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ओमिक्रॉन के ‘खतरनाक स्ट्रेन’ BA.1 ने बढ़ाई चिंता, डेल्टा को भी दे रहा है मात, वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट

ओमिक्रॉन के ‘खतरनाक स्ट्रेन’ BA.1 ने बढ़ाई चिंता, डेल्टा को भी दे रहा है मात, वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट

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नई दिल्ली दुनियाभर में इस समय कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का कहर जारी है। भारत में भी पिछले एक-दो हफ्तों से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक जहां रोजाना के आंकड़े 10 हजार से कम थे, वहीं अब पिछले दो दिनों से रोजाना 1.25 लाख से ज्यादा नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 1.79 लाख से अधिक नए संक्रमण के मामले सामने आए हैं, वहीं ओमिक्रॉन के मामले भी बढ़कर 4 हजार के आंकड़े को पार कर गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक देश में ओमिक्रॉन के साथ-साथ डेल्टा से संक्रमण के मामले भी देखे जा रहे हैं, ऐसे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। वहीं एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के कुछ हिस्सों में ओमिक्रॉन वैरिएंट का उपवंश BA.1 तेजी से बढ़ रहा है। महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में यह डेल्टा वैरिएंट की जगह लेता द...
तिल खाने के हैं ये फायदे, बीपी से लेकर शुगर तक सब रहता है नियंत्रित

तिल खाने के हैं ये फायदे, बीपी से लेकर शुगर तक सब रहता है नियंत्रित

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नई दिल्ली इस साल 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व है और 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। लोहड़ी और मकर संक्रांति दोनों ही पर्व में तिल और तिल से बने पकवान खाए जाते हैं। लोग तिल के लड्डू से लेकर गजक और तिल गुड़ की रेवड़ी का सेवन करते हैं। पर्व में तिल से बने पकवान के सेवन का शास्त्रों के अनुसार महत्व होता है लेकिन तिल में आयुर्वेद के गुण भी होते हैं तो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। तिल में पाए जाने वाले पोषक तत्व कई बीमारियों के खतरे से बचाते हैं। इनका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। ऐसे में तिल का सेवन धार्मिक महत्व और मान्यताओं के साथ ही आयुर्वेद में भी महत्वपूर्ण बताया गया है। लोहड़ी और मकर संक्रांति में तिल से बने पकवान का सेवन करने वाले हैं तो जान लीजिए कि तिल खाने के क्या फायदे हैं ताकि केवल त्योहार ही नहीं अन्य दिनों में भी आप तिल का सेवन कर सकें। ...
योगासनों को बनाना चाहते हैं जीवन का हिस्सा? इन आसनों के साथ कर सकते हैं शुरुआत

योगासनों को बनाना चाहते हैं जीवन का हिस्सा? इन आसनों के साथ कर सकते हैं शुरुआत

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नई दिल्ली  भारत में हजारों सालों से योगासनों का अभ्यास कई तरह के स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता रहा है। हाल के कुछ वर्षों में पश्चिमी देशों में भी योग की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। अध्ययनों से पता चलता है कि योग का नियमित रूप से अभ्यास करके कई तरह के स्वास्थ्य लाभ पाए जा सकते हैं। शरीर को मजबूत बनाने और मन को शांत करने के लिए योग का अभ्यास करना बेहतर विकल्प हो सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि योग का अभ्यास घर पर भी बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, किसी भी उम्र के लोग योग का अभ्यास कर सकते हैं। इसको शुरू करने की भी कोई उम्र नहीं है। यदि आप योग की शुरुआत करने की सोच रहे हैं तो यकीन मानिए अब भी देर नहीं हुई है। कुछ हल्के स्तर के योगाभ्यासों के साथ इसकी शुरुआत की जा सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि किन योगासनों के साथ योग की शुरुआत करके आप त...
संक्रमण से बचाने में इस तरह के मास्क हैं ‘फेल’

संक्रमण से बचाने में इस तरह के मास्क हैं ‘फेल’

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नई दिल्ली  कोरोना संक्रमण के दुनियाभर में बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी लोगों से लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहने की अपील की जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग और हैंड हाइजीन का ध्यान रखकर कोरोना के खतरे से बचाव किया जा सकता है। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हम सामान्यतौर पर जिस तरह का मास्क पहन रहे हैं, वह संक्रमण से सुरक्षित रखने में कारगर नहीं हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मास्क हमेशा टाइट और नाक-मुंह को अच्छे से कवर करने वाले होने चाहिए, इसके अलावा मास्क किस फेब्रिक से बना हुआ है, यह भी एक बड़ा विषय है जिसको लेकर लोगों को जागरूकता बरतने की आवश्यकता है। देश में कोविड की दूसरी लहर के दौरान एन-95 मास्क की कमी के चलते कपड़े और सर्जिकल मास्क का चलन तेजी से बढ़ा। पर क्या कपड़े से बने मास्क आपको क...
ये 5 लक्षण बताते हैं दोनों वैरिएंट्स के बीच का अंतर

ये 5 लक्षण बताते हैं दोनों वैरिएंट्स के बीच का अंतर

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भारत में ओमिक्रॉन के चलते कोरोना वायरस की तीसरी लहर आ गई है। देश में लगातार दो दिन से नए संक्रमितों का आंकड़ा एक लाख के पार जा रहा है। ओमिक्रॉन के अधिकतर मरीजों में संक्रमण के माइल्ड या कोई भी लक्षण देखने को नहीं मिल रहे। फिर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' यानी एक चिंताजनक वैरिएंट घोषित किया है। इससे पहले भारत में दूसरी लहर के जिम्मेदार डेल्टा वैरिएंट को भी 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' घोषित किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट ज्यादा गंभीर नहीं है। फिर भी इससे भविष्य में होने वाली शारीरिक समस्याओं से बचने के लिए सतर्क रहना जरूरी है। वैसे तो दोनों ही वैरिएंट्स के अधिकतर लक्षण फ्लू जैसे ही होते हैं, लेकिन दोनों में कुछ ऐसी विशेषताएं हैं, जिनसे इनके बीच के अंतर को किया जा सकता है। ऐसे लक्षण जो डेल्टा और ओमिक्रॉन में अंतर बताते है...
क्या कोरोना से रिकवर होने के बाद भी हो सकता है ओमिक्रॉन का संक्रमण?

क्या कोरोना से रिकवर होने के बाद भी हो सकता है ओमिक्रॉन का संक्रमण?

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पिछले 24 घंटों में पूरी दुनिया में 26.96 लाख नए कोरोना केस मिले हैं। ये मामले ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण आई लहर के कारण बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ओमिक्रॉन पहले ही कोविड से रिकवर हो चुके मरीजों को भी अपनी चपेट में लेता है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इसका जवाब हां है। WHO का कहना है कि कोरोना रिकवरी के बाद भी ओमिक्रॉन से दोबारा इन्फेक्शन होने का खतरा होता है। ये वैरिएंट हमारे इम्यून सिस्टम को बहुत आसानी से चकमा दे सकता है। यानी अगर आपको पिछले दो सालों में कोरोना हुआ है, तो भी आपके ओमिक्रॉन से संक्रमित होने की पूरी संभावना है।...
1918 में आई फ्लू महामारी की तरह है ओमिक्रॉन की लहर, उस समय भी मास्क और लॉकडाउन था जरूरी

1918 में आई फ्लू महामारी की तरह है ओमिक्रॉन की लहर, उस समय भी मास्क और लॉकडाउन था जरूरी

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दुनिया में ओमिक्रॉन वैरिएंट से आई लहर 1918 में आई फ्लू महामारी से काफी मिलती-जुलती है। एक सदी पहले भी लोग मास्क पहनकर घर से बाहर निकलते थे और आज एक सदी बाद भी यही देखने को मिल रहा है। अमेरिका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर क्रिस्टोफर मैकनाइट निकोल्स की मानें तो ओमिक्रॉन की तरह 1918 फ्लू ने भी युवाओं और सेहतमंद लोगों को सबसे पहले अपनी चपेट में लिया था। 1918 में भी लोगों ने दिखाई थी लापरवाही द वॉशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एक लेख में निकोल्स ने लिखा है कि फरवरी 1918 में आया फ्लू पहले विश्व युद्ध के कारण अमेरिका से पूरी दुनिया में फैल गया था। यह भी हवा से फैलने वाली बीमारी थी। इसके संक्रमण को दुनिया भर में फैलने में सिर्फ 6 महीने लगे थे। हालांकि ओमिक्रॉन की तरह इस फ्लू की मृत्यु दर भी कम थी।...
कोरोना से जल्दी रिकवर होना है तो करें इन 5 टिप्स को फॉलो, इनसे भविष्य में लॉन्ग कोविड होने का खतरा होगा कम

कोरोना से जल्दी रिकवर होना है तो करें इन 5 टिप्स को फॉलो, इनसे भविष्य में लॉन्ग कोविड होने का खतरा होगा कम

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ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण दुनिया भर में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 24 घंटे में दुनिया के 6 देशों में एक लाख से ज्यादा कोरोना केस दर्ज किए गए हैं। वहीं, बीते दिन पूरी दुनिया में 24 लाख से ज्यादा नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। ऐसे में कोरोना से जल्दी रिकवर होने के तरीकों के बारे में हम सभी को जानकारी होनी चाहिए। साथ ही, भविष्य में लॉन्ग कोविड के खतरे को कम करने के लिए भी इन 5 टिप्स को फॉलो करना जरूरी है। 1. शरीर को रखें हाइड्रेट कोरोना से जल्दी रिकवर होना है तो पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक रॉबर्ट बूय कहते हैं कि हाइड्रेट रहने से शरीर को कोरोना से रिकवर होने में मदद मिलती है। इससे बॉडी की फंक्शनिंग सही तरह से होती है। 2. बेड रेस्ट लेना जरूरी किसी भी बीमारी से रिकवर होने के लिए अच्छी तरह आराम करना जरूरी होता है। कोरोना के बाद डॉक्टर ये सला...
मछलियों के लिए बनी अनोखी कार:पानी में तैरने वाली गोल्ड फिश ने सड़क पर चलाई कार, इजराइली वैज्ञानिकों का अद्भुत करिश्मा

मछलियों के लिए बनी अनोखी कार:पानी में तैरने वाली गोल्ड फिश ने सड़क पर चलाई कार, इजराइली वैज्ञानिकों का अद्भुत करिश्मा

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इजरायल की बेन-गुरियॉन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अनोखी कार बनाई है, जिसे पानी में तैरने वाली मछलियां जमीन पर चला सकती हैं। दरअसल, इस कार के जरिए वैज्ञानिक ये साबित करना चाहते थे कि मछलियां विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी दिशा नहीं भूलतीं। वे किसी भी स्थिति में अपने टारगेट को पहचान लेती हैं। इस प्रयोग में गोल्ड फिश ने सड़क पर कार चलाई और सफलता के साथ अपने टारगेट तक पहुंचीं। इससे पहले 2014 में नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने भी मछलियों के लिए कार बनाई थी। हालांकि, ये प्रोजेक्ट कंप्यूटर की संभावनाओं को प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किया गया था। ऐसे डेवलप की गई मछलियों के लिए कार वैज्ञानिकों ने एक खास तरह की रोबोटिक कार बनाई। इस कार पर एक पानी का टैंक फिट किया गया जिसमें गोल्ड फिश रखी गई। मछली के मुंह की दिशा समझने के लिए एक कंप्यूटर संचालित डिवाइस लगाया गया। इस डिवाइस के ठीक नी...
2019 में एयर पॉल्यूशन से हुईं 18 लाख ज्यादा मौतें, 20 लाख बच्चे भी हुए अस्थमा के शिकार

2019 में एयर पॉल्यूशन से हुईं 18 लाख ज्यादा मौतें, 20 लाख बच्चे भी हुए अस्थमा के शिकार

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द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित हुई एक नई रिसर्च के अनुसार, दुनिया भर के शहरों में रह रहे करीब 250 करोड़ लोग वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। यही कारण है कि साल 2019 में इन शहरों में 18 लाख ज्यादा मौतें हुई थीं। लैंसेट की ही एक दूसरी स्टडी में वैज्ञानिकों ने माना है कि 2019 में वायु प्रदूषण से 20 लाख से ज्यादा बच्चे अस्थमा की बीमारी के शिकार भी हुए। विश्व की 55% से ज्यादा आबादी शहरों में रहती है, जहां वायु प्रदूषण एक आम समस्या है।...