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सिरदर्द के 4 कारण जिन्हें लोग नहीं जानते, प्याज और प्रोसेस्ड फूड बढ़ाते हैं दर्द; सीने-कंधे में परेशानी भी इसकी वजह बन सकते हैं

सिरदर्द के 4 कारण जिन्हें लोग नहीं जानते, प्याज और प्रोसेस्ड फूड बढ़ाते हैं दर्द; सीने-कंधे में परेशानी भी इसकी वजह बन सकते हैं

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हार्वर्ड से जुड़ी न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैत आशिना कहती हैं, माइग्रेन और तनाव से होने वाले सिरदर्द या क्लस्टर सिरदर्द को बढ़ाने वाले कारणों को ट्रिगर कहा जाता है। अधूरी नींद, प्रोसेस्ड फूड और गंध के अलावा भी कई ऐसे कारण हैं सिरदर्द की वजह बनते हैं। जानिए सिरदर्द के लाइफस्टाइल से जुड़े कारण... नींद: दर्द का है सम्बंधनींद की कमी से माइग्रेन और तनाव के कारण सिरदर्द होता है। हालांकि, अबतक इसका सीधा कारण पता नहीं चल पाया है। लेकिन, विज्ञान के मुताबिक, दर्द और नींद का आपस में संबंध जरूर है। अच्छी नींद से सिरदर्द दर्द कम होता है। डाइट: प्रोसेस्ड फूड से खतराकुछ खाद्य पदार्थ जैसे बीन्स, दालें, केला, चीज, डेयरी प्रोडक्ट और प्याज माइग्रेन के दर्द को बढ़ा देते हैं। प्रोसेस्ड फूड जिनमें नाइट्राइट्स, मोनो सोडियम ग्लूटामेट पाए जाते हैं उनसे भी सिरदर्द बढ़ता है। एनवायरनमेंट: तेज गंध भी सिरदर्द का कारण...
सदी के अंत तक इंसान 130 साल की उम्र तक जी सकेगा, पिछले एक दशक में लम्बी उम्र वालों की संख्या बढ़ी; अभी 118 साल की केन सबसे उम्रदराज

सदी के अंत तक इंसान 130 साल की उम्र तक जी सकेगा, पिछले एक दशक में लम्बी उम्र वालों की संख्या बढ़ी; अभी 118 साल की केन सबसे उम्रदराज

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ज्यादातर लोग मानते हैं कि दुनियाभर में बढ़ती बीमारियां इंसान की उम्र को घटा रही हैं, लेकिन हालिया रिसर्च के नतीजे चौंकाने वाले हैं। नई रिसर्च कहती है, इंसान की उम्र में इजाफा हुआ है। अब इंसान 130 साल तक जी सकता है। इतना ही नहीं, बीते एक दशक में लम्बी उम्र वालों की संख्या बढ़ी है। यह दावा वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। सदी के अंत तक दिखने लगेगा असरअमेरिकी शोधकर्ताओं ने इंसान की औसत उम्र निकालने के लिए दीर्घायु से जुड़े अंतरराष्ट्रीय डाटाबेस का प्रयोग किया। यह डाटा जर्मनी के मैक्स प्लैंक संस्थान ले लिया गया है। रिसर्च में सामने आया कि भविष्य में इंसान की उम्र बढ़ेगी। सदी के अंत तक इंसान 125 से 130 साल की उम्र तक जी सकेगा। सुपरसेंटेरियन लोगों की निगरानी कीशोधकर्ताओं के मुताबिक, वर्तमान में भी कई लोग 130 साल की उम्र तक जी सकते हैं। वैज्ञानिकों ने 100 से अधिक उम्र वाले सुप...
वैज्ञानिकों ने गाय के पेट में जीवाणुओं का ऐसा समूह खोजा जिसमें 3 तरह के प्लास्टिक को पचाने की ताकत; ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिकों का दावा

वैज्ञानिकों ने गाय के पेट में जीवाणुओं का ऐसा समूह खोजा जिसमें 3 तरह के प्लास्टिक को पचाने की ताकत; ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिकों का दावा

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गाय प्लास्टिक भी पचा सकती है। वैज्ञानिकों को गाय के पेट में जीवाणुओं का ऐसे समूह मिला है जो प्लास्टिक पचा सकता है। ये जीवाणु पेट में पहुंचने वाली प्लास्टिक को टुकड़ों में तोड़बर पचा देते हैं। यह दावा ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ नेचुरल रिर्सोसेज एंड लाइफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, गाय के रूमेन रेटिकुलम में ऐसे जीवाणओं का समूह पाया जाता है जो खाना पचाने का काम भी करते हैं। रूमेन रेटिकुलम गाय के पाचनतंत्र का एक हिस्सा होता है। जीवाणु तीन तरह के प्लास्टिक को पचाने में असरदारइसे समझने के लिए शोधकर्ताओं ने तीन तरह के प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया। पहला, पॉलिथिलीन टेराफथेलेट था। यह एक सिंथेटिक पॉलीमर है जिसका इस्तेमाल पैकेजिंग और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में किया जाता है। दूसरा प्लास्टिक पॉलीब्यूटिलीन एडिपेट टेरेफ़्थेलेट है, इसका इस्तेमाल प्लास्टिक बैग बनाने म...
पेनकिलर एस्प्रिन 18 तरह के कैंसर से मौत का खतरा 20% तक घटा सकती है, 2.5 लाख मरीजों पर हुई रिसर्च में साबित हुआ

पेनकिलर एस्प्रिन 18 तरह के कैंसर से मौत का खतरा 20% तक घटा सकती है, 2.5 लाख मरीजों पर हुई रिसर्च में साबित हुआ

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सस्ती और असरदार पेनकिलर कही जाने वाली दवा एस्प्रिन ब्रेस्ट, कोलोन और प्रोस्टेट जैसे कैंसर से मौत का खतरा 20 फीसदी तक घटा सकती है। रिसर्च करने के वाले कार्डिफ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, 18 तरह के कैंसर और एस्प्रिन के बीच सम्बंध को समझा गया। 2,50,000 मरीजों पर हुई रिसर्च में सामने आया कि ये 18 तरह के कैंसर से होने वाली मौत का खतरा कम कर सकती है। क्या काम करती है दवा, ये जानिएशोधकर्ताओं के मुताबिक, कैंसर बढ़ने पर यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से फैलने लगता है। एस्प्रिन कैंसर को पूरे शरीर फैलने से रोकती है। यही कारण है कि कैंसर के इलाज में एस्प्रिन एक कारगर दवा के तौर पर जानी जाती है। रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि कैंसर के मरीजों में जागरुकता होनी चाहिए कि वो डॉक्टर से एस्प्रिन लेने के लिए कह सकें। पिछले 50 सालों से एस्प्रिन के असर पर रिसर्च करने वाले प्रोफेसर पीटर एल्वुड का...
पेनकिलर एस्प्रिन 18 तरह के कैंसर से मौत का खतरा 20% तक घटा सकती है, 2.5 लाख मरीजों पर हुई रिसर्च में साबित हुआ

पेनकिलर एस्प्रिन 18 तरह के कैंसर से मौत का खतरा 20% तक घटा सकती है, 2.5 लाख मरीजों पर हुई रिसर्च में साबित हुआ

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सस्ती और असरदार पेनकिलर कही जाने वाली दवा एस्प्रिन ब्रेस्ट, कोलोन और प्रोस्टेट जैसे कैंसर से मौत का खतरा 20 फीसदी तक घटा सकती है। रिसर्च करने के वाले कार्डिफ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, 18 तरह के कैंसर और एस्प्रिन के बीच सम्बंध को समझा गया। 2,50,000 मरीजों पर हुई रिसर्च में सामने आया कि ये 18 तरह के कैंसर से होने वाली मौत का खतरा कम कर सकती है। क्या काम करती है दवा, ये जानिएशोधकर्ताओं के मुताबिक, कैंसर बढ़ने पर यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से फैलने लगता है। एस्प्रिन कैंसर को पूरे शरीर फैलने से रोकती है। यही कारण है कि कैंसर के इलाज में एस्प्रिन एक कारगर दवा के तौर पर जानी जाती है। रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि कैंसर के मरीजों में जागरुकता होनी चाहिए कि वो डॉक्टर से एस्प्रिन लेने के लिए कह सकें। पिछले 50 सालों से एस्प्रिन के असर पर रिसर्च करने वाले प्रोफेसर पीटर एल्वुड का...
25 मिनट तक नींद न आए तो बिस्तर छोड़कर कोई किताब पढ़ें, सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल खड़े होकर करें; जानिए ये तरीके कैसे काम करते हैं

25 मिनट तक नींद न आए तो बिस्तर छोड़कर कोई किताब पढ़ें, सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल खड़े होकर करें; जानिए ये तरीके कैसे काम करते हैं

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पिछले एक साल में कोरोना के चलते नींद की समस्या से पीड़ित लोगों की संख्या में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा भले ही अमेरिका का है, लेकिन कोरोनाकाल में नींद पर ऐसे ही दुष्प्रभाव दुनियाभर में देखे जा सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के मुताबिक, पिछले साल हुए एक सर्वे में 20% अमेरिकी युवाओं ने महामारी के कारण नींद को लेकर समस्या बताई थी, वहीं मार्च 2021 में किए गए सर्वे में ऐसे लोगों की संख्या 60% पहुंच तक गई है। नींद क्यों नहीं आती, इसके खतरे क्या हैं और इस समस्या को कैसे दूर करें, न्यूरोलॉजी एंड स्लीप सेंटर नई दिल्ली की स्लीप स्पेशलिस्ट डॉ. मनवीर भाटिया से जानिए.... ये हैं नींद न आने की वजह और खतरेएक्सपर्ट कहते हैं, लोग सोने के लिए बिस्तर पर देरी से जा रहे हैं और सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय तक बिस्तर पर लेटे रहते हैं, जिससे उनका सर्केडियन रिदम बिगड़...
बिना दिल के 555 दिन बिताने वाले शख्स की कहानी, एक दिन ऐसा भी आया जब कृत्रिम हार्ट ने 26 बार काम करना बंद किया

बिना दिल के 555 दिन बिताने वाले शख्स की कहानी, एक दिन ऐसा भी आया जब कृत्रिम हार्ट ने 26 बार काम करना बंद किया

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मिशिगन के रहने वाले स्टेन लार्किन की लाइफ चुनौतीभरी रही है। हार्ट डोनर के इंतजार में स्टेन ने 555 दिन बिना हार्ट के बिताए। इस दौरान सिंकआर्केडिया नाम की डिवाइस ने कृत्रिम हृदय की तरह काम किया। यह डिवाइस हर वक्त स्टेन के साथ रही। ऐसी डिवाइस का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब इंसान के दिल के दोनों हिस्से काम करना बंद कर देते हैं। 16 साल की उम्र बीमारी का पता चलास्टेन का हार्ट इतनी बुरी स्थिति में पहुंच चुका है, इसका पता तब चला जब वो 16 साल के थे। एक दिन बास्केट बॉल खेलते समय अचानक गिर पड़े। हालत बेहद नाजुक हो गई। हॉस्पिटल में हुई जांच रिपोर्ट में सामने आया कि वो एरिथमोजेनिक राइट वेंट्रीकुलर डिस्प्लेक्सिया नाम की बीमारी से जूझ रहे हैं। यह ऐसी बीमारी है जिसमें धड़कन अनियमित हो जाती हैं। कभी भी कार्डियक अरेस्ट हो सकता है, खासतौर पर एथलीट्स में। चूंकि स्टेन बास्केट बॉल प्लेयर रहे हैं इसलिए खतरा ...
वैक्सीन लगवाने से पहले न लें पेनकिलर्स, यह टीके के असर को कम कर सकती है; साइड इफेक्ट दिखने पर एक्सपर्ट की सलाह से ही दवाएं लें

वैक्सीन लगवाने से पहले न लें पेनकिलर्स, यह टीके के असर को कम कर सकती है; साइड इफेक्ट दिखने पर एक्सपर्ट की सलाह से ही दवाएं लें

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वैक्सीन लगवाने से पहले पेनकिलर्स न लें। यह चेतावनी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोशल मीडिया पर चल रही एक अफवाह का खंडन करते हुए दी है। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाह में दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन लेने से पहले पेनकिलर्स लें। ये दवा वैक्सीन के साइड इफेक्ट को कम करती है, जबकि यह दावा गलत है। असर कम हो सकता हैयूरोन्यूज को दिए एक बयान में WHO ने कहा है कि किसी भी शख्स को वैक्सीन लेने से पहले पेनकिलर लेने की सलाह नहीं दी गई है। ऐसा करने पर वैक्सीन पर असर कम हो सकता है। साइड इफेक्ट्स रोकने के लिए वैक्सीनेशन से पहले पैरासिटामॉल जैसे पेनकिलर्स लेने की बात भी कभी नहीं कही गई। सिर्फ ऐसी स्थिति में लें पेनकिलर्सविश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है, वैक्सीन लगवाने के बाद कुछ खास लक्षण जैसे दर्द, बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द होने पर ही पेनकिलर्स ले सकते हैं, वो डॉक्टरी सलाह के बाद। वैक्...
वैज्ञानिकों ने वजन घटाने वाली डिवाइस बनाई, दावा; इसे जबड़े में लगाकर दो हफ्तों में 6 किलो से ज्यादा वजन घटाया गया

वैज्ञानिकों ने वजन घटाने वाली डिवाइस बनाई, दावा; इसे जबड़े में लगाकर दो हफ्तों में 6 किलो से ज्यादा वजन घटाया गया

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न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने दुनिया की पहली वेटलॉस डिवाइस बनाई है जो वजन को घटाने में मदद करती है। इसका नाम डेंटलस्लिम डाइट कंट्रोल रखा गया है। वैज्ञानिकों का दावा है, यह डिवाइस जबड़े को लॉक करके मोटापा घटाती है। इस डिवाइस का ट्रायल किया गया है। ट्रायल के दौरान 2 हफ्तों के अंदर लोगों ने 6.36 किलो वजन घटाया। ऐसे काम करती है डिवाइस सबसे पहले इस डिवाइस को ऊपर और नीचे के जबड़ों में अलग-अलग फिक्स किया जाता है।डिवाइस में चुम्बक लगे होने के कारण इंसान का मुंह 2 एमएम से ज्यादा नहीं खुल पाता है।नतीजा, इंसान आसानी से मोटा अनाज चबा नहीं पाता उसे लिक्विड डाइट पर निर्भर रहना पड़ता है और वजन नहीं बढ़ता है।दावा, बोलने की क्षमता पर नहीं डालती बुरा असर डिवाइस को तैयार करनी वाली ओटेगो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, इसे लगाने से इंसान के बोलने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता और न ही सांस लेने...
प्राकृतिक आपदा में फंसे होने की लोगों की आवाज पहचानकर बचाने वाला ड्रोन, यह गंध सूंघकर भी पता लगा सकेगा कि पीड़ित कहां है

प्राकृतिक आपदा में फंसे होने की लोगों की आवाज पहचानकर बचाने वाला ड्रोन, यह गंध सूंघकर भी पता लगा सकेगा कि पीड़ित कहां है

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जर्मनी के वैज्ञानिकों ने ऐसा ड्रोन तैयार किया है जो प्राकृतिक आपदा में फंसे लोगों को उनकी चीख-पुकार सुनकर बचा सकेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस यह ड्रोन इंसान, जानवर और इसके पंखों की आवाज में फर्क कर सकता है। ट्रायल के दौरान इंसान के चिल्लाने, तालियों और किसी चीज के टकराने जैसी आवाजें इसे सुनाई गईं और टेस्टिंग सफल रही। इसे वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। पीड़ितों को सूंघ भी सकेगावैज्ञानिकों के मुताबिक, इस ड्रोन को इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि यह आपदा में फंसे लोगों की गंध सूंघकर उनका पता लगा सके। ठीक वैसे ही जैसे कुत्ते की ब्लडहाउंड नस्ल गंध सूंघकर इंसान का पता लगा लेती है। इसे तैयार करने वाली टीम की सदस्य वेरेला कहती हैं, अगर कहीं कोई इमारत ध्वस्त हो गई है तो यह रेस्क्यू टीम को अलर्ट कर सकता है। ऐसे तैयार हुआ ड्रोन वैज्ञानिकों ने मुसीबत में फंसे लोगो...