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अमेरिकी ऊंट ‘लामा’ से कोरोना को मात देने की तैयारी:लामा के शरीर में बनने वाली नैनोबॉडीज कोरोना पीड़ित की नाक में स्प्रे करके वायरस को मात देंगे वैज्ञानिक, ये अल्फा-बीटा वैरिएंट्स पर भी असरदार

अमेरिकी ऊंट ‘लामा’ से कोरोना को मात देने की तैयारी:लामा के शरीर में बनने वाली नैनोबॉडीज कोरोना पीड़ित की नाक में स्प्रे करके वायरस को मात देंगे वैज्ञानिक, ये अल्फा-बीटा वैरिएंट्स पर भी असरदार

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दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले लामा यानी ऊंट के शरीर में बनने वाली नैनोबॉडीज कोरोना से लड़ने में इंसान की मदद कर सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, नैनोबॉडीज प्रोटीन के मिलकर बनी होती हैं। वायरस से लड़ने वाले इस प्रोटीन को कोरोना पीड़ितों की नाक में स्प्रे के रूप में दिया जा सकता है। ये नैनोबॉडीज एक तरह की एंटीबॉडीज ही हैं। रिसर्च करने वाले ऑक्सफोर्डशायर के रोजालिंड फ्रैंकलिन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन अमेरिकी ऊंट में बनने वाली नैनोबॉडीज कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट्स से लड़ सकती हैं। कोरोना से संक्रमित जानवरों में ये नैनोबॉडीज देने पर उनके लक्षणों में कमी आई। इन नैनोबॉडीज को लैब में बड़े स्तर पर तैयार किया जा सकता है, जो इंसानों के लिए ह्यूमन एंटीबॉडीज का सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने वाला एक विकल्प साबित हो सकती हैं। अमेरिकी ऊंट लामा को फिफी भी कहते हैं। प्रयोग क...
मायोपिया रोकने वाला स्मार्ट चश्मा:चीनी वैज्ञानिकों ने मायोपिया के बढ़ते असर को धीमा करने वाला स्मार्ट चश्मा बनाया, दूर की चीजें देखना हुआ आसान; दो साल में 67% घटा बीमारी का असर

मायोपिया रोकने वाला स्मार्ट चश्मा:चीनी वैज्ञानिकों ने मायोपिया के बढ़ते असर को धीमा करने वाला स्मार्ट चश्मा बनाया, दूर की चीजें देखना हुआ आसान; दो साल में 67% घटा बीमारी का असर

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वैज्ञानिकों ने ऐसा स्मार्ट चश्मा विकसित किया है जो आंखों की बीमारी मायोपिया के असर को कम करता है। मायोपिया होने पर मरीज को दूर की चीजें साफ नहीं दिखाई देतीं। जैसे- 2 मीटर दूरी पर रखी चीज मरीज को धुंधली दिखती है। यह चश्मा कितना असर करता है, इस पर रिसर्च भी की गई है। चीन की वेंझाउ मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 167 बच्चों को यह चश्मा पहनाकर अध्ययन किया। बच्चों को दिन में 12 घंटे तक यह चश्मा पहनने को कहा गया। 2 साल तक ऐसा करने के बाद मायोपिया का असर 67 फीसदी तक कम हो गया। मायोपिया होने पर आंखें में क्या बदलाव होता है, चश्मा कैसे काम करता है और देश में ऐसे मरीजों की क्या स्थिति है, जानिए इन सवालों के जवाब मायोपिया होने पर होता क्या है?आसान भाषा में समझें तो आंखों का आईबॉल उम्र के साथ चारों तरफ गोलाई में बढ़ता है। मायोपिया के मरीजों का आईबॉल उम्र के साथ चौड़ा होने लगता है। इससे विजन तैयार करने ...
इंजेक्शन का डर खत्म करने की कोशिश:पौधा खाते ही शरीर में पहुंचेगी कोरोना की वैक्सीन, अमेरिकी वैज्ञानिक डेवलप कर रहे है ऐसा प्लांट

इंजेक्शन का डर खत्म करने की कोशिश:पौधा खाते ही शरीर में पहुंचेगी कोरोना की वैक्सीन, अमेरिकी वैज्ञानिक डेवलप कर रहे है ऐसा प्लांट

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कैलिफोर्निया वैक्सीन का नाम सुनते ही कई लोगों को इंजेक्शन का डर सताने लगता है। अमेरिका के वैज्ञानिक इसी डर को खत्म करने की कोशिश में जुटे हैं। वो ऐसा पौधा विकसित कर रहे हैं जिसे खाने के बाद इंसान में वैक्सीन पहुंच जाएगी। इसकी शुरुआत कोविड वैक्सीन से की जाएगी। आसान भाषा में समझें तो लोगों को पौधा खिलाकर कोविड की वैक्सीन दी जाएगी। वैक्सीन वाले पौधे को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया रिवरसाइड के शोधकर्ता विकसित कर रहे हैं। पौधे की मदद से कोरोना की mRNA वैक्सीन को इंसान में पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। पौधों में कैसे पहुंचेगी वैक्सीन, कैसे इसमें स्टोर होगी, वैक्सीन के इस नए तरीके के क्या फायदे होंगे और कितना कुछ बदलेगा, जानिए इन सवालों के जवाब.... सबसे पहले जानिए, कैसे काम करती है mRNA टेक्नोलॉजी से तैयार कोविड वैक्सीनफाइजर और मॉडर्ना ने अपनी वैक्सीन को तैयार करने में mRNA ...
देश के नाम उपलब्धि:केरल के केवलम और पुडुचेरी के ईडन बीच को मिला ‘ब्लू फ्लैग’ का सर्टिफिकेट, देश में ऐसे समुद्रतटों की संख्या बढ़कर 10 हुई; जानिए इसके मायने

देश के नाम उपलब्धि:केरल के केवलम और पुडुचेरी के ईडन बीच को मिला ‘ब्लू फ्लैग’ का सर्टिफिकेट, देश में ऐसे समुद्रतटों की संख्या बढ़कर 10 हुई; जानिए इसके मायने

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देश के दो समुद्रतटों को 'ब्लू फ्लैग' सर्टिफिकेट मिला है। इनमें केरल का कोवलम और पुडुचेरी का ईडन बीच शामिल है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की है। अब तक भारत में ब्लू फ्लैग पाने वाले बीचों की संख्या 10 हो गई है। देश में 8 समुद्रतटों को पिछले साल 'ब्लू फ्लैग' सर्टिफिकेट मिला था। क्या है ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेट, अब तक देश के किन समुद्रतटों को मिला यह सर्टिफिकेट और देश के लिए इस उपलब्धि के मायने क्या हैं, जानिए इन सवालों के जवाब... क्या है 'ब्लू फ्लैग' सर्टिफिकेट?डेनमार्क की संस्था फाउंडेशन फॉर एनवायर्नमेंट एजुकेशन (FEE) समुद्रतटों को 'ब्लू फ्लैग' सर्टिफिकेट देने का काम करती है। यह एक तरह का इको-लेबल है और दुनियाभर में इसे मान्यता प्राप्त है। यह सर्टिफिकेट पाने वाले समुद्रतटों को कई स्तर पर जांचा-परखा जाता है, इसके बाद ही सर्टिफिकेट दिया है। कैसे ज...
प्रोस्टेट कैंसर अवेयरनेस मंथ:पेशाब करते समय तेज दर्द या इसमें खून आना भी है प्रोस्टेट कैंसर का लक्षण, पुरुषों में होने वाले इस कैंसर के सबसे ज्यादा मामले बड़े शहरों में

प्रोस्टेट कैंसर अवेयरनेस मंथ:पेशाब करते समय तेज दर्द या इसमें खून आना भी है प्रोस्टेट कैंसर का लक्षण, पुरुषों में होने वाले इस कैंसर के सबसे ज्यादा मामले बड़े शहरों में

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प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला कैंसर है। देश में इसके सबसे ज्यादा मामले दिल्ली, कोलकाता, पुणे, तिरूवनंपुरम, बेंगलुरू और मुंबई जैसे बड़े शहरों में देखे गए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आमतौर प्रोस्टेट कैंसर के मामले 50 साल की उम्र के बाद लोगों में दिखते थे, लेकिन वर्तमान में यह 35 से 45 आयु वर्ग के लोगों में भी डिटेक्ट हो रहे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं, इसके मामले बढ़ने की दो वजह हैं, पहला- इसके लक्षणों का देरी से दिखना। दूसरा, देरी से दिखने वाले लक्षणों को नजरअंदाज किया जाना क्योंकि इसके लक्षण दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। इसलिए मरीज में पनपते कैंसर के लक्षण वो समझ नहीं पाता। शरीर में किसी भी तरह के लक्षण या बदलाव दिखने पर एक बार एक्सपर्ट से जरूर राय लें। शरीर में छोटा सा बदलाव बड़ी बीमारी का इशारा भी हो सकता है। सितम्बर को प्रोस्टेट कैंसर अवेयरनसे मंथ के तौर पर मनाया जाता है,...
इंजेक्शन का डर खत्म करने की कोशिश:पौधा खाते ही शरीर में पहुंचेगी कोविड की वैक्सीन, अमेरिकी वैज्ञानिक विकसित कर रहे है ऐसा पौधा; जानिए इस वैक्सीन से कितना कुछ बदल जाएगा

इंजेक्शन का डर खत्म करने की कोशिश:पौधा खाते ही शरीर में पहुंचेगी कोविड की वैक्सीन, अमेरिकी वैज्ञानिक विकसित कर रहे है ऐसा पौधा; जानिए इस वैक्सीन से कितना कुछ बदल जाएगा

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वैक्सीन का नाम सुनते ही कई लोगों को सुई का डर सताने लगता है। अमेरिका के वैज्ञानिक इसी डर को खत्म करने की कोशिश में जुटे हैं। वो ऐसा पौधा विकसित कर रहे हैं जिसे खाने के बाद इंसान में वैक्सीन पहुंच जाएगी। इसकी शुरुआत कोविड वैक्सीन से की जाएगी। आसान भाषा में समझें तो लोगों को पौधा खिलाकर कोविड की वैक्सीन दी जाएगी। वैक्सीन वाले पौधे को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया रिवरसाइड के शोधकर्ता विकसित कर रहे हैं। पौधे की मदद से कोरोना की mRNA वैक्सीन को इंसान में पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। पौधों में कैसे पहुंचेगी वैक्सीन, कैसे इसमें स्टोर होगी, वैक्सीन के इस नए तरीके के क्या फायदे होंगे और कितना कुछ बदलेगा, जानिए इन सवालों के जवाब.... सबसे पहले जानिए, कैसे काम करती है mRNA टेक्नोलॉजी से तैयार कोविड वैक्सीन फाइजर और मॉडर्ना ने अपनी वैक्सीन को तैयार करने में mRNA तकनीक का इस्तेमाल कि...
ग्लोबल वार्मिंग का असर घटाने वाला पेंट:अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बनाया दुनिया का सबसे सफेद पेंट, यह 95.5% तक सूरज की किरणों को परावर्तित कर देता है और कमरा गर्म नहीं होने देता

ग्लोबल वार्मिंग का असर घटाने वाला पेंट:अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बनाया दुनिया का सबसे सफेद पेंट, यह 95.5% तक सूरज की किरणों को परावर्तित कर देता है और कमरा गर्म नहीं होने देता

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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे सफेद पेंट बनाया है। इसी खूबी के कारण इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इसे तैयार करने वाले पड्रूयू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जिउलिन रुआन का कहना है, यह पेंट ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में कारगर साबित हो सकता है। यह पेंट इतना सफेद है कि इससे रंगी हुई दीवार पर पड़ने वाली सूरज की किरणों को 95.5 फीसदी रिफ्लेक्ट यानी परावर्तित कर देता हैँ। ऐसे कमरे को कर सकेंगे ठंडाइसे तैयार करने वाले शोधकर्ताओं के समूह का कहना है, इस पेंट को बिल्डिंग की छत और उसके किनारे की दीवारों पर पेंट कर सकते हैं। यह पेंट दीवारों के अंदरूनी हिस्सों को प्राकृतिक तौर पर ठंडा रखेगा। रिसर्च के मुताबिक, सूरज की सबसे ज्यादा तेज किरणें किसी भी बिल्डिंग या घर की छत पर पड़ती हैं। यह पेंट इन किरणों को परावर्तित कर देगा। ऐसा होने पर महंगे एयरकंडीशनर की जरूरत नहीं पड़ेगी। एयर ...
ऐसी बीमारी जिसका कोई नाम ही नहीं:अजीबोगरीब बीमारी से जूझ रहा 6 माह का बच्चा, न रो सकता है और न ठीक से सांस ले सकता है, इस दुर्लभ बीमारी से डॉक्टर्स भी हैरान

ऐसी बीमारी जिसका कोई नाम ही नहीं:अजीबोगरीब बीमारी से जूझ रहा 6 माह का बच्चा, न रो सकता है और न ठीक से सांस ले सकता है, इस दुर्लभ बीमारी से डॉक्टर्स भी हैरान

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कनाडा में 6 माह का बच्चा लियो एक ऐसी बीमारी से जूझ रहा है, जिसका डॉक्टर्स के पास भी कोई नाम नहीं है। लियो न रो सकता है और न ही ठीक से सांस ले सकता है। डॉक्टर्स भी उसकी बीमारी से हैरान हैं। लियो की 32 वर्षीय मां लुसिंडा एंड्रयू डॉक्टर्स से बच्चे के इलाज और बीमारी पर रिसर्च करने के लिए मिन्नते कर रही हैं। जन्म के बाद शरीर में बंद हुआ मूवमेंटलुसिंडा ने 5 मार्च को कनाडा के मेडवे मैरिटाइम हॉस्पिटल में नॉर्मल डिलीवरी के जरिए लियो को जन्म दिया था। जन्म के बाद डॉक्टर्स ने देखा कि बच्चा हिल तक नहीं पा रहा है। बच्चे की जांच की गई। रिपोर्ट में सामने आया कि लियो एक ऐसी जेनेटिक कंडिशन से जूझ रहा है जिसमें TBCD जीन की प्रोटीन कोडिंग पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे मामले दुर्लभ होती हैं। अब तक इस बीमारी को डॉक्टर्स कोई नाम नहीं दे पाए हैं। लुसिंडा कहती हैं, वह चाहती हैं कि डॉक्टर्स इस रहस्यमय बीमारी प...
कैंसर के खिलाफ लंदन में 900 मरीजों पर ट्रायल शुरू:प्रोस्टेट कैंसर का एक हफ्ते में होगा इलाज, रेडिएशन की 2 हाई डोज से ट्यूमर खत्म करेंगे एक्सपर्ट; जानिए डॉक्टर्स कैसे करेंगे मरीजों का इलाज

कैंसर के खिलाफ लंदन में 900 मरीजों पर ट्रायल शुरू:प्रोस्टेट कैंसर का एक हफ्ते में होगा इलाज, रेडिएशन की 2 हाई डोज से ट्यूमर खत्म करेंगे एक्सपर्ट; जानिए डॉक्टर्स कैसे करेंगे मरीजों का इलाज

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प्रोस्टेट कैंसर के मरीज हाई डोज वाली टार्गेटेड रेडियोथैरेपी से एक हफ्ते में ठीक हो सकेंगे। लंदन रॉयल मार्सडेन हॉस्पिटल के एक्सपर्ट्स ने ऐसे मरीजों को एक हफ्ते में ठीक करने के लिए ट्रायल शुरू किया है। ट्रायल के दौरान यह देखा जाएगा कि लो-डोज वाली रेडियोथेरेपी के कई डोज के मुकाबले इसके 2 बड़े हाई डोज कितना काम करते हैं। रिसर्च क्यों और कैसे शुरू हुई, इसे समझेंप्रोस्टेट कैंसर के मरीजों को रेडियोथैरेपी दी जाती है यानी उन्हें एक तरह रेडिएशन दिया जाता है। इससे कैंसर वाले ट्यूमर को खत्म किया जाता है। कई छोटे-छोटे सेशंस में मरीजों को रेडिएशन दिया जाता है। लंदन के वैज्ञानिकों ने ऐसे मरीजों को कई सेशंस की जगह दो हाई लेवल वाले डोज देने की सोची, ताकि महीने तक चलने वाला इलाज एक हफ्ते में किया जा सके। ब्रिटेन में NHS फाउंडेशन ट्रस्ट और द इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च ने मिलकर रेडिएशन के जरिए प्रोस्टे...
वजन घटाएगी हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग:तेज दौड़ने पर तेजी से घटता है कमर का फैट और हार्ट अटैक का खतरा, दौडते समय हार्ट रेट 80 फीसदी से ज्यादा न होने दें

वजन घटाएगी हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग:तेज दौड़ने पर तेजी से घटता है कमर का फैट और हार्ट अटैक का खतरा, दौडते समय हार्ट रेट 80 फीसदी से ज्यादा न होने दें

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कमर के पास अतिरिक्त चर्बी हृदयरोग, डायबिटीज और कुछ खास तरह के कैंसर का कारण है। द ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के मुताबिक, हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग से इस चर्बी को 29% अधिक घटाया जा सकता है। मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के प्रो. मार्टिन गिबाला बताते हैं, इसके लिए 20 मीटर की 8 से 10 बार तेज दौड़ लगा ली जाए तो इसे तेजी से घटा सकते हैं। जानिए, दौड़ लगाने के लिए आपको कौन सी बातें ध्यान में रखनी जरूरी हैं... सही रनिंग के लिए ये तीन स्टेप फॉलो करना जरूरी1. 15 मिनट का वार्म-अप जरूर करें: तेज दौड़ शुरू करने से पहले लगभग 10 से 15 मिनट तक वार्मअप जरूर करें। इसके लिए जॉगिंग कर सकते हैं या फिर फील्ड में धीमी गति से कुछ चक्कर लगा सकते हैं। इससे क्रैम्प आने की आशंका कम होती है। शरीर में हल्का पसीना आ जाएगा। 2. दौड़ने का सही तरीका समझें: दौड़ते समय ध्यान रखें कि जमीन पर पहले पंजे टच...