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समझें वजन बढ़ने और घटने का साइंस:सिर्फ 1 हफ्ते कम नींद लेने से भी वजन एक किलो तक बढ़ सकता है

समझें वजन बढ़ने और घटने का साइंस:सिर्फ 1 हफ्ते कम नींद लेने से भी वजन एक किलो तक बढ़ सकता है

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अधिक वजन हृदय रोग, डायबिटीज, स्ट्रोक और कुछ विशेष प्रकार के कैंसर का प्रमुख कारण है। ऐसे में वजन को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। वेट मैनेजमेंट प्रोग्राम से एक माह में 3 किलो तक वजन को कम किया जा सकता है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी इसकी पुष्टि करता है। फोर्टिस हॉस्पिटल की चीफ क्लीनिकल न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. सीमा सिंह से जानिए, 5 तरीकों जो आपको वजन घटाने में मदद करेंगे... 1. नाश्ते में लें हाई प्रोटीन: 60% तक घटेगी भोजन की इच्छायूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में पब्लिश रिसर्च कहती है, कार्बोहाइड्रेट की तुलना में प्रोटीन को पचाने के लिए शरीर को अधिक कैलोरी खर्च करनी पड़ती है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की स्टडी कहती है, दिन भर ली जाने वाली कुल कैलोरी में यदि प्रोटीन की मात्रा 25 फीसदी तक बढ़ा दी जाए तो भूख की इच्छा 60 प्रतिशत तक कम हो जाती है,...
वैज्ञानिकों ने बनाई प्रेग्नेंसी रोकने वाली गर्भनिरोधक एंटीबॉडी, यह स्पर्म को 15 सेकंड में कमजोर करके निष्क्रिय कर देगी

वैज्ञानिकों ने बनाई प्रेग्नेंसी रोकने वाली गर्भनिरोधक एंटीबॉडी, यह स्पर्म को 15 सेकंड में कमजोर करके निष्क्रिय कर देगी

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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने खास तरह की गर्भनिरोधक एंटीबॉडी विकसित की है। यह स्पर्म को कमजोर करेगी ताकि जन्म दर को कंट्रोल किया जा सके। इसे बॉस्टन यूनिवर्सिटी और सैनडिएगो की कंपनी जैबबायो ने मिलकर तैयार किया है। वैज्ञानिकों ने इसे ह्यूमन कंट्रासेप्शन एंटीबॉडी नाम दिया है। नई गर्भनिरोधक एंटीबॉडी का इंसान के अलग-अलग क्वालिटी वाले स्पर्म पर ट्रायल भी किया गया है। ट्रायल में सामने आया है कि यह 15 सेकंड में स्पर्म की कमजोर करके निष्क्रिय कर देती है। दावा; सूजन का खतरा नहींबॉस्टन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर देबोरह एंडरसन कहते हैं, इस गंर्भनिरोधक एंटीबॉडी को महिला की डिमांड पर उसकी वेजाइना में डाला जा सकता है। यह एंटीबॉडी महिला के प्राइवेट पार्ट में किसी तरह की सूजन नहीं पैदा करती। इंसानों पर पहले फेज का ट्रायल किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 15 से 49 साल की उम्र वाली 65 फीसदी म...
स्मार्टफोन से ली गई आंखों के निचले हिस्से की फोटो से होगी एनीमिया की जांच, AI से लैस कैमरा फोटो जांचकर बताएगा बीमारी है या नहीं

स्मार्टफोन से ली गई आंखों के निचले हिस्से की फोटो से होगी एनीमिया की जांच, AI से लैस कैमरा फोटो जांचकर बताएगा बीमारी है या नहीं

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वैज्ञानिकों ने एनीमिया की जांच करने का नया तरीका बताया है। वैज्ञानिकों का कहना है, स्मार्टफोन की मदद से आंखों के सबसे निचले हिस्से की फोटो खींचकर एनीमिया का पता लगा सकते हैं। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो पलकों के पीछे आंखों के निचले हिस्से की फोटो की एनालिसिस करता है। जांच के बाद बताता है कि इंसान एनीमिया से पीड़ित है या नहीं। यह रिसर्च ब्राउन यूनिवर्सिटी और अमेरिका के रोह्ड आइलैंड हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने मिलकर की है। ऐसे होगी एनीमिया की जांचशोधकर्ताओं का कहना है, जिस तकनीक से फोटो की जांच की जा रही है, इसे एक ऐप में बदला सकता है। ऐसा करने के बाद इंसान को अपनी आंखों की फोटो खींचनी होगी। इसके बाद ऐप पर फोटो अपलोड करना होगा। ऐप फोटो की जांच करके एनीमिया पर रिपोर्ट देगी। जांच का नया तरीका सभी के लिए उपलब्ध होने के बाद एनीमिया की जांच के लिए ब्...
अल्कोहल के कारण 2020 में कैंसर के 7.41 लाख मामले मिले, हर 25 में एक इंसान में इस बीमारी की वजह शराब; पहले पायदान पर मंगोलिया

अल्कोहल के कारण 2020 में कैंसर के 7.41 लाख मामले मिले, हर 25 में एक इंसान में इस बीमारी की वजह शराब; पहले पायदान पर मंगोलिया

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अल्कोहल का सेवन अलग-अलग तरह के कैंसर की वजह बन रहा है। दुनिया में पिछले साल सामने आए कुल कैंसर के मामलों में से 7,41,300 यानी 4% को अल्कोहल के कारण कैंसर हुआ। हर 25 में से एक इंसान को कैंसर शराब के कारण हुआ। अल्कोहल से जुड़ी इस रिसर्च में यह भी पाया गया कि इनमें अधिकांश मामले लिवर, इसोफेगस और ब्रेस्ट कैंसर के थे। यह दावा अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने अपनी रिसर्च में किया है। 200 से ज्यादा देशों में शराब बिक्री के रिकॉर्ड देखेसाइंस जर्नल लैंसेट ऑन्कोलॉजी में पब्लिश रिसर्च कहती है, अल्कोहल और कैंसर के बीच कनेक्शन समझने के लिए वैज्ञानिकों ने 200 से ज्यादा देशों में शराब की बिक्री और वहां के मेडिकल रिकॉर्ड्स देखे। रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 से अल्कोहल की खपत और अन्य आंकड़ों को 2020 में कैंसर की घटनाओं के साथ जोड़ा गया। इसके बाद एक सूची तैयार की गई। मंगोलिया पहले पायदान पर और सब...
बेल्जियम में 90 साल की महिला को कोरोना के दो अलग-अलग वैरिएंट ने संक्रमित किया, जानिए कैसे होता है डबल इंफेक्शन

बेल्जियम में 90 साल की महिला को कोरोना के दो अलग-अलग वैरिएंट ने संक्रमित किया, जानिए कैसे होता है डबल इंफेक्शन

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ब्रसेल्स बेल्जियम में 90 साल की एक महिला को कोरोना के दो अलग-अलग वैरिएंट ने संक्रमित किया। इसी साल 3 मार्च को महिला संक्रमित हुई। उसमें कोरोना के अल्फा और बीटा वैरिएंट की पुष्टि हुई। यहां के ओएलवी हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद महिला की हालत तेजी से बिगड़ने लगी और पांच दिन बाद उसकी मौत हो गई। महिला को वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगी थी और वो रिटायरमेंट होम में रह रही थी। यूरोपियन कांग्रेस की एनुअल मीटिंग में इस दुर्लभ मामले को रखा गया गया। इससे पहले एक इंसान को एक ही समय में अलग-अलग वायरस संक्रमित कर चुके हैं, लेकिन कोरोना के वैरिएंट से जुड़ा संभवत: यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है। ऐसे हो सकता है डबल इंफेक्शनएक्सपर्ट कहते हैं, एक ही वायरस के दो वैरिएंट्स से संक्रमित होने मामला दुर्लभ होता है। यह डबल इंफेक्शन है। एक ही समय में अलग-अलग लोगों से संक्रमण हो सकता है। जब एक वैरिएंट इंसान क...
30 साल में हुई मौतों का तीसरा सबसे बड़ा कारण ब्रेन स्ट्रोक, 2019 में इससे 7 लाख लोगों ने दम तोड़ा, सिरदर्द से सबसे ज्यादा महिलाएं परेशान रहीं

30 साल में हुई मौतों का तीसरा सबसे बड़ा कारण ब्रेन स्ट्रोक, 2019 में इससे 7 लाख लोगों ने दम तोड़ा, सिरदर्द से सबसे ज्यादा महिलाएं परेशान रहीं

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मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों से 68 फीसदी तक होने वाली मौतों की वजह ब्रेन स्ट्रोक है। 2019 में इससे देश में 7 करोड़ लोगों ने दम तोड़ा। देश में हर साल जितनी मौतें होती हैं, उनमें से 7.4 फीसदी लोगों के दम तोड़ने के कारण ब्रेन स्ट्रोक है। यह आंकड़े लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में पब्लिश स्टडी रिपोर्ट में जारी किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के मरीजों में स्ट्रोक के बाद सबसे ज्यादा मौतें अल्जाइमर्स-डिमेंशिया (12 फीसदी) और एनसेफेलाइटिस (12 फीसदी) से हुई हैं। 48 करोड़ लोग सिरदर्द से जूझते रहेरिपोर्ट कहती है, 2019 में देश के 48 करोड़ लोग सिरदर्द से परेशान रहे। यह ऐसा सिरदर्द था जिसकी वजह माइग्रेन और तनाव थी। पुरुषों के मुकाबले इससे सबसे ज्यादा 35 से 59 साल की महिलाएं परेशान हुईं। दुनिया में बुजुर्गोँ की संख्या बढ़ रही है, इसलिए ब्रेन से जुड़ी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे ...
ब्लड शुगर चेक करने के लिए दर्द सहने की जरूरत नहीं, वैज्ञानिकों ने बनाई चिप यह लार जांचकर बताएगी शुगर का लेवल; ऐप पर मिलेंगे नतीजे

ब्लड शुगर चेक करने के लिए दर्द सहने की जरूरत नहीं, वैज्ञानिकों ने बनाई चिप यह लार जांचकर बताएगी शुगर का लेवल; ऐप पर मिलेंगे नतीजे

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जल्द ही ब्लड शुगर चेक करने के लिए सुई के दर्द से नहीं गुजरना होगा। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने ऐसी स्ट्रिप बनाई है जो इंसान की लार को जांचकर बताएगी कि ब्लड शुगर का लेवल ज्यादा है या कम। फिलहाल अभी सुई चुभोकर उंगली से ब्लड की बूंद निकालते हैं और ग्लूकोज मॉनिटर से जांचते हैं। नई स्ट्रिप उपलब्ध होने पर जांच के लिए दर्द नहीं सहना पड़ेगा। इसी साल शुरू होगा उत्पादनइस स्ट्रिप को विकसित करने वाली ऑस्ट्रेलिया की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी कहती है, इस प्रोजेक्ट के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से 35 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली है। इस राशि से बड़े स्तर पर टेस्टिंग किट तैयार की जाएंगी। क्लीनिकल ट्रायल पूरा होने पर किट को तैयार करने की प्रक्रिया इसी साल शुरू हो जाएगी। 2023 तक इसे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे फार्मेसी से खरीदा जा सकेगा। ऐसे काम करेगी स्ट्रिप ब्लड शुगर की जांच के लिए स्ट्रिप को...
पक्षियों की आंखों की रोशनी छीन रही रहस्यमय बीमारी, दिशा भूलने और थकान के कारण उड़ भी नहीं पा रहे

पक्षियों की आंखों की रोशनी छीन रही रहस्यमय बीमारी, दिशा भूलने और थकान के कारण उड़ भी नहीं पा रहे

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अमेरिका में पूर्वी इलाके में एक रहस्यमय बीमारी से पक्षियों की मौतें हो रही हैं। वैज्ञानिक अब तक इस बीमारी का पता नहीं लगा पाए हैं। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई है कि जिस तरह स्टारलिंग्स, ब्लू जेज़, ग्रैकल्स जैसे पक्षियों की मौत हो रही है, वह पक्षियों की महामारी का संकेत हो सकता है। आमतौर पर साल्मोनेला और क्लामायिडया बैक्टीरिया के संक्रमण से पक्षियों में ऐसी मौतें होती हैं, लेकिन वैज्ञानिक का मानना है कि इस बार मौतों की वजह ये बैक्टीरिया नहीं हैं। इस बीमारी से पक्षियों की मौत के मामले 2 महीने पहले वर्जिनिया, वाशिंगटन और मैरीलैंड में सामने आए थे। लेकिन अब यह केंटकी, डेलावेयर और विस्कॉन्सिन तक फैल चुकी है। इस अजीब बीमारी से मारे गए पक्षियों का पोस्टमॉर्टम यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के स्कूल ऑफ वेटरनरी मेडिसिन में किया जा रहा है। यहां टॉक्सिकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर लीजा मार्फी कहती हैं कि...
अमेरिकी वैज्ञानिकों की बनाई डिवाइस को उंगलियों पर पहनें, यहां से निकलने वाले पसीने से बिजली तैयार होगी और चार्जिंग भी

अमेरिकी वैज्ञानिकों की बनाई डिवाइस को उंगलियों पर पहनें, यहां से निकलने वाले पसीने से बिजली तैयार होगी और चार्जिंग भी

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जल्द ही पसीने से भी फोन चार्ज किया जा सकेगा। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने डिवाइस का एक प्रोटोटाइप तैयार किया है इसकी मदद से पसीने से फोन चार्ज होगा। इस डिवाइस को उंगलियों पर पहनाया जाएगा। रात में सोते या बैठे वक्त निकलने वाले पसीने से बिजली तैयार होगी। इससे स्मार्टफोन चार्ज होगा। इस डिवाइस को सैनडिएगो की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। ऐसे काम करती है डिवाइसडिवाइस में इलेक्ट्रिकल कंडक्टर लगे हैं। इसमें कार्बन फोम का इस्तेमाल किया गया है जो उंगलियों से निकलने वाला पसीना सोखता है। इलेक्ट्रोड पर मौजूद एंजाइम पसीने के कणों के बीच केमिकल रिएक्शन शुरू करते हैं। इससे बिजली पैदा होती है। इलेक्ट्रोड के नीचे छोटी चिप लगाई गई है, जिसे दबाने पर डिवाइस पावर जनरेट करने लगती है। शोधकर्ता लू यिन का कहना है, डिवाइस का आकार एक वर्ग सेंटीमीटर है। डिवाइस में लगाया गया मैटेरियल फ्लेक्स...
हाई-टेक टॉयलेट से सुपरबग बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा, इन पर एंटीबायोटिक दवाओं का भी असर नहीं होता इसलिए साफ-सफाई में बदलाव है जरूरी

हाई-टेक टॉयलेट से सुपरबग बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा, इन पर एंटीबायोटिक दवाओं का भी असर नहीं होता इसलिए साफ-सफाई में बदलाव है जरूरी

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टोक्यो जापानी वैज्ञानिकों की नई रिसर्च अलर्ट करने वाली है। रिसर्च कहती है हाई-टेक टॉयलेट खतरनाक बैक्टीरिया 'सुपरबग' का घर बन सकता है। सुपरबग ऐसे बैक्टीरिया हैं जिन पर एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर रहती हैं। बैक्टीरिया फैलने का सबसे ज्यादा खतरा वॉटर जेट (नॉजल) से है। जिसे मल को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 80% जापानी घरों में हाई-टेक टॉयलेटजापान के करीब 80 फीसदी घरों में हाई-टेक टॉयलेट का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा एशिया के कुछ हिस्सों में भी ऐसे टॉयलेट हैं। इस पर रिसर्च करने वाली टोक्यो मेडिकल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल का कहना है कि टॉयलेट के वॉटर जेट पर मल्टीड्रग रेसिस्टेंट बैक्टीरिया स्यूडोमोनास ऐरुगिनोसा खोजा गया है। यह इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि यह लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ाती है। टॉयलेट की सफाई में बदलाव की जरूरतशोधकर्ता डॉ. इतारु नकमुरा कहते हैं, यह पहली ऐ...