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जीवाश्म से नई चिड़िया की खोज:12 करोड़ साल पहले मोर की तरह दिखने वाली चिड़िया अब खोजी गई, यह शरीर से 150 गुना लम्बी पूंछ से नर चिड़िया को रिझाती थी

जीवाश्म से नई चिड़िया की खोज:12 करोड़ साल पहले मोर की तरह दिखने वाली चिड़िया अब खोजी गई, यह शरीर से 150 गुना लम्बी पूंछ से नर चिड़िया को रिझाती थी

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वैज्ञानिकों ने 12 करोड़ साल पहले मोर की तरह दिखने वाली चिड़िया की नई प्रजाति की खोजी है। इसका नाम युआनचुआविस कॉम्प्सोसोरा है। इस चिड़िया की खोज अमेरिका और चीन के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है। वैज्ञानिकों का कहना है, इस 12 करोड़ साल पुरानी चिड़िया के अवशेष मिले हैं। अवशेष को देखकर पता चलता है कि इस चिड़िया के पंख और पूंछ इसकी खूबसूरती का अहम हिस्सा रहे हैं। यह अपनी लम्बी पूंछ का इस्तेमाल नर चिड़िया को मेटिंग के लिए आकर्षित करने में करती थी। चीन के 'जुरासिक पार्क' में मिले जीवाश्मइस चिड़िया के जीवाश्म चीन के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से के जहोल बायोटा में मिले हैं। इस हिस्से को चीन का जुरासिक पार्क कहा जाता है। चौंकाने वाली बात है कि जीवाश्म में 12 करोड़ साल पुरानी चिड़िया के पंख साफ देखे जा सकते हैं। शरीर से 150 गुना लम्बी पूंछयुआनचुआविस कॉम्प्सोसोरा एक छोटी चिड़िया थी, लेकिन इसकी पूंछ शरीर...
वजन घटाएगी हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग:तेज दौड़ने पर तेजी से घटता है कमर का फैट और हार्ट अटैक का खतरा, दौडते समय हार्ट रेट 80 फीसदी से ज्यादा न होने दें

वजन घटाएगी हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग:तेज दौड़ने पर तेजी से घटता है कमर का फैट और हार्ट अटैक का खतरा, दौडते समय हार्ट रेट 80 फीसदी से ज्यादा न होने दें

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कमर के पास अतिरिक्त चर्बी हृदयरोग, डायबिटीज और कुछ खास तरह के कैंसर का कारण है। द ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के मुताबिक, हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग से इस चर्बी को 29% अधिक घटाया जा सकता है। मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के प्रो. मार्टिन गिबाला बताते हैं, इसके लिए 20 मीटर की 8 से 10 बार तेज दौड़ लगा ली जाए तो इसे तेजी से घटा सकते हैं। जानिए, दौड़ लगाने के लिए आपको कौन सी बातें ध्यान में रखनी जरूरी हैं... सही रनिंग के लिए ये तीन स्टेप फॉलो करना जरूरी1. 15 मिनट का वार्म-अप जरूर करें: तेज दौड़ शुरू करने से पहले लगभग 10 से 15 मिनट तक वार्मअप जरूर करें। इसके लिए जॉगिंग कर सकते हैं या फिर फील्ड में धीमी गति से कुछ चक्कर लगा सकते हैं। इससे क्रैम्प आने की आशंका कम होती है। शरीर में हल्का पसीना आ जाएगा। 2. दौड़ने का सही तरीका समझें: दौड़ते समय ध्यान रखें कि जमीन पर पहले पंजे टच...
जीवाश्म से नई चिड़िया की खोज:12 करोड़ साल पहले मोर की तरह दिखने वाली चिड़िया अब खोजी गई, यह शरीर से 150 गुना लम्बी पूंछ से नर चिड़िया को रिझाती थी

जीवाश्म से नई चिड़िया की खोज:12 करोड़ साल पहले मोर की तरह दिखने वाली चिड़िया अब खोजी गई, यह शरीर से 150 गुना लम्बी पूंछ से नर चिड़िया को रिझाती थी

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वैज्ञानिकों ने 12 करोड़ साल पहले मोर की तरह दिखने वाली चिड़िया की नई प्रजाति की खोजी है। इसका नाम युआनचुआविस कॉम्प्सोसोरा है। इस चिड़िया की खोज अमेरिका और चीन के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है। वैज्ञानिकों का कहना है, इस 12 करोड़ साल पुरानी चिड़िया के अवशेष मिले हैं। अवशेष को देखकर पता चलता है कि इस चिड़िया के पंख और पूंछ इसकी खूबसूरती का अहम हिस्सा रहे हैं। यह अपनी लम्बी पूंछ का इस्तेमाल नर चिड़िया को मेटिंग के लिए आकर्षित करने में करती थी। चीन के 'जुरासिक पार्क' में मिले जीवाश्मइस चिड़िया के जीवाश्म चीन के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से के जहोल बायोटा में मिले हैं। इस हिस्से को चीन का जुरासिक पार्क कहा जाता है। चौंकाने वाली बात है कि जीवाश्म में 12 करोड़ साल पुरानी चिड़िया के पंख साफ देखे जा सकते हैं। शरीर से 150 गुना लम्बी पूंछयुआनचुआविस कॉम्प्सोसोरा एक छोटी चिड़िया थी, लेकिन इसकी पूंछ शरीर...
चावल के शौकीनों को अलर्ट करने वाली रिसर्च:हड़बड़ी में बनाए गए चावल खाने से हो सकता है कैंसर, इंग्लैंड के वैज्ञानिकों की रिसर्च; जानिए कब और कैसे बढ़ता है कैंसर का खतरा

चावल के शौकीनों को अलर्ट करने वाली रिसर्च:हड़बड़ी में बनाए गए चावल खाने से हो सकता है कैंसर, इंग्लैंड के वैज्ञानिकों की रिसर्च; जानिए कब और कैसे बढ़ता है कैंसर का खतरा

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अगर आप चावल के शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए है। इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने चावल से कैंसर होने का खतरा जताया है। वैज्ञानिकों का कहना है, मिट्टी में पहुंचने वाले कीटनाशक और जहरीले केमिकल चावल खाने वालों के लिए नया खतरा पैदा कर रहे हैं। मिट्टी के जरिए चावल में पहुंचने वाला आर्सेनिक तत्व कैंसर और हृदय रोगों का खतरा बढ़ाता है। वैज्ञानिकों का कहना है, अधपके या देर तक पानी में न भीगे चावल खाने से कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसे हड़बड़ी में तैयार करने से बचें। चावल से बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ रहा है, इसे कैसे कम कर सकते हैं और भारतीय लोगों को क्यों अलर्ट करने की जरूरत है, जानिए, इन सभी सवालों के जवाब..... यह खतरा क्यों बढ़ रहा है?वैज्ञानिकों का कहना है, खतरे की सबसे बड़ी वजह है आर्सेनिक। इसके दो कारण है। पहला, यह लगभग हर पेस्टिसाइड्स और इसेक्टिसाइड्स में पाया जाता है। खेती-किसानी में इनका ...
राहत देने वाली रिसर्च:कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा ‘स्टेटिंस’ से हो सकेगा अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज, यह आंतों की सूजन घटाने के साथ सर्जरी का खतरा कम करती है

राहत देने वाली रिसर्च:कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा ‘स्टेटिंस’ से हो सकेगा अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज, यह आंतों की सूजन घटाने के साथ सर्जरी का खतरा कम करती है

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कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली सस्ती और असरदार दवा 'स्टेटिंस' से आंतों की बीमारी अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज भी किया जा सकता है। इस दवा के जरिए अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों में कमी लाई जा सकती है। यह दावा कैलिफोर्निया की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली दवा अल्सरेटिव कोलाइटिस के मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने रोकती है और सर्जरी का खतरा घटाती है। हालांकि अब तक ये साफ नहीं हो पाया है कि यह दवा कैसे हालत सुधारती है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आंतों की सूजन को बढ़ने से रोकती है। क्या है अल्सरेटिव कोलाइटिसअल्सरेटिव कोलाइटिस आंतों की समस्या है, जिसमें बड़ी आंत में सूजन और जलन की शिकायत होती है। इस बीमारी में कोलन में छाले हो जाते हैं और उस हिस्से में सूजन रहती है। अगर समय रहते इस बीमारी के लक्षणों को पहच...
राहत देने वाली रिसर्च:कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा ‘स्टेटिंस’ से हो सकेगा अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज, यह आंतों की सूजन घटाने के साथ सर्जरी का खतरा कम करती है

राहत देने वाली रिसर्च:कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा ‘स्टेटिंस’ से हो सकेगा अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज, यह आंतों की सूजन घटाने के साथ सर्जरी का खतरा कम करती है

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कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली सस्ती और असरदार दवा 'स्टेटिंस' से आंतों की बीमारी अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज भी किया जा सकता है। इस दवा के जरिए अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों में कमी लाई जा सकती है। यह दावा कैलिफोर्निया की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली दवा अल्सरेटिव कोलाइटिस के मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने रोकती है और सर्जरी का खतरा घटाती है। हालांकि अब तक ये साफ नहीं हो पाया है कि यह दवा कैसे हालत सुधारती है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आंतों की सूजन को बढ़ने से रोकती है। क्या है अल्सरेटिव कोलाइटिसअल्सरेटिव कोलाइटिस आंतों की समस्या है, जिसमें बड़ी आंत में सूजन और जलन की शिकायत होती है। इस बीमारी में कोलन में छाले हो जाते हैं और उस हिस्से में सूजन रहती है। अगर समय रहते इस बीमारी के लक्षणों को पहच...
साइलेंट किलर को ऐसे करें कंट्रोल:ब्लड प्रेशर से देश में हर साल 16 लाख से ज्यादा मौतें, यह दिल, किडनी और ब्रेन के लिए खतरनाक; इसे 2-3-4 फॉर्मूले से करें कंट्रोल

साइलेंट किलर को ऐसे करें कंट्रोल:ब्लड प्रेशर से देश में हर साल 16 लाख से ज्यादा मौतें, यह दिल, किडनी और ब्रेन के लिए खतरनाक; इसे 2-3-4 फॉर्मूले से करें कंट्रोल

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देश में हर साल औसतन 16 लाख से ज्यादा मौतें ब्लड प्रेशर से होने वाली समस्याओं के कारण हो जाती हैं। ब्लड प्रेशर की समस्या लगातार बनी रहने के कारण मस्तिष्क, दिल और किडनी जैसे अंग बुरी तरह प्रभावित होते हैं। तनाव, संक्रमण, कुछ दवाइयां और यहां तक कि पानी की कमी के कारण भी ब्लड प्रेशर गड़बड़ हो सकता है। चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में लोगों को इसका पता ही नहीं चलता और आगे चलकर यह गंभीर बीमारियों का कारण बन जाता है। इसीलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। लीलावती एंड रिलायंस हॉस्पिटल मुंबई, के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजीत आर मेनन कहते हैं ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है क्योंकि यह कई बीमारियों को बढ़ावा देता है। इसे कंट्रोल करने के लिए 2-3-4 का यह फॉर्मूला कारगर साबित हो सकता है। ब्लड प्रेशर क्या है, कौन से लक्षण हाई और लो-ब्लड प्रेशर का इशारा करते ह...
WHO और ILO की चौंकाने वाली रिपोर्ट:देर तक नौकरी करने की मजबूरी और वर्कप्लेस पर एयर पॉल्यूशन व शोर के कारण 20 लाख लोगों ने दम तोड़ा

WHO और ILO की चौंकाने वाली रिपोर्ट:देर तक नौकरी करने की मजबूरी और वर्कप्लेस पर एयर पॉल्यूशन व शोर के कारण 20 लाख लोगों ने दम तोड़ा

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वर्कप्लेस पर एयर पॉल्यूशन, शोर और देर तक काम करने जैसे रिस्क फैक्टर कर्मचारियों की जान ले रहे हैं। जॉब के दौरान होने वाली बीमारियां और इंजरी मौत की वजह बन रही हैं। 2016 में इसके कारण दुनियाभर में 20 लाख लोगों ने दम तोड़ा। वर्कप्लेस पर अलग-अलग दिक्कतों से जूझने वाले कर्मचारियों पर पहली बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) ने जॉइंट रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2000 से 2016 के बीच काम के दौरान कर्मचारियों को होने वाली बीमारियों और इंजरीज की मॉनिटरिंग की गई। रिपोर्ट में सामने आया कि सबसे ज्यादा कर्मचारियों की मौत सांस और हृदय रोगों से हुईं। सबसे ज्यादा मौतें देर तक काम करने के कारण रिपोर्ट कहती है, 7.50 लाख मौतों का सम्बंध अधिक समय तक काम करने से है। वहीं, 4.50 लाख मौतें वर्कप्लेस पर एयर पॉल्यूशन (पीएम पार्टिकल्स, गैस) के कारण हुईं। सबस...
देश का पहला ऐसा मामला:कोविड से रिकवर हुए 5 मरीजों के गॉलब्लैडर में हुआ गैंगरीन, डॉक्टर्स की सलाह; बुखार, पेट में दर्द और उल्टी होने पर तुरंत डॉक्टरी सलाह लें

देश का पहला ऐसा मामला:कोविड से रिकवर हुए 5 मरीजों के गॉलब्लैडर में हुआ गैंगरीन, डॉक्टर्स की सलाह; बुखार, पेट में दर्द और उल्टी होने पर तुरंत डॉक्टरी सलाह लें

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कोरोना से रिकवर हो चुके दिल्ली के 5 मरीजों के गॉलब्लैडर में गैंगरीन होने का मामला सामने आया है। इनमें 4 पुरुष और एक महिला है। मरीजों की सर्जरी दिल्ली के सरगंगाराम अस्पताल में की गई। डॉक्टर्स का कहना है, संभवत: यह देश का पहला ऐसा मामला है, जब कोरोना को मात देने के बाद मरीज गैंगरीन से जूझ रहे थे। पांचों मरीजों की सर्जरी हुईपांचों मरीजों की उम्र 37 से 75 साल के बीच है। हॉस्पिटल में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड गेस्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. अनिल अरोड़ा का कहना है, जून से अगस्त के बीच ऐसे मरीज देखे गए हैं। पांचों मरीजों की पित्त की थैली गल गई थी। इसमें से चार मरीज ऐसे थे, जिनकी थैली फट चुकी थी। इसलिए और तुरंत सर्जरी कर इनकी जान बचाई गई। गॉलब्लैडर में सूजन थी डॉ. अनिल अरोड़ा का कहना है, कोविड से रिकवर होने के बाद मरीजों के गॉलब्लैडर में गंभीर सूजन थी। पेट का अल्ट्रासाउंड और सीटी स...
लम्बाई से भी है आपकी बीमारियों का कनेक्शन:कम लम्बाई वालों को डायबिटीज, गंजेपन और हृदय रोगों का खतरा, लम्बे लोगों में कैंसर होने की आशंका ज्यादा, जानिए किसे बीमारियों का खतरा अधिक

लम्बाई से भी है आपकी बीमारियों का कनेक्शन:कम लम्बाई वालों को डायबिटीज, गंजेपन और हृदय रोगों का खतरा, लम्बे लोगों में कैंसर होने की आशंका ज्यादा, जानिए किसे बीमारियों का खतरा अधिक

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इंसान में होने वाली बीमारियों और लम्बाई के बीच भी एक कनेक्शन होता है। वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में इस पर मुहर भी लगाई है। रिसर्च के मुताबिक, लम्बी औरतों में कैंसर होने का खतरा अधिक होता है वहीं, कम लम्बाई वाली औरतों में प्री-मैच्योर डिलीवरी की आशंका रहती है। अगर पुरुषों की बात करें तो कम लम्बाई वालों में समय से पहले गंजेपन का रिस्क रहता है और लम्बे पुरुषों में रक्त के थक्के जमने का खतरा रहता है। सेहत के नजरिए से लम्बाई के अपने फायदे और नुकसान हैं। जानिए आपको बीमारियों से कितनी राहत या कितना खतरा है......