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हैंड सैनेटाइजर से शरीर में मेथेनॉल जैसे जहरीले केमिकल पहुंचते हैं; इससे अमेरिका में 15 में से 4 की आंखों की रोशनी गई, 3 की मौत हुई

हैंड सैनेटाइजर से शरीर में मेथेनॉल जैसे जहरीले केमिकल पहुंचते हैं; इससे अमेरिका में 15 में से 4 की आंखों की रोशनी गई, 3 की मौत हुई

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
सैनेटाइजर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना जानलेवा साबित हो सकता है। मेयो क्लीनिक के एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि सैनेटाइजर का अधिक इस्तेमाल करते हैं आंखों की रोशनी जाने के साथ मौत भी हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को है। सैनेटाइजर में मौजूद जहरीले केमिकल स्किन के जरिए बच्चों के शरीर में पहुंच सकते हैं। ऐसा क्यों है, इसकी वजह भी जानिए हैंड सैनेटाइजर में तीन तरह के अल्कोहल इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें से एक है, मेथेनॉल। इसका अधिक इस्तेमाल करने पर आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खत्म हो सकती है या मौत भी हो सकती है।अमेरिका में मेथेनॉल वाले हैंड सैनेटाइजर बनाने पर बैन लगा दिया गया है। मेथेनॉल की जगह एथेनॉल और आइसोप्रोपेनॉल को सुरक्षित विकल्प माना गया है। वहीं, कई देशों में इस्तेमाल हो रहे सैनेटाइजर में मेथेनॉल मौजूद है।बच्चों की स्किन के जरिए मेथेनॉल शरीर में पहुंचकर लम्बे समय स...
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण 10 साल पहले ही दिखने लगते हैं, याद्दाश्त घटना और रोजमर्रा के कामों को करने क्षमता कम होती है तो अलर्ट हो जाएं

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण 10 साल पहले ही दिखने लगते हैं, याद्दाश्त घटना और रोजमर्रा के कामों को करने क्षमता कम होती है तो अलर्ट हो जाएं

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
ब्रेन स्ट्रोक का खतरा घटाना चाहते हैं तो उसके लक्षणों पर नजर रखें। नई रिसर्च कहती है, ब्रेन स्ट्रोक होने से 10 साल पहले ही इसके लक्षण दिखने लगते हैं। जैसे, याद्दाश्त कम होने लगती है और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता घटने लगती है। यह दावा नीदरलैंड्स की एरेसमस यूनिवर्सिटी वैज्ञानिकों ने 28 साल तक चली रिसर्च के बाद किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, ऐसे लक्षण दिखते हैं तो लाइफस्टाइल में बदलाव करके, दवाएं लेकर और खानपान में सुधार करके स्ट्रोक का खतरा घटा सकते हैं। ऐसे हुई रिसर्चवैज्ञानिकों का कहना है, रिसर्च में 14,712 लोग शामिल किए गए। 28 साल तक इन पर नजर रखी गई। इनका फिजिकल और मेंटल टेस्ट लिया गया। जिसमें मेमोरी टेस्ट भी शामिल था। इसके अलावा इनके रोजमर्रा के काम जैसे बैंकिंग, कपड़े धोना, खाना बनाने के तरीके की एनालिसिस भी की गई। इन 28 सालों में जिन 1,662 लोगों को पहली बार ब्रेन स्ट्रोक ह...
स्मार्टफोन की स्क्रीन से सैम्पल लेकर कोविड टेस्ट किया जा सकेगा, दावा; 81 से 100 फीसदी तक सटीक परिणाम बताता है

स्मार्टफोन की स्क्रीन से सैम्पल लेकर कोविड टेस्ट किया जा सकेगा, दावा; 81 से 100 फीसदी तक सटीक परिणाम बताता है

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लंदन के वैज्ञानिकों ने कोरोना की जांच का नया तरीका ढूंढा है। इसका नाम फोन स्क्रीन टेस्टिंग रखा गया है। अब जांच के लिए स्वैब स्टिक से नाक या गले से सैम्पल लेने की जरूरत नहीं। स्मार्टफोन की स्क्रीन से सैम्पल लिया जा सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि फोन स्क्रीन टेस्टिंग से जांच के नतीजे आरटी-पीसीआर की तरह ही सटीक आते हैं और खर्च भी कम आता है। शोधकर्ता डॉ. रोड्रिगो यूंग कहते हैं, इस जांच को यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और डायग्नोसिस बायोटेक स्टार्टअप के साथ मिलकर तैयार किया है। स्मार्टफोन को ही क्यों चुनाजांच करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है, जब कोई इंसान खांसता है या बात करता है तो मुंह से ड्रॉप्लेट्स यानी लार की बूंदें निकलकर आसपास की सतह पर इकट्ठा हो जाती हैं। कोरोना से संक्रमित इंसान के ड्रॉप्लेट्स में वायरस के कण होते हैं। मुंह से निकलने वाले ये ड्रॉप्लेट्स स्मार्टफोन की स्क्रीन पर इक...
हैंड सैनेटाइजर से शरीर में मेथेनॉल जैसे जहरीले केमिकल पहुंचते हैं; इससे अमेरिका में 15 में से 4 की आंखों की रोशनी गई, 3 की मौत हुई

हैंड सैनेटाइजर से शरीर में मेथेनॉल जैसे जहरीले केमिकल पहुंचते हैं; इससे अमेरिका में 15 में से 4 की आंखों की रोशनी गई, 3 की मौत हुई

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सैनेटाइजर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना जानलेवा साबित हो सकता है। मेयो क्लीनिक के एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि सैनेटाइजर का अधिक इस्तेमाल करते हैं आंखों की रोशनी जाने के साथ मौत भी हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को है। सैनेटाइजर में मौजूद जहरीले केमिकल स्किन के जरिए बच्चों के शरीर में पहुंच सकते हैं। ऐसा क्यों है, इसकी वजह भी जानिए हैंड सैनेटाइजर में तीन तरह के अल्कोहल इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें से एक है, मेथेनॉल। इसका अधिक इस्तेमाल करने पर आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खत्म हो सकती है या मौत भी हो सकती है।अमेरिका में मेथेनॉल वाले हैंड सैनेटाइजर बनाने पर बैन लगा दिया गया है। मेथेनॉल की जगह एथेनॉल और आइसोप्रोपेनॉल को सुरक्षित विकल्प माना गया है। वहीं, कई देशों में इस्तेमाल हो रहे सैनेटाइजर में मेथेनॉल मौजूद है।बच्चों की स्किन के जरिए मेथेनॉल शरीर में पहुंचकर लम्बे समय स...
स्मार्टफोन की स्क्रीन से सैम्पल लेकर कोविड टेस्ट किया जा सकेगा, दावा; 81 से 100 फीसदी तक सटीक परिणाम बताता है

स्मार्टफोन की स्क्रीन से सैम्पल लेकर कोविड टेस्ट किया जा सकेगा, दावा; 81 से 100 फीसदी तक सटीक परिणाम बताता है

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लंदन के वैज्ञानिकों ने कोरोना की जांच का नया तरीका ढूंढा है। इसका नाम फोन स्क्रीन टेस्टिंग रखा गया है। अब जांच के लिए स्वैब स्टिक से नाक या गले से सैम्पल लेने की जरूरत नहीं। स्मार्टफोन की स्क्रीन से सैम्पल लिया जा सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि फोन स्क्रीन टेस्टिंग से जांच के नतीजे आरटी-पीसीआर की तरह ही सटीक आते हैं और खर्च भी कम आता है। शोधकर्ता डॉ. रोड्रिगो यूंग कहते हैं, इस जांच को यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और डायग्नोसिस बायोटेक स्टार्टअप के साथ मिलकर तैयार किया है। स्मार्टफोन को ही क्यों चुनाजांच करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है, जब कोई इंसान खांसता है या बात करता है तो मुंह से ड्रॉप्लेट्स यानी लार की बूंदें निकलकर आसपास की सतह पर इकट्ठा हो जाती हैं। कोरोना से संक्रमित इंसान के ड्रॉप्लेट्स में वायरस के कण होते हैं। मुंह से निकलने वाले ये ड्रॉप्लेट्स स्मार्टफोन की स्क्रीन पर इक...
कैंसर के इलाज में दी जाने वाली इम्यूनोथैरेपी के साइड इफेक्ट से बचाएगी गठिया की दवा, जानिए ऐसा होता क्यों है

कैंसर के इलाज में दी जाने वाली इम्यूनोथैरेपी के साइड इफेक्ट से बचाएगी गठिया की दवा, जानिए ऐसा होता क्यों है

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
कैंसर के इलाज में दी जाने वाली इम्यूनोथैरेपी के कारण कई बार मरीजों को साइड इफेक्ट झेलना पड़ता है। लेकिन गठिया की दवा से ऐसे साइड इफेक्ट से बचा सकती है। इन दवाओं को टीएनफ अल्ट्रा इन्हीबिटर कहते हैं। गठिया के मरीजों में सूजन होने पर ये दवाएं दी जाती हैं। यह दावा जेनेवा यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, कैंसर के मरीजों को इम्यूनोथैरेपी देने पर कई बार सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में दर्द, वजन बढ़ना और सिरदर्द जैसे साइड इफेक्ट दिखते हैं। ऐसे साइड इफेक्ट को रोकने में गठिया की दवाएं असरदार हैं। ऐसे हुई रिसर्चशोधकर्ता माइकल पिटेट कहते हैं, जब इम्यून सिस्टम अधिक तेजी से काम करता है तो शरीर में सूजन भी तेजी से बढ़ती है। शरीर पर इसका बुरा असर पड़ता है। कई बार स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचने लगता है। इसलिए हम चाहते थ...
दूध से होने वाली एलर्जी को रोकने के लिए गाय के जीन्स से वो प्रोटीन हटाया जो इसे पचाने में दिक्कत करता है

दूध से होने वाली एलर्जी को रोकने के लिए गाय के जीन्स से वो प्रोटीन हटाया जो इसे पचाने में दिक्कत करता है

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रशिया के वैज्ञानिकों ने देश की पहली 'क्लोनिंग काउ' तैयार की है। इस गाय के जीन में ऐसे बदलाव किए गए हैं कि इससे निकलने वाले दूध से इंसानों को एलर्जी न हो सके। दुनियाभर में 70 फीसदी ऐसे लोग हैं जिन्हें दूध से किसी न किसी तरह की एलर्जी है। इसी को कंट्रोल करने के लिए यह प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे तैयार हुई 'क्लोनिंग काउ'गाय के क्लोन को तैयार करने के लिए इसके भ्रूण के जीन में मनमुताबिक बदलाव किया गया। फिर इस भ्रूण को गाय के गर्भ में ट्रांसफर कर दिया जाता है। पैदा होने के बाद नए बछड़े की जांच करके यह जाना जाता है कि उसमें बदलाव हुए हैं या नहीं। रशिया में भी ऐसा ही किया गया है। इस तरह का प्रयोग आमतौर पर चूहों में अधिक किया जाता है। दूसरे बड़े जानवरों में क्लोनिंग करने पर खर्च अधिक आने के साथ उनकी ब्रीडिंग में भी मुश्किले आती हैं। ऐसे कम होगा दूध से एलर्जी का खतराशोधकर्ताओं का कहना है, एल...
मैजिक मशरूम से हो सकेगा डिप्रेशन का इलाज, इसमें मौजूद दवा का असर एक महीने बाद तक बरकरार रहता है

मैजिक मशरूम से हो सकेगा डिप्रेशन का इलाज, इसमें मौजूद दवा का असर एक महीने बाद तक बरकरार रहता है

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मैजिक मशरूम से डिप्रेशन का इलाज भी किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है, इसमें मौजूद साइलोसायबिन नाम का कम्पाउंड एंटीडिप्रेसेंट दवा की तरह काम करता है। यह ब्रेन और न्यूरॉन के बीच के कनेक्शन को बेहतर बनाता है। यही कनेक्शन डिप्रेशन को घटाने का काम करता है। यह दावा येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। चूहे पर हुई रिसर्च जर्नल न्यूरॉन में पब्लिश रिसर्च कहती है कि चूहे को साइलोसायबिन देने के बाद सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। उनके बिहेवियर में सुधार देखा गया है चूहे में दवा का असर एक महीने बाद तक बरकरार रहा। वैज्ञानिकों का कहना है, ड्रग की एक डोज का असर लम्बे समय तक रहता है। ऐसे बनती है डिप्रेशन की स्थिति शोधकर्ता क्वान का कहना है, ऐसा माना जाता है कि डिप्रेशन की स्थिति तब बनती है, जब न्यूरल कनेक्शन कमजोर हो जाता है। नई दवा इस कनेक्शन को 10 फीसदी...
देश में कोरोना की तीसरी लहर अगस्त में और पीक सितम्बर में आ सकता है; जुलाई के दूसरे हफ्ते से मामलों की संख्या बढ़ सकती है इसलिए अलर्ट रहें

देश में कोरोना की तीसरी लहर अगस्त में और पीक सितम्बर में आ सकता है; जुलाई के दूसरे हफ्ते से मामलों की संख्या बढ़ सकती है इसलिए अलर्ट रहें

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
कोरोना की तीसरी लहर अगस्त में और पीक सितम्बर में आ सकता है। यह दावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट कहती है, अगर वर्तमान डाटा को मानें तो जुलाई के दूसरे हफ्ते से तीसरी लहर शुरुआत हो सकती है। रोजाना कोरोना के 10 हजार मामलों के साथ बढ़त हो सकती है। दूसरी लहर की तरह खतरनाकSBI की रिपोर्ट कोरोना के पिछले ट्रेंड के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना की तीसरी लहर भी दूसरी की तरह खतरनाक हो सकती है। हालांकि, दूसरी लहर के मुकाबले मौतों की संख्या कम हो सकती है। जुलाई में शुरू हुई बढ़तदूसरी लहर के दौरान, देश में कोरोना के मामलों का पीक 7 मई को आया था। इस दौरान 24 घंटे में कोविड-19 के 4,14,188 मामले सामने आए। 5 जुलाई को कोरोना के नए मामलों में बढ़त हुई और 39,796 मामले सामने आए। अब तक 4 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें 723 मौत के ताजा मामले हैं। ...
सिरदर्द के 4 कारण जिन्हें लोग नहीं जानते, प्याज और प्रोसेस्ड फूड बढ़ाते हैं दर्द; सीने-कंधे में परेशानी भी इसकी वजह बन सकते हैं

सिरदर्द के 4 कारण जिन्हें लोग नहीं जानते, प्याज और प्रोसेस्ड फूड बढ़ाते हैं दर्द; सीने-कंधे में परेशानी भी इसकी वजह बन सकते हैं

यात्रा, साइंस, स्पोर्ट्स
हार्वर्ड से जुड़ी न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैत आशिना कहती हैं, माइग्रेन और तनाव से होने वाले सिरदर्द या क्लस्टर सिरदर्द को बढ़ाने वाले कारणों को ट्रिगर कहा जाता है। अधूरी नींद, प्रोसेस्ड फूड और गंध के अलावा भी कई ऐसे कारण हैं सिरदर्द की वजह बनते हैं। जानिए सिरदर्द के लाइफस्टाइल से जुड़े कारण... नींद: दर्द का है सम्बंधनींद की कमी से माइग्रेन और तनाव के कारण सिरदर्द होता है। हालांकि, अबतक इसका सीधा कारण पता नहीं चल पाया है। लेकिन, विज्ञान के मुताबिक, दर्द और नींद का आपस में संबंध जरूर है। अच्छी नींद से सिरदर्द दर्द कम होता है। डाइट: प्रोसेस्ड फूड से खतराकुछ खाद्य पदार्थ जैसे बीन्स, दालें, केला, चीज, डेयरी प्रोडक्ट और प्याज माइग्रेन के दर्द को बढ़ा देते हैं। प्रोसेस्ड फूड जिनमें नाइट्राइट्स, मोनो सोडियम ग्लूटामेट पाए जाते हैं उनसे भी सिरदर्द बढ़ता है। एनवायरनमेंट: तेज गंध भी सिरदर्द का कारण...