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अरबों की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे

श्रीगंगानगर(सीमा सन्देश)। जिले के सूरतगढ़ कस्बे में अरबों रुपए की सरकारी जमीन पर भूमाफिया द्वारा किये जा रहे अवैध कब्जों के मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय में राज्य सरकार व संबंधित अधिकारियों के खिलाफ याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है। यह मामला इन दिनों जयपुर के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। नगरपालिका सूरतगढ़ के पैरिफेरी क्षेत्र में खसरा नं. 335/6 की यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में आराजी राज के रूप में दर्ज है। यह क्षेत्र नगरपालिका के वार्ड नं. 1 अर्थात शहरी क्षेत्र के दायरे में आने के बाद से बेशकीमती हो गई है। उक्त भूमि पर किसी निजी व्यक्ति का स्वामित्व नहीं है। अरबों रुपए की इस भूमि पर कुछ समय से भू-माफिया कुछ लोगों के साथ मिलकर अतिक्रमण करने में जुटा है। अतिक्रमण कर यहां कमरे व चारदीवारी आदि बनाकर ये भू-माफिया इन भूखंडों व मकानों को आगे बेच रहा है। सरकारी भूमि होने के कारण इसका अतिक्रमण व बेचान अवैध व शून्य है।
स्वायत्त शासन विभाग व प्रशासन पर भी भू-माफिया हावी
भू-माफिया इस मामले को सूरतगढ़ के धाणक मोहल्ला निवासी महबूब खाँ व वार्ड नं. 1 निवासी हरिप्रसाद ने उठाया है। इन दोनों ने अतिक्रमणों को ध्वस्त कर इस सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करवाने के लिए स्थानीय सक्षम अधिकारियों को कई बार लिखा। इसके बाद उन्होंने स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर को लिखा। स्वायत्त शासन विभाग ने अवैध अतिक्रमण चिह्नित कर इन्हें हटाने के आदेश 16 सितम्बर 2019 को जारी कर दिये। इसके बाद भी स्थानीय अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने तथा नये अतिक्रमण रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाये। इन दोनों ने एसडीएम, सूरतगढ़ को लिखा तो उन्होंने तहसीलदार को उचित कार्यवाही के लिए निर्देशित कर दिया। तहसीलदार ने संबंधित पटवारी को अतिक्रमणों की सूची तैयार करने के निर्देश दे दिए। पटवारी ने अवैध अतिक्रमणों की सूची भी तैयार कर ली, लेकिन डेढ़ साल से अधिक का समय होने पर भी न तो कोई कब्जा हटा, न कोई कार्रवाई हुई। इस पर महबूब खाँ व हरिप्रसाद ने जिला कलक्टर को प्रार्थना पत्र दिया। जिला कलक्टर ने भी संबंधित अधिकारियों को अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, कार्रवाही फिर भी नहीं हुई।
नियमानुसार आवंटन हो तो सरकार को मिले भारी राजस्व
खसरा नं. 356/6 की इस सरकारी भूमि का यदि नियमानुसार आवंटन या बेचान किया जाए तो इससे राज्य सरकार या नगरपालिका को भारी राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसके बावजूद संबंधित विभाग इस मामले को लेकर कतई गंभीर नहीं हैं। संबंधित अधिकारियों द्वारा इस मामले में कार्रवाई न किये जाने के कारण ही भू-माफिया व अन्य व्यक्ति इस भूमि पर लगातार अतिक्रमण कर रहे हैं। अतिक्रमण के पश्चात यह भूमि भोले-भाले नागरिकों को ऊंची कीमत पर बेची जा रही है। यह पूरा खेल स्थानीय अधिकारियों की आंखों के सामने चल रहा है, लेकिन किसी भी अधिकारी द्वारा इस मामले में उचित कदम नहीं उठाया जा रहा।
पब्लिक लैंड प्रोटेक्शन सैल भी रहा नाकाम
अवैध कब्जों के मामले में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने जगदीश प्रसाद मीणा बनाम राजस्थान सरकार (जनहित याचिका 10819/2018) में 30 जनवरी 2019 को पारित आदेश में जिलास्तर पर पब्लिक लैंड प्रोटेक्शन सैल (सार्वजनिक भूमि संरक्षण प्रकोष्ठ) का गठन करने के निर्देश दिए थे। इस प्रकोष्ठ का प्रभारी सभी जिलों में जिला कलक्टर है। इसी आदेश में उच्च न्यायालय ने अतिक्रमणों से संबंधित सभी प्रार्थना पत्र उक्त प्रकोष्ठ द्वारा विचारित कर अतिक्रमण हटाने के निर्द्रेश दिए गए थे। इन दोनों जागरुक नागरिकों ने इस प्रकोष्ठ के समक्ष भी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर उक्त भूमि में अतिक्रमण हटाने का आग्रह किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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