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एक्सरसाइज करने से एंग्जाइटी के लक्षणों में आती है कमी, ये मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

एक्सरसाइज करने से एंग्जाइटी के लक्षणों में आती है कमी, ये मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
एक्सरसाइज करने से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। जर्नल ऑफ अफेक्टिव डिसऑर्डर्स में प्रकाशित हुई एक हालिया स्टडी में पाया गया है कि एक्सरसाइज एंग्जाइटी (चिंता विकार) के लक्षणों को कम करने में असरदार होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि एक्सरसाइज चाहे कम करें या ज्यादा, ये हर स्थिति में हमारे दिमाग के लिए फायदेमंद होती है। ऐसे हुई रिसर्च इस रिसर्च में एंग्जाइटी से जूझ रहे 286 मरीजों को शामिल किया गया था। इनकी औसतन उम्र 39 साल थी और इनमें 70% महिलाएं थीं। इन मरीजों में से 50% मरीज ऐसे थे जो पिछले 10 साल से एंग्जाइटी की चपेट में थे। रिसर्च के दौरान सभी लोगों को अलग-अलग ग्रुप्स में बांट दिया गया।...
जानें क्या होता है एट-होम कोविड टेस्ट, ये ओमिक्रॉन को पकड़ने में कितना कारगर, RT-PCR टेस्ट से कितना अलग

जानें क्या होता है एट-होम कोविड टेस्ट, ये ओमिक्रॉन को पकड़ने में कितना कारगर, RT-PCR टेस्ट से कितना अलग

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
कोरोना वायरस की जांच केवल कोविड सेंटर में नहीं, बल्कि घर बैठे भी की जा सकती है। इसके लिए मार्केट में एट-होम कोरोना टेस्ट किट उपलब्ध हैं। फिलहाल ओमिक्रॉन के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दुनिया भर के एक्स्पर्ट्स इसके इस्तेमाल और एक्यूरेसी पर चर्चा कर रहे हैं। हाल ही में, अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दावा किया था कि एट-होम टेस्ट ओमिक्रॉन होने पर गलत रिजल्ट बता सकता है। क्या होता है एट-होम कोरोना वायरस टेस्ट? कोरोना टेस्ट करवाने के लिए रैपिड एंटीजन या RT-PCR या इसी तरह के दूसरे टेस्ट करवाने होते हैं। इन सभी टेस्ट के लिए मेडिकल एक्सपर्ट और लैब की जरूरत होती है। कोरोना का एट-होम टेस्ट इसका आसान विकल्प है। ये प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की तरह होता है। इसमें सैंपल डालकर 15 से 20 मिनट में कोरोना का पता चल जाता है। इस टेस्ट किट के जरिए कोई भी व्यक्ति बिना किसी लैब या मेडिकल एक्सपर्...
क्या घर बैठे हो सकती है ओमिक्रॉन की जांच?

क्या घर बैठे हो सकती है ओमिक्रॉन की जांच?

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कोरोना वायरस की जांच केवल कोविड सेंटर में नहीं, बल्कि घर बैठे भी की जा सकती है। इसके लिए मार्केट में एट-होम कोरोना टेस्ट किट उपलब्ध हैं। फिलहाल ओमिक्रॉन के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दुनिया भर के एक्स्पर्ट्स इसके इस्तेमाल और एक्यूरेसी पर चर्चा कर रहे हैं। हाल ही में, अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दावा किया था कि एट-होम टेस्ट ओमिक्रॉन होने पर गलत रिजल्ट बता सकता है। क्या होता है एट-होम कोरोना वायरस टेस्ट? कोरोना टेस्ट करवाने के लिए रैपिड एंटीजन या RT-PCR या इसी तरह के दूसरे टेस्ट करवाने होते हैं। इन सभी टेस्ट के लिए मेडिकल एक्सपर्ट और लैब की जरूरत होती है। कोरोना का एट-होम टेस्ट इसका आसान विकल्प है। ये प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की तरह होता है। इसमें सैंपल डालकर 15 से 20 मिनट में कोरोना का पता चल जाता है। इस टेस्ट किट के जरिए कोई भी व्यक्ति बिना किसी लैब या मेडिकल एक्सपर्...
मेडिटेरेनियन डाइट को लगातार 5वें साल मिला दुनिया की बेस्ट डाइट का खिताब

मेडिटेरेनियन डाइट को लगातार 5वें साल मिला दुनिया की बेस्ट डाइट का खिताब

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
यूएस न्यूज एंड वर्ल्ड रिपोर्ट ने लगातार पांचवें साल मेडिटेरेनियन डाइट को दुनिया की बेस्ट डाइट का खिताब दिया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस डाइट को फॉलो करने के कई फायदे हैं। ये डायबिटीज, मेमोरी लॉस, ब्रेस्ट कैंसर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों से बचने में मदद करती है। साथ ही, तेजी से वजन घटाने और दिमाग को जवान रखने में भी मेडिटेरेनियन डाइट एक अहम भूमिका निभाती है। क्या होती है मेडिटेरेनियन डाइट? मेडिटेरेनियन डाइट एक प्लांट-बेस्ड डाइट होती है। इसका मतलब इस डाइट को फॉलो करने के दौरान फल और सब्जियों पर ज्यादा फोकस किया जाता है। इस डाइट में तरह-तरह के फल, सब्जियां, अनाज, नट्स और सीड्स शामिल किए जाते हैं। साथ ही, फैट के तौर पर एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑइल का इस्तेमाल किया जाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फिश को ज्यादा खाया जाता है।...
त्वचा, होंठ और नाखूनों के रंग बदलना भी हैं ओमिक्रॉन के लक्षण

त्वचा, होंठ और नाखूनों के रंग बदलना भी हैं ओमिक्रॉन के लक्षण

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दुनिया भर में ओमिक्रॉन की रफ्तार तेजी से बढ़ रही हैं। इस वैरिएंट की चपेट में आ रहे मरीज कई तरह के लक्षण रिपोर्ट कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना के प्रमुख लक्षणों के अलावा ऐसे भी कुछ लक्षण हैं, जिनके आने पर तुरंत कोविड टेस्ट करवा लेना चाहिए। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने हाल ही में चेतावनी दी है कि त्वचा, नाखून और होंठ के रंग में बदलाव होना ओमिक्रॉन के लक्षण हैं। हेल्थ एजेंसी के अनुसार, ऐसा होने पर कोरोना की जांच तुरंत करवानी चाहिए।...
कोवीशील्ड और कोवैक्सिन का कॉम्बो शरीर में बनाता है 4 गुना ज्यादा एंटीबॉडीज, ये पूरी तरह सुरक्षित

कोवीशील्ड और कोवैक्सिन का कॉम्बो शरीर में बनाता है 4 गुना ज्यादा एंटीबॉडीज, ये पूरी तरह सुरक्षित

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कोवीशील्ड और कोवैक्सिन का मिक्स 4 गुना ज्यादा एंटीबॉडीज बनाता है। यह दावा AIG हॉस्पिटल्स और एशियन हेल्थकेयर फाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने किया है। यानी किसी को कोवीशील्ड के दूसरे डोज की जगह कोवैक्सिन और कोवैक्सिन के दूसरे डोज की जगह कोवीशील्ड दे दी जाए, तो उसके शरीर में कोरोना के खिलाफ ज्यादा एंटीबॉडीज बनती हैं। रिसर्च में कहा गया है कि वैक्सीन्स को मिक्स एंड मैच करना पूरी तरह सुरक्षित है। इससे पहले अगस्त 2021 में ऐसी ही एक स्टडी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने की थी।...
पहली बार चूहों में म्यूटेट होकर इंसानों में ट्रांसफर हुआ था नया वैरिएंट

पहली बार चूहों में म्यूटेट होकर इंसानों में ट्रांसफर हुआ था नया वैरिएंट

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दुनिया भर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एक चौंकाने वाली रिसर्च सामने आई है। चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन चूहों में म्यूटेट होकर इंसानों तक पहुंचा है। ये रिसर्च साइंस डायरेक्ट जर्नल में प्रकाशित हुई है। जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के इस कॉन्सेप्ट को 'होस्ट जंपिंग' कहा जाता है। ऐसे हुए ओमिक्रॉन में म्यूटेशन्स ओमिक्रॉन की शुरुआती जांच में वैज्ञानिकों ने इस वैरिएंट में करीब 50 म्यूटेशन्स देखे थे। अकेले स्पाइक प्रोटीन में ही 32 म्यूटेशन्स मौजूद थे। स्पाइक प्रोटीन ही वायरस को हमारे शरीर के सेल्स (कोशिकाओं) के अंदर प्रवेश करवाता है। ओमिक्रॉन के तेजी से फैलते संक्रमण का कारण इसके म्यूटेशन्स को बताया जाता है। ऐसे में वैज्ञानिकों के मन में ये सवाल उठा कि आखिर ये ओमिक्रॉन आया कहां से? चूंकि इंसानों और मैमल्स (स्तनधारी जानवरों) के शरीर...
लो-ब्लड प्रेशर से जूझने वालों में भी स्ट्रोक का खतरा, 30 हजार मरीजों पर हुई रिसर्च में किया गया दावा

लो-ब्लड प्रेशर से जूझने वालों में भी स्ट्रोक का खतरा, 30 हजार मरीजों पर हुई रिसर्च में किया गया दावा

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ज्यादातर लोग जानते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर ही स्ट्रोक की बड़ी वजह बनता है, लेकिन हालिया रिसर्च में इसकी एक और वजह बताई गई है। नई रिसर्च कहती है, लो-ब्लड प्रेशर भी स्ट्रोक की वजह बनता है। यह दावा बॉस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता डॉ. ह्यूगो जे एप्रिशियो ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ता के मुताबिक, लो ब्लड प्रेशर से जूझने वाले 10 फीसदी मरीजों में स्ट्रोक का खतरा रहता है। ऐसे हुई रिसर्चलो-ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक के कनेक्शन को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने 30 हजार ऐसे बुजुर्गों पर अध्ययन किया जो इस्कीमिक स्ट्रोक से जूझ चुके थे। इनमें 18 महीने पहले स्ट्रोक का मामला आया था। शोधकर्ताओं का कहना है, इनका हेल्थ डाटा बताता है कि जो मरीज स्मोकिंग करते थे, हृदय रोगी थे या डिमेंशिया या कैंसर से जूझ रहे थे, उनमें स्ट्रोक का खतरा और भी ज्यादा था। रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ हाई...
माइग्रेन के मरीज हैं तो ये 10 फूड्स हैं आपके दुश्मन, इनसे दूर रहने में है आपकी भलाई

माइग्रेन के मरीज हैं तो ये 10 फूड्स हैं आपके दुश्मन, इनसे दूर रहने में है आपकी भलाई

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अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन के अनुसार, दुनिया में 100 करोड़ लोग माइग्रेन के शिकार हैं। यह एक प्रकार का सिर दर्द होता है, जिसमें व्यक्ति के सिर के आधे हिस्से में झनझनाहट होती है। यह दर्द कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक आपको परेशान कर सकता है। इस बीमारी को आनुवंशिक माना जाता है। माइग्रेन कई तरह की चीजों से ट्रिगर हो सकता है। इसमें तेज साउंड, फ्लैश लाइट, चिंता, स्मेल, दवाइयां आदि शामिल हैं। साथ ही, ऐसी कुछ खाने-पीने की चीजें भी होती हैं, जो माइग्रेन अटैक को बढ़ावा दे सकती हैं। ...
अमेरिका के टेक्सास में अचानक हुई मछलियों की बारिश, जानिए इस दुर्लभ घटना के पीछे की साइंस

अमेरिका के टेक्सास में अचानक हुई मछलियों की बारिश, जानिए इस दुर्लभ घटना के पीछे की साइंस

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
इस हफ्ते अमेरिका में एक अजीबो-गरीब घटना हुई है। पूर्वी टेक्सास के टेक्सरकाना शहर में अचानक आए तूफान के साथ मछलियों की बारिश हुई। इससे लोग हैरान रह गए। जब वे घरों से निकल कर सड़कों पर गए तो चारों तरफ मछलियां पड़ी हुई मिलीं। बाद में शहर के आधिकारिक फेसबुक पेज पर बताया गया कि यह कोई जादू नहीं था। इस दुर्लभ घटना को साइंस में 'एनिमल रेन' कहा जाता है। क्या होती है एनिमल रेन? एनिमल रेन का मतलब आसमान से जीवों का गिरना है। यह दुर्लभ घटना तब होती है, जब तालाब या झील जैसी जगहों के किसी हिस्से में बवंडर बनता है। अंग्रेजी में इसे वॉटर स्‍पाउट्स कहा जाता है। इस बवंडर में ऐसा साइक्लोन (चक्रवात) बनता है जो पानी के साथ-साथ उसमें मौजूद पौधों और छोटे जानवरों को भी खींच लेता है। जैसे-जैसे बवंडर शक्तिशाली बनता जाता है, वैसे-वैसे जानवरों को अपनी चपेट में लेता जाता है। इसके बाद ये तूफान के साथ जमीन की ओ...