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स्पेस वेडिंग का सपना होगा सच:अमेरिकी कंपनी ने बनाया स्पेस बैलून, एक लाख फीट ऊंचाई पर शादी कर सकेंगे; 93 लाख रुपए में होगी एक ट्रिप

स्पेस वेडिंग का सपना होगा सच:अमेरिकी कंपनी ने बनाया स्पेस बैलून, एक लाख फीट ऊंचाई पर शादी कर सकेंगे; 93 लाख रुपए में होगी एक ट्रिप

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अब स्पेस वेडिंग का सपना भी सच हो सकेगा। स्पेस बैलून में बैठकर 1 लाख फीट की ऊंचाई पर शादी की जा सकेगी। फ्लोरिडा की कंपनी स्पेस पर्सपेक्टिव ने खास तरह का स्पेस बैलून तैयार किया है। इसका आकार एक फुटबॉल स्टेडियम के बराबर है। एक बार स्पेस बैलून से सफर करने के लिए 93 लाख रुपए देने होंगे। यह यात्रा 2024 से यात्रा की जा सकेगी। बैलून को 30 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंचने में 2 घंटे लगते हैं। वापसी के दौरान इसे पानी में उतारा जाएगा। एक साथ 8 लोगों को ले जाएगाकंपनी का दावा है, कई लोगों ने इस सफर के लिए बुकिंग भी करा दी है। वहीं, कुछ लोगों ने वेडिंग के लिए इसे चुना है। स्पेस बैलून एक बार में 8 लोगों को लेकर जाएगा। यह सफर 6 घंटों का होगा। इसके लिए एडवांस बुकिंग जून के अंतिम सप्ताह से शुरू की जा चुकी है। कंपनी के मुताबिक, कॉर्पोरेट इवेंट और बर्थडे जैसे सेलिब्रेशन के लिए भी इसे बुक किया जा सकता है। ...
4500 किलो का स्टील ब्रिज:एम्सटर्डम में बना दुनिया का पहला 3डी प्रिंटेड स्टीज ब्रिज, इसे 4 रोबोट्स ने मिलकर तैयार किया; जानिए क्या है यह तकनीक

4500 किलो का स्टील ब्रिज:एम्सटर्डम में बना दुनिया का पहला 3डी प्रिंटेड स्टीज ब्रिज, इसे 4 रोबोट्स ने मिलकर तैयार किया; जानिए क्या है यह तकनीक

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नीदरलैंड्स की राजधानी एम्सटर्डम में दुनिया का पहला 3डी प्रिंटेड स्टील ब्रिज बनाया गया है। इसकी डिजाइन से लेकर तैयार करने तक का काम रोबोट ने किया है। इसे 4500 किलो स्टील से तैयार किया गया है और एम्सटर्डम की सबसे पुरानी नहर पर लगाया गया है। ब्रिज को तैयार करने वाली नीदरलैंड्स की कम्पनी MX3D का कहना है, 15 जुलाई को इसका उद्घाटन किया गया था और 18 जुलाई से इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। जानिए क्या है 3डी प्रिंटिंग तकनीक और यह ब्रिज क्यों खास है... 4 रोबोट्स ने बनाया 12 मीटर लम्बा ब्रिज12 मीटर लम्बे इस ब्रिज को 4 रोबोट्स ने मिलकर तैयार किया है। इसे तैयार होने में करीब 6 महीने का वक्त लगा है और इसके बाद ब्रिज को नाव की मदद से लाया गया। फिर क्रेन से इसे नहर पर रखकर फिट किया गया। इसे तैयार करने वाली कम्पनी का कहना है, ब्रिज से जुड़ा सभी डाटा कम्प्यूटर में फीड किया जाएगा, ताकि अगली ब...
डायबिटीज के कॉम्प्लिकेशंस घटाने वाली दवा:डिप्रेशन में दी जाने वाली एंटीडिप्रेसेंट दवा डायबिटीज के कारण बढ़ने वाला मौत का खतरा घटा सकती है, ताइवान के वैज्ञानिकों की रिसर्च

डायबिटीज के कॉम्प्लिकेशंस घटाने वाली दवा:डिप्रेशन में दी जाने वाली एंटीडिप्रेसेंट दवा डायबिटीज के कारण बढ़ने वाला मौत का खतरा घटा सकती है, ताइवान के वैज्ञानिकों की रिसर्च

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डिप्रेशन को खत्म करने वाली एंटीडिप्रेसेंट दवाएं डायबिटीज के गंभीर होने का खतरा भी कम करती हैं। नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने कहा है कि ऐसे लोग जो डायबिटीज और डिप्रेशन से जूझ रहे हैं उनमें ये दवाएं हालत बिगड़ने से बचा सकती हैं। ये दवाएं डायबिटीज के कारण बढ़ने वाले मौत के खतरे को कम कर सकती हैं। यह दावा ताइवान के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में किया है। डायबिटीज के मरीजों में डिप्रेशन का खतरा एंडोक्राइन सोसायटी के जर्नल क्लीनिकल एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में पब्लिश रिसर्च कहती है, डायबिटीज के मरीजों में डिप्रेशन होने का खतरा रहता है। इस वजह से मरीजों में डायबिटीज के कॉम्प्लीकेशन बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है। जैसे- किडनी की बीमारी, स्ट्रोक, आंख और पैरों से जुड़ी समस्या का खतरा बना रहता है। डायबिटीज के मरीजों में डिप्रेशन होने पर ये एक्सरसाइज से दूरी बनाने लगते हैं। शरीर के वजन म...
लॉन्ग कोविड कब हो सकता है:संक्रमण के पहले हफ्ते में थकान, सिरदर्द और सांस से जुड़ी दिक्कत जैसे 5 लक्षण दिखने पर लॉन्ग कोविड होने का खतरा, ब्रिटिश शोधकर्ताओं का दावा

लॉन्ग कोविड कब हो सकता है:संक्रमण के पहले हफ्ते में थकान, सिरदर्द और सांस से जुड़ी दिक्कत जैसे 5 लक्षण दिखने पर लॉन्ग कोविड होने का खतरा, ब्रिटिश शोधकर्ताओं का दावा

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कौन से लक्षण बताते हैं कि मरीज लॉन्ग कोविड का शिकार हो सकता है, इसे समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की है। वैज्ञानिकों का कहना है, संक्रमण होने के बाद पहले ही हफ्ते में कोरोना से जुड़े 5 लक्षण दिखते हैं तो मरीज को लॉन्ग कोविड होने का खतरा ज्यादा रहता है। इन 5 लक्षणों में थकान, सिरदर्द, सांस से जुड़ी समस्या, बुखार और पेट से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं। रिसर्च करने वाली ब्रिटेन की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, कोरोना पीड़ितों से जुड़े डाटा की मदद से लॉन्ग कोविड के 10 लक्षण भी बताए गए हैं। इनमें सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, जोड़ों में दर्द, सीने में दर्द, डायरिया, स्वाद और खुशबू का न मिल पाना शामिल हैं। क्या है लॉन्ग कोविडलॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है। आसान भाषा में इसका मतलब है शरीर से वायरस जाने के बाद भी कुछ न कुछ लक्षण दि...
मेडिकल साइंस का कमाल:शादी के 8 साल बाद भी बच्चे नहीं हुए तो आईवीएफ तकनीक अपनाई, 3 भ्रूण से जन्मे 4 बच्चे; एक्सपर्ट डॉ. गौरी अग्रवाल से समझिए ऐसा कैसे हुआ

मेडिकल साइंस का कमाल:शादी के 8 साल बाद भी बच्चे नहीं हुए तो आईवीएफ तकनीक अपनाई, 3 भ्रूण से जन्मे 4 बच्चे; एक्सपर्ट डॉ. गौरी अग्रवाल से समझिए ऐसा कैसे हुआ

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3 भ्रूण से 4 बच्चों के जन्म होने का मामला सामने आया है। शादी के 8 साल बाद तक बच्चा न होने पर एक महिला ने आईवीएफ प्रक्रिया अपनाई और 4 बच्चों को जन्म दिया। 4 बच्चों के जन्म होने पर इन्हें क्वाड्रप्लेट्स कहा जाता है। ट्रीटमेंट करने वाली इनफर्टिलिटी और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. गौरी अग्रवाल का कहना है, पूरी प्रोसेस से पहले कपल की काउंसिलिंग की गई और उन्हें इसके लिए राजी किया गया। 3 भ्रूण से 4 बच्चे कैसे जन्मे, इसे समझिएडॉ. गौरी अग्रवाल का कहना है, आईवीएफ प्रक्रिया की शुरुआत में महिला में इम्प्लांट करने के लिए 3 भ्रूण तैयार किए गए। भ्रूण इम्प्लांट करने के 16 हफ्तों बाद महिला की सर्विकल स्टिचिंग की गई। गर्भ में पल रहे 3 भ्रूण में से एक भ्रूण दो हिस्सों में बंट गया और एक नए बच्चे में तब्दील हो गया। इस तरह 3 भ्रूण से 4 बच्चे गर्भ में पलने लगे। इसके बाद डिलीवरी तक महिला की जांच और हर छोटे-बड़े बदलाव प...
अमेरिकी शोधकर्ताओं का दावा:कोलेस्ट्रॉल की दवा ‘स्टेटिन्स’ कोरोना मरीजों में मौत का खतरा 41% तक घटाती है, यह अंदरूनी सूजन को रोकती है

अमेरिकी शोधकर्ताओं का दावा:कोलेस्ट्रॉल की दवा ‘स्टेटिन्स’ कोरोना मरीजों में मौत का खतरा 41% तक घटाती है, यह अंदरूनी सूजन को रोकती है

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कोलेस्ट्रॉल को घटाने की दवा 'स्टेटिन्स' कोरोना से होने वाली मौत का खतरा 41 फीसदी तक घटा देती है। नेशनल अमेरिकन रजिस्ट्री के आंकड़ों से इसकी पुष्टि भी हुई है। रिसर्च करने वाले सैनडिएगो के शोधकर्ताओं का कहना है, हमनें रिसर्च में ऐसे मरीजों का डाटा शामिल किया है जो कोरोना होने से पहले स्टेटिन्स दवा ले रहे थे। ऐसे लोगों को भी रिसर्च में शामिल हैं जो यह दवा नहीं भी ले रहे थे। रिसर्च के परिणाम बताते हैं कि यह दवा हॉस्पिटल में भर्ती हुए मरीजों की मौत का खतरा कम करती है। यह दवा कोरोना मरीजों में कैसे असरदार है, अब ये जानिए कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली दवा 'स्टेटिन्स' गोलियों के रूप में ली जाती है। कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है, गुड और बैड। यह दवा शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल कंट्रोल करती है। बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।शोधकर्ता...
पीछा नहीं छोड़ रहा कोरोना:रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी लॉन्ग कोविड के मरीजों में 200 से ज्यादा लक्षण दिख रहे; 56 देशों के 3,762 मरीजों पर हुई रिसर्च

पीछा नहीं छोड़ रहा कोरोना:रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी लॉन्ग कोविड के मरीजों में 200 से ज्यादा लक्षण दिख रहे; 56 देशों के 3,762 मरीजों पर हुई रिसर्च

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लंदन लॉन्ग कोविड से जूझने वाले मरीजों पर बीमारी के असर को लेकर नई रिसर्च सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक, ऐसे मरीजों में 10 अंगों से जुड़े 200 से ज्यादा लक्षण दिख सकते हैं। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद जिन मरीजों में लक्षण दिखते रहे हैं, वैज्ञानिकों ने उन पर स्टडी की। इनमें लॉन्ग कोविड से जूझने वाले 56 देशों के 3,762 मरीजों से बात की गई। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ने अपनी रिसर्च के दौरान कोविड से उबर चुके मरीजों में दिखने वाले 203 में से 66 लक्षणों पर 7 महीने तक नजर रखी। सभी मरीज 18 साल और इससे ज्यादा उम्र के थे और उनसे कोविड से जुड़े 257 सवाल पूछे गए थे। सबसे पहले जानिए लॉन्ग कोविड क्या है?लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है। आसान भाषा में इसका मतलब है शरीर से वायरस जाने के बाद भी कुछ न कुछ लक्षण दिखते रहना। कोविड-19 के जिन मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, उन्हें महीनों बाद भी...
ब्रिटेन के बाद अब अमेरिका में मंकीपॉक्स:टेक्सास में दुर्लभ मंकीपॉक्स का पहला मरीज मिला, वायरस यह स्ट्रेन नाइजीरिया में देखा जा चुका है; यहीं से मरीज वापस घर लौटा था

ब्रिटेन के बाद अब अमेरिका में मंकीपॉक्स:टेक्सास में दुर्लभ मंकीपॉक्स का पहला मरीज मिला, वायरस यह स्ट्रेन नाइजीरिया में देखा जा चुका है; यहीं से मरीज वापस घर लौटा था

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टेक्सास टेक्सास में दुर्लभ बीमारी मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया है। इसकी पुष्टि अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी ने की है। जिस मरीज में बीमारी पाई ई वो नाइजीरिया से लौटा है। घर आते वक्त वह अटलांटा और जॉर्जिया में रुका था। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सफर के दौरान मरीज के सम्पर्क में कौन-कौन लोग आए। इससे पहले जून में मंकीपॉक्स के दो मामले ब्रिटेन में सामने आए थे। टेक्सास में मंकीपॉक्स वायरस का यह पहला मामला है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, मरीज टेक्सास के डेल्लास लव फील्ड एयरपोर्ट पर 9 जुलाई को पहुंचा था। उसे पास के ही एक हॉस्पिटल में आइसोलेट किया गया था। अब उसकी स्थिति बेहतर है। सीडीसी के मुताबिक, मरीज में मंकीपॉक्स को वो स्ट्रेन मिला है जो खासतौर पर नाइजीरिया समेत पश्चिम अफ्रीका में देखा जा चुका है। मंकीपॉक्स के पिछले 6 मामलों में भी ...
दुनिया की सबसे विचित्र गोभी ऐसी क्यों है:इस गोभी के फूल पूरी तरह बढ़ नहीं पाते और एक-दूसरे पर चढ़ जाते हैं, इसलिए बनता है पिरामिड जैसा आकार, जानिए क्यों है यह खास

दुनिया की सबसे विचित्र गोभी ऐसी क्यों है:इस गोभी के फूल पूरी तरह बढ़ नहीं पाते और एक-दूसरे पर चढ़ जाते हैं, इसलिए बनता है पिरामिड जैसा आकार, जानिए क्यों है यह खास

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पिरामिड की तरह दिखने वाली दुनिया की विचित्र गोभी पर वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च की है। यह गोभी इतनी विचित्र क्यों दिखती है, वैज्ञानिकों ने इसकी वजह बताई है। इसे आम भाषा में रोमनेस्को कॉलीफ्लॉवर और रोमनेस्को ब्रॉकली भी कहा जाता है। यह सेलेक्टिव ब्रीडिंग का बेहतरीन उदाहरण है। इसकी बनावट पर फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है। इसलिए होता है पिरामिड जैसा आकारशोधकर्ता फ्रांस्वा पार्सी का कहना है, इस गोभी के विचित्र दिखने की वजह इसका फूल है। गोभी में मौजूद दानेदार फूल दरअसरल बड़े फूल में तब्दील होना चाहते हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है। इसका निचला हिस्सा तने में तब्दील हो जाता है और ऊपरी हिस्सा कली बनकर रह जाती हैं। ऐसा इतनी बार होता है कि एक कली के ऊपर दूसरी कली चढ़ती जाती है। इस तरह ये पिरामिड जैसे दिखने लगते हैं। फूल का 3डी-मॉडल तैयार कियाशोधकर्...
नई तरह का टेस्ट:समय से ग्लूकोमा की जानकारी देने में ब्लड जेनेटिक टेस्ट दूसरी जांचों से 15 गुना बेहतर, समय पर इलाज हुआ इसे कंट्रोल करना है आसान

नई तरह का टेस्ट:समय से ग्लूकोमा की जानकारी देने में ब्लड जेनेटिक टेस्ट दूसरी जांचों से 15 गुना बेहतर, समय पर इलाज हुआ इसे कंट्रोल करना है आसान

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इंसान ग्लूकोमा से पीड़ित है या नहीं, इसका पता जेनेटिक ब्लड टेस्ट से भी लगाया जा सकता है। वर्तमान में होने वाली जांचों से यह 15 गुना तक बेहतर है। यह जांच लोगों को ग्लूकोमा की शुरुआती अवस्था में ही अलर्ट कर देती है। इस नई तरह की जांच को ऑस्ट्रेलिया की फ्लाइंडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, जेनेटिक ब्लड टेस्ट बीमारी की जानकारी समय से देने में कितना सफल है इसे जानने के लिए 4,13,844 लोगों का टेस्ट किया गया। इनमें ग्लूकोमा के मरीज और स्वस्थ, दोनों तरह के लोग शामिल थे। क्या है ग्लूकोमादुनियाभर में दृष्टिहीनता की बड़ी वजह है ग्लूकोमा। ग्लूकोमा होने पर आंख में नसों में प्रेशर काफी अधिक बढ़ जाता है। इसका बुरा असर आंखों की रोशनी पर पड़ने लगता है। सही समय पर इलाज ना किया जाए तो मरीज अंधा भी हो सकता है। देश में 40 साल और इससे अधिक उम्र के 11 लाख से अधिक मरी...