफेद होने का एक कारण तनाव भी है। वैज्ञानिकों का दावा है, अगर तनाव लेना छोड़ देते हैं तो सफेद हुए बाल वापस काले हो सकते हैं। रिसर्च करने वाले कोलम्बिया यूनिवर्सिटी इरविंग मेडिकल सेंटर ने दावा किया है, पहली बार यह साबित हुआ है इंसानों में तनाव के कारण भी बाल सफेद होते हैं। तनाव से ऐसे सफेद होते हैं बालशोधकर्ताओं का कहना है, शरीर में मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिकाओं का पावर हाउस कहा जाता है। तनाव लेने पर इनमें बदलाव होता है और बालों से जुड़े सैकड़ों प्रोटीन भी बदलने लगते हैं। नतीजा, बाल सफेद हो जाते हैं। उम्र के साथ इसलिए सफेद हो जाते हैं बाल बालों के अंतिम सिरे को हेयर फॉलिकल कहते हैं, यह सिर की स्किन से जुड़ा होता है। जब इंसान युवा होता है तो शरीर की कोशिकाएं बालों में खास तरह ...
मोटापे से परेशान हैं तो शाम को एक्सरसाइज करें, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का लेवल कंट्रोल में रहेगा; मेटाबॉलिक हेल्थ में भी सुधार होगा

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मोटापे से परेशान हैं और कोलेस्ट्रॉल व ब्लड शुगर लेवल कम करना चाहते हैं तो एक्सरसाइज के लिए शाम का समय चुन सकते हैं। शाम को एक्सरसाइज करने पर कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। यह दावा ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, रिसर्च के दौरान यह पाया कि जो लोग ओवरवेट हैं और अधिक फैट वाली डाइट ले रहे हैं उनमें टाइप-2 डायबिटीज का खतरा है। ऐसे लोग अगर शाम के समय एक्सरसाइज करते हैं तो उनकी मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार होता है। डायबिटोलॉजिया जर्नल में पब्लिश रिसर्च कहती है, यह स्टडी खासतौर पर उन लोगों के अहम है जो डायबिटीज से परेशान हैं और अक्सर उन्हें ब्लड शुगर कंट्रोल करने में दिक्कत होती है। ऐसे हुई स्टडी रिसर्च में 24 ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिन्होंने लगातार पिछले 11 दिनों तक अधिक फैट वाली डाइट ली।इनकी फिटनेस...
इसलिए रेड मीट से है कैंसर का खतरा:रेड मीट इंसान का DNA डैमेज करके कोलोन कैंसर का रिस्क बढ़ाता है, इसमें मौजूद नाइट्रेट केमिकल भी है खतरनाक

इसलिए रेड मीट से है कैंसर का खतरा:रेड मीट इंसान का DNA डैमेज करके कोलोन कैंसर का रिस्क बढ़ाता है, इसमें मौजूद नाइट्रेट केमिकल भी है खतरनाक

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पिछले कई सालों से डॉक्टर्स लोगों को रेड मीट कम से कम खाने की सलाह देते आ रहे हैं क्योंकि ऐसा खानपान कोलोन कैंसर का खतरा बढ़ाता है। रेड मीट का कैंसर से क्या कनेक्शन है, इसे अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया रिसर्च में समझाया है। वैज्ञानिकों का कहना है, रेड मीट इंसान के डीएनए को डैमेज करता है और कैंसर का खतरा बढ़ाता है। यह एक कार्सिनोजेनिक फूड है यानी ऐसा खानपान जो कैंसर की वजह बन सकता है। कैंसर के 900 मरीजों पर रिसर्च कीशोधकर्ता और डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट मारियोज गियानेकिस कहते हैं, हमने टीम के साथ मिलकर कोलोन कैंसर से जूझने वाले 900 मरीजों पर रिसर्च की। इनके DNA की जांच की। रिपोर्ट कहती है, इन मरीजों के DNA में ऐसा बदलाव दिखा जो पहले कभी नहीं देखा गया था। यह बदलाव साबित करता है कि DNA डैमेज हुआ है। शरीर की सभी कोशिकाओं में यह बदलाव नहीं हुआ लेकिन कोलोन से लिए गए सै...
नई रिसर्च:रक्त का थक्का जमने से क्यों हो रही कोरोना पीड़ितों की मौत, वैज्ञानिकों ने बताई वजह; कहा, VWF मॉलिक्यूल इसका कारण

नई रिसर्च:रक्त का थक्का जमने से क्यों हो रही कोरोना पीड़ितों की मौत, वैज्ञानिकों ने बताई वजह; कहा, VWF मॉलिक्यूल इसका कारण

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कोरोना के मरीजों में रक्त के थक्के क्यों जमते हैं, वैज्ञानिकों ने इसकी वजह बताई है। वैज्ञानिकों का कहना है, एक खास तरह का मॉलीक्यूल इसके लिए जिम्मेदार है। संक्रमित मरीजों में इस मॉलिक्यूल का स्तर बढ़ने में रक्त के थक्के जमते हैं और मौत का खतरा बढ़ता है। यह दावा रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जंस इन आयरलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने किया है। इसलिए जमते हैं रक्त के थक्केकोरोना के मरीजों में रक्त के थक्के क्यों जमते हैं, इसे समझने के लिए डबलिन के ब्यूमॉन्ट हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना पीड़ितों पर रिसर्च की गई। इनका ब्लड सैम्पल लिया गया। ब्लड रिपोर्ट में सामने आया कि इन मरीजों में VWF मॉलिक्यूल का स्तर अधिक था, यह रक्त का थक्का जमाता है। वहीं, थक्के को जमने से रोकने वाले मॉलीक्यूल ADAMTS13 का स्तर कम था। रिसर्च में मौत का कारण साबित हुआदोनों मॉलीक्यूल का बैलेंस बिगड़ने पर थक्के जमने लगते है...
इजरायली वैज्ञानिकों की चौंकाने वाली रिसर्च:शादीशुदा जीवन में तनाव सिगरेट पीने जितना जानलेवा; ऐसे पुरुषों में स्ट्रोक से मौत का खतरा 69% तक; इनकी मौत के आंकड़े 19% तक बढ़े

इजरायली वैज्ञानिकों की चौंकाने वाली रिसर्च:शादीशुदा जीवन में तनाव सिगरेट पीने जितना जानलेवा; ऐसे पुरुषों में स्ट्रोक से मौत का खतरा 69% तक; इनकी मौत के आंकड़े 19% तक बढ़े

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शादी से नाखुश रहने पर सिर्फ तनाव ही नहीं मौत का खतरा भी बढ़ता है। ऐसे पुरुष जो अपनी शादी से संतुष्ट नहीं हैं उन्हें स्ट्रोक से मौत की आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे पुरुषों में मौत के आंकड़े 19 फीसदी तक सामने आए हैं। यह दावा इजरायल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में किया है। मैरिज एजुकेशन प्रोग्राम शुरू करने की जरूरतशोधकर्ता डॉ. शहर लेव-एरी कहते हैं, रिसर्च में सामने आई बात चौंकाने वाली है। ऐसे पुरुष जो अपनी शादी से संतुष्ट नहीं है उनमें मौत का खतरा सिगरेट पीने जितना जानलेवा है। अपनी रिसर्च में शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि शादीशुदा लोगों के लिए मैरिज एजुकेशन प्रोग्राम शुरू करने करने की जरूरत है। ऐसे हुई रिसर्चशोधकर्ताओं ने अचानक मौत का शिकार हुए 10 हजार लोगों के 3 दशक पुराने हेल्थ डाटा का अध्ययन किया। रिसर्च में सामने आया कि शादीशुदा जिंदगी में दुखी रहते हैं तो स्ट्र...
पौधे भी तनाव से जूझते हैं:इजरायली वैज्ञानिकों ने बताया, कैसे तनाव में रहने वाले पौधे रोशनी बिखेरते हैं, आलू के पौधे पर प्रयोग करके समझाया; जानिए ऐसा होता क्यों है

पौधे भी तनाव से जूझते हैं:इजरायली वैज्ञानिकों ने बताया, कैसे तनाव में रहने वाले पौधे रोशनी बिखेरते हैं, आलू के पौधे पर प्रयोग करके समझाया; जानिए ऐसा होता क्यों है

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इजरायल वैज्ञानिकों ने आलू के पेड़ में इस तरह के बदलाव किए हैं कि यह तनाव में होने पर रोशनी बिखेरता है। पेड़ कैसा महसूस करते हैं अब तक इनके हाव-भाव से समझना मुश्किल था। नतीजा, ये डैमेज हो जाते थे। यरुसलम की हेब्रयू यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, अब पौधों की जरूरत को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। पेड़ तनाव में कब होते हैं?वैज्ञानिकों के मुताबिक, पेड़ भी तनाव से जूझते हैं। जब इनमें पानी की कमी होती है, ठंड जरूरत से ज्यादा पड़ती है, सूरज की रोशनी नहीं मिलती है या तेज धूप पड़ती है तो ये तनाव में चले जाते हैं। अमूमन इनके तनाव के लक्षण इंसान समझ नहीं पाते हैं। इसलिए लगातार इन स्थितियों को झेलते हुए ये खत्म होने लगते हैं। ऐसे तैयार किया पौधाशोधकर्ता डॉ. शिलो रोसेनवासेर और उनकी टीम ने तनाव को समझने के लिए आलू के पौधे में जेनेटिकली बदलाव किया। पौधे के क्लोरोप्लास्ट में एक नए जीन को डाला...
टीबी खत्म होने के बाद खतरा घटाने वाली दवा:कॉमन एंटीबायोटिक डॉक्सीसायक्लीन टीबी के मरीजों को राहत देती है, यह फेफड़ों को डैमेज होने से बचाने के साथ रिकवरी भी तेज करती है

टीबी खत्म होने के बाद खतरा घटाने वाली दवा:कॉमन एंटीबायोटिक डॉक्सीसायक्लीन टीबी के मरीजों को राहत देती है, यह फेफड़ों को डैमेज होने से बचाने के साथ रिकवरी भी तेज करती है

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कॉमन एंटीबायोटिक टीबी के इलाज में असरदार साबित होती है। 30 मरीजों पर हुए ट्रायल में सामने आया है कि एंटीबायोटिक डॉक्सीसायक्लीन को टीबी के ट्रीटमेंट के साथ दिया जाए है तो फेफड़ों को डैमेज होने से बचा सकती है। टीबी के ट्रीटमेंट के बाद यह मरीजों की रिकवरी को भी तेज करती है। यह दावा सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल की रिसर्च में किया गया है। डॉक्सीसायक्लीन क्यों है जरूरी, यह समझिएक्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, टीबी की वजह मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया का संक्रमण है। इस बैक्टीरिया के संक्रमण के बाद फेफड़े में एक खास जगह पर धीरे-धीरे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ने लगती है। इस जगह को कैविटी कहते हैं। टीबी की दवाएं कैविटी पर पूरी तरह से असर नहीं करतीं। इसलिए टीबी का इलाज पूरा होने के बाद भी सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों में अकड़न और ब्रॉन्काइटिस का खत...
ब्रेस्ट कैंसर के इलाज का नया तरीका:सुई से ब्रेस्ट में मौजूद कैंसर की गांठ को खींचकर निकाला जा सकेगा, वैज्ञानिकों का दावा; मात्र 60 मिनट में निकल जाएगा ट्यूमर

ब्रेस्ट कैंसर के इलाज का नया तरीका:सुई से ब्रेस्ट में मौजूद कैंसर की गांठ को खींचकर निकाला जा सकेगा, वैज्ञानिकों का दावा; मात्र 60 मिनट में निकल जाएगा ट्यूमर

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वैज्ञानिकों ने ब्रेस्ट कैंसर के इलाज का नया तरीका खोजा है। वैज्ञानिकों ने खास तरह की वैक्यूम डिवाइस तैयार की है। यह डिवाइस एक सुई के जरिए शरीर से ब्रेस्ट में मौजूद छोटी और मध्यम आकार के कैंसर की गांठ को खींच निकालती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि कैंसर की गांठ निकालने में मात्र 60 मिनट का समय लगता है। सर्जरी का यह तरीका मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट ने विकसित किया है। इसका ट्रायल किया जा रहा है। 1 इंच तक की गांठ निकाली जा सकेगीवैज्ञानिकों का कहना है, वैक्यूम टेक्नोलॉजी से ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करने के लिए रिसर्च की जा रही है। इस तकनीक से ब्रेस्ट में मौजूद 1 इंच तक की गांठ को निकाला जा सकता है। यह तरीका पुरानी सर्जरी के मुकाबले से कम परेशान करने वाला है। कैंसर की गांठ निकालने के लिए मरीज के पूरे शरीर को एनेस्थीसिया देने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे निकालते हैं कैंसर की गा...
सुसाइड के मामलों पर WHO की रिपोर्ट:दुनियाभर में हर सौ में एक मौत की वजह सुसाइड, महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में मौत के मामले दोगुने से ज्यादा; महामारी ने मौत के कारण भी बढ़ाए

सुसाइड के मामलों पर WHO की रिपोर्ट:दुनियाभर में हर सौ में एक मौत की वजह सुसाइड, महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में मौत के मामले दोगुने से ज्यादा; महामारी ने मौत के कारण भी बढ़ाए

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में हर 100 में से एक मौत की वजह सुसाइड है। कोरोना के कारण सुसाइड के लिए उकसाने वाले फैक्टर बढ़े हैं। 2019 में 7 लाख मौतें सिर्फ सुसाइड से हुई हैं। यह आंकड़ा एचआईवी, मलेरिया जैसी बीमारियों से होने वाली मौतों से भी ज्यादा है। WHO के मुताबिक, महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में सुसाइड के मामले दोगुने से अधिक थे। महिलाओं में एक लाख पर यह आंकड़ा 5.4 फीसदी था। वहीं, पुरुषों में यह 12.6 फीसदी था। सुसाइड के मामले रोकने के लिए WHO ने लिव-लाइफ नाम से एक सीरिज शुरू की है। अधिक आय वाले देशों में मौत के मामले ज्यादाअधिक आय वाले देशों के सुसाइड से मौत के मामले पुरुषों में अधिक देखे गए। वहीं, महिलाओं में सुसाइड के सबसे ज्यादा मामले मध्यम आय वाले देशों में सामने आए। यह आंकड़ा एक लाख महिलाओं में 7.1 फीसदी था। सुसाइड के मामले सबसे ज्यादा 1...
एम्स की रिसर्च:आर्थराइटिस और ग्लूकोमा के इलाज में योग असरदार, यह थैरेपी की तरह काम करता है; सूजन और घाव को घटाने का काम करता है

एम्स की रिसर्च:आर्थराइटिस और ग्लूकोमा के इलाज में योग असरदार, यह थैरेपी की तरह काम करता है; सूजन और घाव को घटाने का काम करता है

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आर्थराइटिस और ग्लूकोमा जैसी बीमारियों में भी योग असरदार है। एम्स के एक्सपर्ट्स ने अपनी हालिया रिसर्च में इसकी पुष्टि भी की है। एक्सपर्ट्स का कहना है, रिसर्च में साबित हो चुका है कि मेडिटेशन ग्लूकोमा और रूमेटॉयड आर्थराइटिस के इलाज एक एडिशनल थैरेपी की तरह काम करती है। ऐसे काम करता है योगएम्स से जुड़े राजेन्द्र प्रसाद सेंटर ऑफ ऑप्थेलेमिक साइंसेज के एक्सपर्ट्स तनुज दादा और कार्तिकेय महालिंगम का कहना है, ग्लूकोमा के मरीजों में मेडिटेशन मस्तिष्क का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ृाता है और आंखों को नुकसान पहुंचाने वाले इंट्राकुलर प्रेशर को घटाता है। यह सूजन घटाता है, घाव को भरता है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं, हालिया रिसर्च में यह जानने की कोशिश की गई कि मेडिटेशन का ट्रेब्रिकुलर मेशवर्क जीन एक्सप्रेशन पर क्या असर पड़ता है। ग्लूकोमा की बीमारी में इस जीन का अहम रोल होता है। ऐ...